Saturday, January 02, 2016

लिज्जत ए दर्द वफा

इब्राहीम अश्क
------------
लिज्जत ए दर्द वफा और बढ़ा दे जाना ।
दिल में जख्मो के नये फूल खिला दे जाना।।
इश्क मेरा ढनक रंग हुआ जाता है ।
तु भी कुछ रंग मुहब्बत के मिला दे जाना।।
तेरी तस्वीर बनाई है फ़लक पर मैंने।
मांग में चाँद सितारों को सजा दे जाना ।।
बे खुली में न रहे आलम ए हस्ती का ख्याल ।
तु भी औरों की तरह मुझ को भुला दे जाना।।
हम तो हैं खाक ए नशीं अर्श को छुने वाले ।
अज़मतें और मुहब्बत की बढ़ा दे जाना ।।
अपने दर से तेरे घर तक का सफर करना है।
दूर से तु मुझे आवाज़ लगा दे जाना ।।
मेरी तख्लिक़ तेरे से मंसूब   हुई     ।
बज्म दुनिया में ग़जल मेरी सुना दे जाना ।।
-------------


Sent from my Samsung Galaxy smartphone.

Friday, January 01, 2016

नया साल 2016 मुबारक

नया साल हर खास व आम को मुबारक मुबारक मुबारक हो।
हिनदुसतान से नफरत को मिटा देना है मुहब्बत का शमा जला देना है।
अब यहाँ सिर्फ मुहब्बत ही होगा, नफरत का कोई नामों निशान नहीं होगा
मुहब्बत मुबारक, नया साल मुबारक ।।

Tuesday, December 29, 2015

ग़ज़ल

बहादुर शाह ज़फ़र
-------------------
बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी।

जैसी अब है तेरी महफिल कभी ऐसी तो न थी।।
ले गया छिन के आज तेरा सब्रो क़रार।
बे क़रारी तुझे ऐ दिल कभी तो न थीं ।।
चश्मे क़ातिल मेरी दुश्मन थीं हमेशा लेकिन।
जैसी अब हो गई क़ातिल कभी ऐसी तो न थी।।
उसकी ऑखो ने खुदा जाने क्या क्या जादू।
के तबीयत मेरी माएल कभी ऐसी तो न थी।।
क्या सबब तु जो बिगड़ता हैं ज़फ़र पर हर बार।
खु तेरी हुर शमाएल कभी ऐसी तो न थी।।
----------------------------------------------

Monday, December 28, 2015

उदास लम्हें

 आज मैं काफी उदास हूँ क्योंकि मेरा सबसे छोटा लड़का मो अरसलान पिछले सात दिनों से बीमार चल रहाहै ।

विशिष्ट पोस्ट

सामान्य(मुस्लिम)जाति के शिक्षा स्वयं सेवी(तालीमी मरकज़) को हटाने से संबंधित निर्णय को वापस ले सरकार वरना सड़क से लेकर संसद तक होगा आंदोलन :- मोहम्मद कमरे आलम

आठ वर्षों से कार्य कर रहे सामान्य मुस्लिम जाति के शिक्षा स्वयं सेवी(तालीमी मरकज़) को एक झटके में बिहार सरकार द्वारा सेवा से यह कह कर हटा दिया...