Friday, March 31, 2017

कवाब, कोरमा और बिरयानी में उलझा मुसलमान

डॉ अबरार मुल्तानी

अरे मुसलमानों सीएम योगी का जो यह बूचड़खाने बंद करवाने का फैसला है, वह तुम्हारे हक़ में है। क्यों यह दूसरी पार्टी के बहकावे में आकर विरोध कर रहे हो। 500 रूपए किलो का सालन डकार कर जो तुम पसर जाते थे उस पैसे से अब अपने बच्चों को पढ़ाओ, उन्हें काबिल बनाओ, जज, वकील, पत्रकार, डॉक्टर या इंजिनीअर बनाओ। मार्च में किसी अच्छे नए स्कूल में भर्ती करवादो उनकी। गोश्त नहीं खाओगे 5 साल तो मर नहीं जाओगे।

आज यह खबर आई कि टुंडा कवाब की दुकान 105 साल में पहली बार बंद रही। अरे अक़ल के मारों 105 सालों से टुंडे कवाब खाकर तुम कौनसे चाँद पर पहुँच गए थे, या कौनसे दुनिया में तरक्की के झंडे गाड़ दिये तुमने??? टुंडा कवाब न हुए छोटे भीम का लड्डू होगया जिसे खाकर तुममें महाशक्ति आजाती हो जैसे। कुछ आगे बढ़ो, बडा सोचो, कब तक कवाब, बिरयानी, कोरमा और पायों में ही पड़े रहोगें???

कुछ विधवा विलाप कर रहे हैं कि हमारे 45000 कसाई भाईयों की रोज़ी रोटी छीन ली। अरे मूर्खों 8 करोड़ की मुस्लिम आबादी वाले इस सूबे (राज्य) में 45000 की रोज़ी चली भी जाती है और तुम्हारे पैसे बचते हैं तो क्या बुराई है उन्हें दूसरे धंधें शुरू करने के लिए तुम पाव भर गोश्त की क़ीमत सौ सौ रूपया चंदा करलो, 800 करोड़ में इन 45000 के लिए कई राह खुल सकती है।

कुछ वक़्त मिला है सुधरने का तो सुधर जाओ... दूसरों को दोष देना बंद करो और अपने गिरेबान में झांको और देखों तुम्हारी बर्बादी के अफ़साने तुम्ही ने तो लिखे है... काली स्याही से, अब जानवरों का सुर्ख खून कुछ सालों तक मत बहाओ और अपना मुस्तक़बिल सुधारों...अब यह न करने लगना कि सरकार ने गोश्त बंद किया तो तुम मछलियों पर टूट पड़ो और अपने पैसे वहां लूटा कर आजाओ। चलो 3 दिन में जो पैसे बचे हैं न उनसे एक किताब खरीद लाओ रोबर्ट कियोस्की की 'रिच डैड पुअर डैड'...अब यह मत कहने लगना कि हम तो इस अमेरिकी की किताब कभी न पढ़े, किसी मुसलमान राइटर की हो तो बताओ। तुम नहीं सुधरोगे भाई...

बड़ी गौर से सुन रहा था ज़माना दास्तान हमारी
हम ही सो गये कवाब-बिरयानी-कोरमा खाते खाते...

~डॉ अबरार मुल्तानी
   लेखक और चिंतक

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Wednesday, March 29, 2017

नून तेल के तरह खरिदाये जाते हैं बिहार के माननीय

राधाकान्त कुमार
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नून तेल के तरह खरिदाये जाते हैं बिहार के माननीय मुख्यमंत्री ,उपमुख्यमंत्री ,मंत्री ,नौकरशाह ,प्रधान सचिव एवं अन्य वो भी अवैध नियुक्त ,भ्रष्ट ,वित्तीय अपराध एवं अन्य मे संलिप्त भारतीय वन सेवा ,बिहार वन सेवा एवं अन्य पदाधिकारियों के द्वारा ।यह फोटो अवैध नियुक्त ,माननीय मुख्यमंत्री ,बिहार  श्री नीतीश कुमार ,तत्कालीन माननीय उपमुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी ,संबंधित मंत्री गण ,नौकरशाह यथा एस एस वर्मा ,एसके मजुमदार ,दीपक कुमार सिंह ,विवेक कुमार सिंह एवं अन्य के कृपा से प्रोन्नत ,पदस्थापित ,संरक्षित ,पोषित एवं अन्य पदाधिकारी श्री अवधेश कुमार ओझा के घर छापा से संबंधित है ।बता दे कि ओझा तो छोटा बोझा है ।अवैध नियुक्त ,प्रोन्नत और पदस्थापित भ्रष्टाचार ,वित्तीय अपराध ,वन अपराध ,लूट खसोट से धन कुबेर बने श्री मनोज कुमार सिंह ,कुन्दन कुमार ,अभय कुमार द्विवेदी ,एचके राय ,सुनील कुमार सिन्हा ,पतांजली कुमार ,मीहीर कुमार झा ,डीके दास , सुनील कुमार ,सुधीर कुमार कर्ण ,राम कुमार झा एवं अन्य श्री ओझा के तुलना मे कई गुणा बड़ा धनकुबेर एवं बोझा है ।डा एमके शर्मा ,मुरारी जी मिश्रा ,आरसी पाणडे एवं अन्य तो बिना कार्रवाई हुए सेवानिवृत्ति भी हो गये ।ये अपराध के बल पर धनकुबेर बने पर्यावरण एवं वन विभाग ,बिहार के अवैध नियुक्त पदाधिकारियों ने बिहार के माननीय मुख्यमंत्री ,उपमुख्यमंत्री ,मंत्री ,नौकरशाह ,प्रधान सचिव  माननीय मुख्यमंत्री ,बिहार  श्री नीतीश कुमार ,तत्कालीन माननीय उपमुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी ,संबंधित मंत्री गण ,नौकरशाह यथा एस एस वर्मा ,एसके मजुमदार ,दीपक कुमार सिंह ,विवेक कुमार सिंह एवं अन्य को ऐसे खरिद कर मनचाहा कार्रवाई करवाता रहा है जैसे कोई मुफ्त मे मिले चिकन को बनाने वास्ते फुटपाथ के दुकान से चिकन मसाला खरिदता हो ।
मेरे द्वारा बर्षो पूर्व से सीबीआई जांच कराने की मांग की जा रही है पर खरीदाये माननीय मुख्यमंत्री ,उपमुख्यमंत्री ,मंत्री ,नौकरशाह एवं अन्य के कान पर जूं नहीं रेंग रहा है ।
दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है इस राज्य बिहार की और यहाँ की कार्रवाई शैली की ।

Sunday, March 26, 2017

Youtube

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अक्षर आँचल योजना की हक़ीक़त 02 अक्टूबर 2016 के बाद

अक्षर आँचल योजना की हक़ीक़त 02 अक्टूबर 2016 से पहले जब स्कूल में चलता था बहुत हद तक ठीक कहा जा सकता है मगर 02 अक्टूबर 2016 के बाद महिला साक्षरता केंन्द्र का संचालन विद्यालय से बाहर कर दिया गया यहाँ तक कि बीस बच्चों को भी विद्यालय से बाहर ही ट्यूशन देने का प्रावधान कर टोला सेवक और शिक्षा स्वयं सेवी को पूरी तरह स्कूल से बाहर कर स्थापित व्यवस्था को पूरी तरह तहस नहस कर दिया गया।मौजूदा सरकार की नीतिगत फैसला बिना सोचे समझे और ज़मीनी हक़ीक़त को दरकिनार करते हुए लागू कर दी जाती है जिस का असर स्थापित व्यवस्था पर असर अंदाज़ होता है और जो सफलता मिलनी चाहिए वह सफलता नही मिलती अगर ये कहा जाए कि ज़मीनी हक़ीक़त शून्य हो जाती है तो कोई ग़लत नही होगा।
      मालूम हो कि तालिमी मरकज़ और उत्थान केन्द्र की स्थापना वर्ष 2008 में आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समुदाय के बच्चों और दलित समाज के बच्चों को(06 से10 आयु वर्ग) मुख्य धारा की शिक्षा देकर वर्ग 3 में विद्यालय में नामांकित करने की ग़र्ज़ से बिहार शिक्षा परियोजना परिषद पटना के वैकल्पिक एवं नवाचारी शिक्षा कार्यक्रमके अन्तर्गत किया गया था जिसको परियोजना परिषद से हटा कर बिहार सरकार ने 10 दिसंबर2012से जन शिक्षा, जन शिक्षा निदेशालय शिक्षा विभाग बिहार पटना के अधीन करते हुए तालिमी मरकज़ शिक्षा स्वयं सेवक और टोला सेवक के ऊपर महिला साक्षरता केन्द्र का अतिरिक्त भार सौंप दिया वहाँ तक तो ठीक था क्योंकि कमज़ोर बच्चों और महिलाओं का उपचारात्मक शिक्षण संबंधित विद्यालयों में ही होता था और ठीक ठाक व्यवस्थित रूप से चल रहा था जिस में स्वयं सेवक और टोला सेवक को कोई परेशानी नहीं होती थी लेकिन 02 अक्टूबर 2016 के बाद स्थापित व्यवस्था को सिरे से नकार दिया गया और बच्चों और महिला का साक्षरता केन्द्र मुहल्लाह में ही किसी के दरवाजे या सामुदायिक भवन में ही चलाने का पत्र निर्गत कर शिक्षा स्वयं सेवक और टोला सेवक को परेशानी में डालते हुए स्थापित व्यवस्था को बर्बाद कर दिया गया
            "" क्योंकि आज किसी भी मुहल्लाह में दरवाज़ा का कॉन्सेप्ट नही है और नही किसी मुहल्लाह मे सामुदायिक भवन ही है। ""

लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के आदेश का अनुपालन सीतामढ़ी ज़िला में नही करते पदाधिकारी

अल हेलाल हॉस्पिटल का उद्धघाटन

घोषित कार्यक्रम के तहत अल-हेलाल हाॅस्पीटल का उद्घाटन दरभंगा शहर के मोहल्ला बीबी पाकर में मशहूर सर्जन डा0 अब्दुल वहाब एवं उन्की पत्नी श्रीमती जरीना खातुन के हाथों बटन दबाकर दिन के 11.30 बजे किया गया। उद्घाटन से पहले कुरआन की तिलावत की गई और कार्यक्रम का समापन्न मौलाना अबु अखतर कासमी की दुआ से हुआ। इस मौके पर डा0 अब्दुल वहाब ने बताया कि शहर में यह दूसरा हास्पीटल है जिसमें सभी आधुनिक सुविधायें उपलब्ध हैं। इलाज कराने वाले मरीजों को हर प्रकार से सुविधायें प्रदान की जायेंगी। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में ऐसे हास्पीटल की आवश्यकता थी जिसको मैंने और मेरे लड़के डा0 ए0एन0 आरजु, बहु डा0 हिना आरजु की मदद से पुरा किया गया है। यहाँ गरीब मरीजों की भरपुर मदद की जायगी और कम पैसे में पूरा इलाज किया जायगा। डा0 अब्दुल वहाब ने यह भी बताया कि कल दिनांक-27 मार्च, 2017 को सुबह 10 बजे इस हाॅस्पीटल में मुफत इलाज के साथ साथ दवा दी जायगी। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे दौड़ में जहाँ महंगाई आसमान को छू रही है ऐसे में बहुत ही कम पैसे में आधुनिक सुविधाओं के साथ इलाज की सुविधा इस हास्पीटल में उपलब्ध कराई जायगी। यह दरभंगा शहर के लिए बड़ी बात है। उन्होंने यह भी कहा कि इस हास्पीटल में 24 घंटे इमरजेन्सी सुविधायें भी मरीजों के लिए रखी गई है। इस हास्पीटल में सभी तरह के डाक्टरों की टीम बनाई गई है ताकि किसी भी बीमारी के मरीजों को कहीं भटकने की जरूरत नहीं पड़े। डाक्टरों की टीम में सर्जन डा0 अब्दुल वहाब, डा0 ए0एन0 आरजु (कन्सलटेन्ट सर्जन), डा0 हिना आरजु (स्त्री रोज्ञ विशेषज्ञ), डा0 ए0एन0 आफाक (कन्सलटेन्ट सर्जन), डा0 मो0 तनवीर, डा0 सना यासमीन (एनेसथेसिया), डा0 मो0 नजीउल्लाह (मेडिसिन एवं कार्डिक), डा0 अंजार अहमद खान (पैथोलाॅजी), डा0 दिलशाद अनवर (आर्थो), डा0 आबिद हुसैन (डेन्टल) आदि की सेवा रखी गई है। इस उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में शहर के लोग उपस्थित हुए जिसमें डा0 अजीरूलहक, अमानुल्लाह खान अल्लन, लड्डन खान, शाहिद अतहर, डा0 इनतखाब आलम, फैज अहमद, तमन्ना, एजाज अहमद, टिंकु, जमील, आजाद, मुन्ना खान, नफीसुलहक रिंकु, डा0 एम0जे0 आदिल, डा0 आरिफ शाहनवाज, डा0 इरशाद आलम, डा0 शमीम खुर्रम, डा0 श्रीमती सुशिला ठाकुर, डा0 अजहर सुलेमान, डा0 अकील सिद्दीकी, मौलाना मेहदी रजा रौशनुल कादरी आदि के नाम शामिल हैं।

विशिष्ट पोस्ट

सामान्य(मुस्लिम)जाति के शिक्षा स्वयं सेवी(तालीमी मरकज़) को हटाने से संबंधित निर्णय को वापस ले सरकार वरना सड़क से लेकर संसद तक होगा आंदोलन :- मोहम्मद कमरे आलम

आठ वर्षों से कार्य कर रहे सामान्य मुस्लिम जाति के शिक्षा स्वयं सेवी(तालीमी मरकज़) को एक झटके में बिहार सरकार द्वारा सेवा से यह कह कर हटा दिया...