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Thursday, April 11, 2019

GHAZAL

عجب ہے، خواہشیں ہم لا زوال رکھتے ہیں
یوں اپنے آپ کو ہم پائمال رکھتے ہیں
ملا ہے آج جو خوش اس پہ ہم نہیں ہوتے
ہم اپنی ساری خوشی کل پہ ٹال رکھتے ہیں
جو ہم نے ساتھ گزارے تھے تیری قربت میں
وہ چند لمحے کئی ماہ و سال رکھتے ہیں
اگر ہو وقت میسر ہماری بات بھی سن
اے پیاری زندگی ہم کچھ سوال رکھتے ہیں
تمہاری باتیں، تمہاری حسین یادوں کو
بہ مثل دھڑکنیں دل میں سنبھال رکھتے ہیں
وہ آ کے خواب میں زلفیں سنوار دیتے ہیں
کچھ اس طرح وہ ہمارا خیال رکھتے ہیں
وہ شخص بیچ سفر میں جو ساتھ چھوڑ گیا
نہ اس سے رنج نہ کوئی ملال رکھتے ہیں

نذرالحسن نور
١٠ اپریل ٢٠١٩

Wednesday, April 03, 2019

6.5 लाख साक्षरता कर्मी के पीड़ित परिवारों ने दृढ संकल्पित होकर NDA का विरोध करने का निर्णय लिया

शिक्षा सर्वांगीण विकास की कुंजी है तथा साक्षरता इसकी पहला सोपान।मानव विकास के सूचकांक में प्रौढ़ साक्षरता दर अत्यंत महत्वपूर्ण फैक्टर है।साक्षरता आंदोलन दूसरी आजादी का महत्वपूर्ण आंदोलन है।इच्छाशक्ति विहीन जन विरोधी केंद्र की नरेंद्र मोदी की भाजपा सरकार ने  सुनियोजित साजिश के तहत दुर्भावना से ग्रसित होकर साक्षर भारत मिशन का कार्यावधि विस्तार रोक कर देश में संचालित प्रौढ़ साक्षरता कार्यक्रम को सर्वथा  बन्द कर दिया तथा  देश में कार्यरत 6.5लाख कर्मी प्रेरक समन्वयक को  सेवामुक्त कर जघन्य अपराध तथा देश के आवाम के साथ गद्दारी किया है।
      आसन्न लोक सभा चनाव में NDA उम्मीदवार को करारी हार दिलाने के लिए 6.5 लाख साक्षरता कर्मी के पीड़ित परिवार दृढ संकल्पित होकर विरोध करने निर्णय लिया है।
  नागेन्द्र कुमार पासवान
मुख्य कार्यक्रम समन्वयक
सीतामढ़ी सह-संगठन मंत्री
भारतीय मजदूर संघ सीतामढ़ी।

Tuesday, April 02, 2019

ठनका गिरने से एकडण्डी स्थित ट्रांसफॉर्मर जला

31 मार्च की संध्या ठनका गिरने से प्रखण्ड परिहार ,परिहार उत्तरी पंचायत के ग्राम एकडण्डी में स्थित ट्रांसफार्मर पर ठनका गिरा जिस से ट्रांसफॉर्मर जल गया।ट्रांसफार्मर के जल जाने से बिजली की आपूर्ति उक्त ग्राम में बाधित हो चुकी है।ट्रांसफॉर्मर के बदलने की दिशा में अभी तक कोई प्रगति नहीं दिखाई पड़ रही है।बिजली की आपूर्ति बाधित होने की वजह से लोगों के समक्ष समस्या उतपन्न हो चुकी है।

Sunday, March 31, 2019

नागेंद्र कुमार पासवान मुख्य कार्यक्रम समनववयक साक्षर भारत सीतामढ़ी की पुत्री भारती कुमारी ने वर्ष 2019 में आयोजित आई एस सी की परीक्षा में 329 अंक के साथ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्णता प्राप्त कर जिला का नाम रौशन किया



नागेंद्र कुमार पासवान मुख्य कार्यक्रम समनववयक साक्षर भारत सीतामढ़ी की पुत्री भारती कुमारी ने वर्ष 2019 में आयोजित आई एस सी की परीक्षा में 329 अंक के साथ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्णता प्राप्त कर  जिला का नाम रौशन किया है। परिवार में ख़ुशी का माहौल है अपनी सफलता के लिए शिक्षक माता पिता एवम् बड़ी दीदी का सहयोग एवम् प्रेरणा महत्वपूर्ण मानती है।आगे वे कृषि वैज्ञानिक बनना चाहती है।

Saturday, March 23, 2019

जदयू की सीटों पर उम्मीदवार:

जदयू की सीटों पर उम्मीदवार:
वाल्मिकीनगर - वैधनाथ प्रसाद महतो
सीतामढ़ी - डां वरुण कुमार
झंझारपुर - राम प्रीत मंडल
सुपौल - दिलेश्वर कमैत
किशनगंज - महमूद अशरफ
कटिहार - दुलाल चंद गोस्वामी 
पूर्णिया - संतोष कुमार गोस्वामी
मधेपुरा - दिनेश चंद्र यादव
गोपालगंज - आलोक कुमार सुमन
भागलपुर - अजय कुमार मंडल
सीवान -  कविता सिंह
बांका - गिरीधारी यादव
मुंगेर - राजीव रंजन सिंह
नालंदा - कौशलेंद्र कुमार
काराकाट - महाबली सिंह
जहानाबाद - चंद्रवेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी
गया - विजय कुमार मांझी

भाजपा सीटों पर उम्मीदवार:

पश्चिमी चंपारण-  डां संजय जयसवाल
पूर्वी चंपारण- राधा मोहन सिंह
शिवहर- श्रीमती रमा दैवी
मधुबनी- अशोक कुमार यादव
अररिया- प्रदीप सिंह
दरभंगा- गोपालजी ठाकुर
मुजफ्फरपुर,- अजय निषाद
महाराजगंज- जनार्दन सिंह
सारण - राजीव प्रताप रूड़ी
उजियारपुर- नित्यानंद राय
बेगूसराय- गिरिराज सिंह
पटना साहिब - रविशंकर प्रसाद
पाटलिपुत्र - काम कृपाल यादव
आरा - राजकुमार सिंह
बक्सर- अश्विनी कुमार चौबे
सासाराम- छेदी पासवान
औरंगाबाद- सुशील कुमार सिंह

लोजपा की  सीटों पर उम्मीदवार
हाजीपुर - पशुपति कुमार पारस
जमुई - चिराग कुमार पासवान
समस्तीपुर - रामचंद्र पासवान
खगड़िया -
वैशाली - वीणा देवी
नवादा- चंदन सिंह

Sunday, March 10, 2019

सीतामढ़ी जिलाधिकारी एवं पूर्व पुलिस अधीक्षक पर हो हत्या का मुकदमा दर्जः बेदारी कारवाँ

सीतामढ़ी जिलाधिकारी एवं पूर्व पुलिस अधीक्षक पर हो हत्या का मुकदमा दर्जः बेदारी कारवाँ

*जाँच रिपोर्ट आने के बाद भी आरोपी पुलिस वालों पर 302 का मुकदमा क्यों नहीं? असद रशीद/समिउल्लाह*

*मृतक के परिजन को एक-एक करोड़ मुआवाजा एवं परिवार के एक सदस्य को नौकरी दे नीतीश सरकार*

मधुबनी- आॅल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ, मधुबनी ने पूर्वी चम्पारण के चकिया थाना क्षेत्र के रामडिहा निवासी मो0 गुफरान एवं मो0 तसलीम की पुलिस हिरासत में टार्चर कर निमर्म हत्या के विरोध में मधुबनी थाना मोड़ पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान बेदारी कारवाँ के लोगों ने नीतीश सरकार मुर्दाबाद, अल्पसंख्यक विरोधी नीतीश सरकार हाय हाय, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा नहीं तो वोट नहीं, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करो, बिहार एवं सितामढ़ी के मुसलमानों को टारगेट करना बन्द करो, सीतामढ़ी जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक पर हत्या का मुकदमा दर्ज करो, मृतक के परिवार को एक एक करोड़ मुआवजा एवं एक एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दो आदि जमकर नारा लगा रहे थे और नीतीश सरकार को अल्पसंख्यक विरोधी सरकार भी बता रहे थे। विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, सितामढ़ी वर्तमान जिलाधिकारी एवं पूर्व पुलिस अधीक्षक का थाना मोड़ पर पुतला दहन किया गया। प्रतिवाद मार्च एवं पुतला दहन कार्यक्रम का नेतृत्व संयुक्त रूप से बेदारी कारवाँ के मधुबनी महासचिव समिउल्लाह नदवी एवं असद रशीद नदवी कर रहे थे। विरोध प्रदर्शन के द्वारा यह मांग की गई कि दोनों युवकों की हत्या की निष्पक्ष सी0बी0आई0 जाँच कराई जाए और सभी दोषी पुलिस कर्मी, जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो हमारा संगठन मिथिलाँचल में बड़ा आन्दोलन तो करेगा ही पटना के गर्दनीबाग में भी विरोध प्रदर्शन करेगा और तबतक करता रहेगा जबतक सितामढ़ी जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर जेल में नहीं डाला जाता। पिछले दिनों पूर्वी चम्पारण के चकिया थाना क्षेत्र के रामडिहा निवासी मो0 गुफरान एवं मो0 तसलीम को सितामढ़ी के डुमरा थाना की पुलिस ने उठाकार पुछताछ के दौरान थर्ड डिग्री का इस्तेमाल कर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने पहले तो इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। इस मामले पर परिवार के सदस्यों ने साफ साफ पुलिस पर आरोप लगाया है कि जबरन हमारे लड़के से जुर्म कबूल करवाने के लिए डुमरा थाना पुलिस ने थर्ड डिग्री का प्रयोग किया है जिस कारण दोनों युवकों की मृत्यु हुई है। जाँच रिपोर्ट ने भी यह साबित कर दिया है कि टार्चर के कारण ही दोनों युवक की जान गई है। कुछ पुलिस कर्मी को सस्पेंड भी किया गया है, कुछ पर केस भी दर्ज किया गया है, पुलिस अधीक्षक का भी तबादला कर दिया गया है। जब्कि पुलिस अधीक्षक एवं जिलाधिकारी भी उतने ही दोषी हैं जितना पुलिस कर्मी। फिर सरकार ऐसे लोगों को क्यों बचा रही है? आखिर नीतीश कुमार की किया मजबूरी है कि दंगाई एवं हत्यारा जिलाधिकारी का तबादला नहीं कर पा रहे हैं? वर्तमान जिलाधिकारी के संरक्षण में ही पिछले दिनों सितामढ़ी में हुए दंगा में जैनुल अंसारी की निर्मम हत्या कर सरेआम पुलिस की मौजूदगी में जला दिया गया था तब से लगातार नीतीश सरकार अंधी बनी हुई है और साजिश के तहत अल्पसंख्यकों की हत्या करा रही है। सितामढ़ी दंगा के आरोपियों को खुली छूट दे दी गई है किसी पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है, फिर भी नीतीश कुमार सुशासन, न्याय के साथ विकास और फर्जी कानून का राज का माला जपते नहीं थकते हैं। पिछले कुछ दिनों से अल्पसंख्यक में डर एवं खाफै का माहौल पैदा कर एकबार फिर से वोट की राजनीति कर रहे हैं नीतीश कुमार जिसमें वह किसी भी हाल में कामयाब नहीं होंगे। मुस्लिम तुष्टिकरण के मामले में नीतीश कुमार एक नम्बर के नेता हैं मुसलमानों में फुट डालो राज करो की नीति पर इन दिनों अधिक काम कर रहे हैं, लेकिन बिहार हीं नहीं देश के अल्पसंख्यक समुदाय अब और अधिक मुर्ख बनने वाले नहीं हैं, अगर सुरक्षा नहीं तो वोट नहीं, अधिकार नहीं तो वोट नहीं, शिक्षा नहीं तो वोट नहीं की नीति पर अल्पसंख्यक समुदाय भी अब काम करना शुरू कर दिया है जिसका परिणाम नीतीश गठबंधन को 2019-2020 के चुनाव में जरूर दिखेगा। अल्पसंख्यक समुदाय सत्ता सौंप सकता है तो उखाड़ने में भी अधिक समय नहीं लेता। विरोध प्रदर्शन में उपाध्यक्ष मकसूद आलम पप्पु खान, ख़ालिद हुसैन आदि बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

भवदीय
समिउल्लाह नदवी
महासिचव

Wednesday, March 06, 2019

सीतामढ़ी में इमारत ए शरिया की ओर से विशेष तरबियती इजलास जारी

सीतामढ़ी में इमारत ए शरिया की ओर से विशेष तरबियती इजलास जारी

अमीरे शरीअत मौलाना मोहम्मद वली रहमानी साहब ने सुनी लोगों की समस्या एँ
सीतामढ़ी में इमारत शरिया की निगरानी में दो दिवसीय विशेष सत्र चल रहा है, अमीर शरीयत , हज़रत मौलाना सैयद मुहम्मद वली रहमानी की अध्यक्षता में इजलास का पहला सत्र  6 मार्च बुधवार को सुबह 10:30 बजे मदरसा रहमानीया मेहसौल के समीप मैदान मे शुरू हुआ। इस इजलास में अपने विचार रखते हुए अमीरे शरीयत ने शिक्षा पर ज़ोर देते हुए कहा की माँ बाप की ज़िम्मेदारी है की अपने बच्चों के शिक्षा का प्रबन्ध करें एवं उन्हें नैतिक शिक्षा भी दिलाएँ । उन्होंने आपस के झगड़ों को समाप्त करने एवं मिल जुल कर आपसी प्रेम , भाई चारा एवं अमन चैन से रहने की अपील की । उन्होंने
कहा की इमारत शरीया के इस इजलास का मकसद यह है कि गाँव गाँव से इमारत शरिया के संमबंध को मजबूत किया जाए एवं आप से आप की समस्याएँ सुनी जाएँ एवं उन के समाधान कि कोशिश की जाए ।
इमारत शरीया के सचिव मौलाना अनिसुर रहमान कासमी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि इस्लाम की बुनियादी शिक्षाएँ सभी के लिए समान हैं जिस तरह एक मुसलमान की जान व माल इज्ज़त व आबरू कि हिफाज़त करना हमारे लिए ज़रूरी है उसी प्रकार एक गैर मुस्लिम की जान माल इज्ज़त व आबरू की रक्षा करना हमारा धर्म है । उन्होंने समाजिक बुराइयों , दहेज, तिलक कि रस्म, शराब एवं सूद की बुराई बयान करते हुए समाज को इन बुराइयों से पाक करने का आह्वान किया । इमारत शरिया के उप सचिव मौलाना स्नाउल होदा कासमी ने अपने वक्तव्य में इमारत शरिया के विभिन्न कामों पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि इमारत शरिया एकता , अमन एवं भाई चारे की तालीम देता है और मिल जुल कर रहने एवं सामाजिक विकास के लिए काम करने पर ज़ोर देता है। इमारत शरिया के उप सचिव मौलाना शिबली अल कासमी ने इमारत शरिया के प्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों को बयान किया और कहा कि इमारत शरीया के प्रतिनिधि कि ज़िम्मेदारी है कि वह अपने गाँव एवं सामज की चहुमुखी विकास एवं उनके नैतिक , शैक्षिक एवं आर्थिक बेहतरी के लिए कोशिश करे । इस पहले सत्र का संचालन इमारत शरीया के उप सचिव मौलाना मुफ़्ती सोहराब नदवी ने किया। इस इजलास मे मौलाना मुफती नजर तौहीद मुजाहिरी काजी ए शरीयत चतरा झारखंड एंव काजी इमरान साहब बालासाथ, मौलाना कमर अनीस कासमी भी उपस्थित थे। वहीं इजलास मे शहर के गणमान्य मदरसा रहमानिया मेहसौल के अध्यक्ष  मो अरमान अली,सचिव जफर कमाल अलवी, मौलाना इजहार,मो कमर अखतर, शफीक खान,मो मुर्तुजा,अनवारुल्लाह फलक सबीह अहमद,मो आरिफ हुसैन, मो असद, डॉ साजिद अली खान ,शमस शाहनवाज ,हाजी मो हसमत हुसैन, हाजी मोख्तार आलम, हाजी अब्दुल्लाह रहमानी, बसारत करीम गुलाब, पत्रकार मो सदरे आलम नोमानी, मुन्ना तसलीम ,फैयाज आलम बबलू, सिफ्फत हबीबी, मो मुराद, सिकन्दर हयात,मो मजहर अली राजा समेत हजारो लोग शामिल थे।

Tuesday, March 05, 2019

कमज़ोर आर्थिक स्थिति के कारण शिक्षा से वंचित होते नौजवान

सीतामढ़ी: कमज़ोर आर्थिक स्थिति के कारण शिक्षा से वंचित होते नौजवान

पिछले माह 23 फरवरी से लेकर 28 फरवरी तक राष्ट्र सेवा दल, सेवक फाउंडेशन और सद्भावना संगम की एक टीम ज़िला के बाजपट्टी, नानपुर, बोखरा, पुपरी, परिहार और सोनबरसा के विभिन्न गांव और पंचायतों का 'सद्भावना, शिक्षा और रोज़गार' के मुद्दे पर भ्रमण कर रही थी। जिसका हिस्सा मैं भी था। शिक्षा और रोज़गार पर सरकार की स्थिति और नीतियों से कम और ज़्यादा राज्य का हर ब्यक्ति अवगत है। लेकिन बिहार का यह जिला शैक्षणिक रूप से और ज़िलों की तुलना में कुछ ज़्यादा ही कमज़ोर है। सरकारी संस्थान की गुणवत्ता पर बिहार सरकार खुद मान चुकी है कि पाँचवी क्लास का बच्चा दूसरी क्लास के गणित का हल नहीं कर सकता। इसकी चपेट में इंटर और स्नातक के छात्र भी उतने ही हैं जितने मिडिल और प्राइमरी स्कूल के बच्चे। कारण अनेक है जिसकी चर्चा और निवारण पर विस्तार से की जानी चाहिए।

इस यात्रा के दौरान बहुत से छात्र ऐसे मिले जिनके अंदर काबिलियत कूट कूट कर भरी थी लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वो अपनी शिक्षा को आगे तक नहीं ले जा सकते। उनमें से कई खुद ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ इस बात पर चिंतित हैं कि आगे की पढ़ाई कैसे होगी?

आज जब हमारा समाज जुलूस-जलसों और मुशायरों पर लाखों रुपया फूंक दे रहा है ऐसे में समाज के इन होनहार छात्रों पर हमारी नज़र क्यों नहीं जाती? हम जितनी आसानी और रुचि से मज़हबी जलसों के लिए चंदा इकट्ठा करने के लिए निकलते हैं हमारे ख्याल में ऐसा क्यों नहीं आता कि हम इन बच्चों की शिक्षा के लिए भी ऐसे ही समाज के अंदर एक मुहिम चलाएं और आपसी सहयोग से इनकी पढ़ाई का खर्च इकट्ठा करें? क्या इन छात्रों की शिक्षा की जगह मज़हबी जलसों के नाम पर होने वाले चंदे ज़्यादा अहमियत रखते हैं? और क्या जो लोग इन जलसों और मुशायरों के लिए दिल खोलकर चंदा देते हैं उन्हें समाज के इन कमज़ोर तबक़ों की असलियत और ज़िम्मेदारी पता नहीं? सामाजिक और आर्थिक पसमांदा समाज के इन छात्रों से क्या हमारा कोई सरोकार नहीं?

कोई ये सारे सवालात मुझसे भी कर सकता है। मैं स्वयं को भी इतना ही दोषी मानता हूं जितना दोष मैं समाज के दूसरे लोगों पर मढ़ रहा हूँ। लेकिन मुझमें और समाज के दूसरे लोगों में ये फ़र्क़ ज़रूर समझता हूं कि खुद पर और आप पर सवाल उठाने की हिम्मत भी मैंने ही कि है। क्या समाज के दूसरे लोग भी इस सवाल को इतने ही ज़ोर से उठाने ही हिम्मत और हौसला रखते हैं? अगर हां तो सबसे पहले इन जुलूस, जलसों और मुशायरे बाजों से सवाल कीजिये कि आखिर ये समाज को देने क्या जा रहा है? किसी सरकारी प्रायोजित ' सियासी और तरबियती' प्रोग्राम पर समाज लाखों और करोड़ों क्यों खर्च करे जबकि समाज का नौजवान एक तरफ आर्थिक कमज़ोरी से अशिक्षित और बेरोज़गार हो रहा है।

मज़हब हमें शिक्षित होना सिखाता है, न्याय के लिए आवाज़ उठाने की बात करता है, आपसी बराबरी और भाईचारे की बात करता है, ग़रीब और मजबूरों के लिए खड़े होने की बात करता है। लेकिन क्या सच में हम ऐसा कर पा रहे हैं?

मेरा सवाल उन इदारों के ज़िम्मेदारों से भी है जो पूरे मुस्लिम समाज को अपनी छुपी सियासी मफ़ादात की खातिर साल भर इन जलसों में उलझाकर रखे हुए हैं। क्यों करोड़ों का ये बोझ आप लोग समाज पर डालते हैं? क्या मुस्लिम समाज की समस्यायों का हल ये जलसे हैं? आप क्यों नहीं सरकारों के विरोध में शिक्षा सुधार के लिए उतरते, आप क्यों नहीं राज्य के नौजवानों के रोज़गार दिलाने की तहरीक चलाते? अगर आप ये नहीं कर सकते तो मैं आपके इस जलसे का बॉयकॉट करता हूँ। मेरे जैसे युवा के लिए इस समाज में शिक्षा और रोज़गार ज़्यादा अहम हैं ये मज़हबी जलसे नहीं।

इस राज्य का अभिशाप अशिक्षा, बेरोज़गारी और साम्प्रदायिकता है। जो मज़हबी जलसों से नहीं मिटने वाला। युवा अपना फैसला खुद करें की उनका फायदा धर्म के नाम पर एक भीड़ बनने में है या अपने अधिकार के लिए सरकारों के समक्ष सवाल रखने में।

इंकेलाब, ज़िंदाबाद।।

तनवीर आलम
प्रेसिडेंट
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एलुमनाई एसोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र।
मोब- +91-9004955775
दिनांक: 5 मार्च 2019
सीतामढ़ी

Sunday, March 03, 2019

बिहार के चयनमुक्त तालीमी मरकज़ शिक्षा स्वंय सेवकों की सेवा बहाल की जाए

बिहार के चयनमुक्त तालीमी मरकज़ शिक्षा स्वंय सेवकों की सेवा बहाल की जाए क्योंकि की वक़्त के साथ - साथ इनकी हालत बद से बदतर होती जा रही है परिवारों के सामने भुखमरी की हालत पैदा हो गई है।इनकी बहाली सरकार के निर्देशों के मुताबिक ही हुई थी और सरकार के पदाधिकारियों के ज़रिए ही बहाली की गई थी ये खुद से बहाल नहीं हो गए थे।आठ साल तक निरन्तर सेवा लेने के बाद अचानक हटा देना नियम संगत नहीं कहा जा सकता है।अगर सामान्य जाति के मुसलमानों के बहाली का प्रावधान नहीं होता तो सम्पूर्ण बिहार में करीब तीन हज़ार पाँच सौ लोगों की बहाली नहीं होती ।जहां तक भूलवस होने की बात है तो भूल एकाध मामले में हो सकती है मगर ऐसा नहीं है सम्पूर्ण बिहार में सामान्य मुस्लिम की बहाली हुई जिस से वाज़े होता है कि सामान्य मुस्लिमों के बहाली का प्रावधान था अगर ऐसा नहीं होता तो पूरे बिहार में सामान्य मुस्लिमों की बहाली नही होती।

विशिष्ट पोस्ट

सामान्य(मुस्लिम)जाति के शिक्षा स्वयं सेवी(तालीमी मरकज़) को हटाने से संबंधित निर्णय को वापस ले सरकार वरना सड़क से लेकर संसद तक होगा आंदोलन :- मोहम्मद कमरे आलम

आठ वर्षों से कार्य कर रहे सामान्य मुस्लिम जाति के शिक्षा स्वयं सेवी(तालीमी मरकज़) को एक झटके में बिहार सरकार द्वारा सेवा से यह कह कर हटा दिया...