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Tuesday, October 24, 2017

क्या ग़रीबों की सरकार ऐसी होती है जो ग़रीबों के खाते से रुपये चुरा लेती है

क्या ग़रीबों की सरकार ऐसी होती है जो ग़रीबों के खाते से रुपये चुरा लेती है ।ग़रीबों के खातों में न्यूनतम राशि नही होने के कारण बैंक हर महीने निर्धारित राशि काट रही है जिस आदमी की कोई आमदनी होगी ही नहीं वह भला अपने खाते में राशि कहाँ से रखेगा।एक तरफ सरकार कहती है सभी लोगों का खाता बैंक में होनी चाहिए वहीं मिनिममबैलेंस के नाम पर निर्धारित राशि की वसूली कर रही है और सरकार कहती है कि हमारा देश और देश के लोगों का विकास हो रहा है भला जिन व्यक्तियों के खाते से राशि काटी जा रही है उनका विकास कैसे हो रहा है ? पहले अगर बैंक खाते में रक़म रहती थी तो बैंक इंटरेस्ट देती थी क्योंकि वे खाता धारक के पैसे से बिज़नेस करती है और मुनाफ़े में कुछ हिस्सा देती थी।

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