Monday, March 13, 2017

रंग

मेहजबीं
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रंग हैं प्यार के....रंग हैं दुलार के
रंग हैं बहार के...रंग हैं फुहार के
रंग में रंगी चुनरिया.. उनके दिदार से
रंग में रंगी ज़िंदगी ... उसके इज़हार से।

रंग ही रंग हैं
इसमें, उसमें, मुझमें, तुझमें, सब में
नज़र में रंग हैं ... जिगर में रंग हैं
बेरंग है ज़िंदगी.... जहाँ नज़र तंग है।

अगर प्यार के संग घुले रंग
सुर्ख़, सब्ज़, ज़र्दी, केसरी, गुलाबी
फिर बने सुबह-ओ-शाम शराबी
रंग की रंगोली..... रंग की बोली
रंगों से बने प्यारी... रंगों से बने रसीली
रंगों से बने न्यारी....रंगों से बने रंगीली  
तेरी होली मेरी होली...हम सबकी होली।

-मेहजबीं

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