Saturday, May 13, 2017

प्रेसर ग्रुप ज़िंदा क़ौम की पहचान होती है

माहेश्वरी साहब ज्वेलर हैं, शहर में इनके समाज की आबादी 0.1 % भी नहीं है मगर चोरी का ज़ेवर खरीदने पर पुलिस कार्रवाई क्या शुरू हुई, शाम तक तमाम अखबारों-चैनलों में दर्जनों अहम् असोसिएशंस के प्रेसनोट आने लगे--पुलिस प्रताड़ना बंद हो, जाँच पहले हो एफआईआर बाद में, ऐसी ऐसी संस्थांएँ जिनके लेटरहेड बड़े इम्प्रेसिव होते हैं, एडिटर्ज़-न्यूज़ एडिटर्स को लगने लगा कि मामला गंभीर है, बड़ा रिएक्शन हो रहा है. दूसरी तरफ एक गरीब आदमी को किसी 'सेना' या 'दल' के  गुंडे ने मार दिया, न डेलिगेशन गए न ढंग के प्रेस नोट, न फोन, न रिएक्शन, कुछ नहीं, सोशल मीडिया पर हंगामा हुआ मगर नेता-समाजसेवी-कार्यकर्ताओं में ज़मीन पर स्टेटमेंट देने कि हम इसे कंडेम करते हैं या गिरफ़्तारी-कम्पेन्सेशन की मांग करते हैं, इतना कहने तक का जोश पैदा न हुआ.
आप का समाज अपने इलाक़े में तीस फीसद है मगर आपने अपना हाल इतना बुरा कर लिया है कि लोगों को महसूस ही नहीं होता कि आप कहीं हैं, आप न बोलते हैं, न नज़र आते हैं, न हिकमत से काम करते हैं. माहेश्वरी साहब के घर में दस सदस्य हैं, सब एक्टिव हैं, एक चैम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष हैं, दुसरे अपने स्पोर्ट्स बॉडी बनाये हैं, दो लड़के हैं जो युथ क्लब और लायंस क्लब से जुड़े हैं, महिलाएं भी अलग अलग संस्थाओं में पदाधिकारी हैं जिनमें बनिया समाज से ले कर रोज़ (गुलाब) सोसाइटी और सर्वधर्म समाज समिति तक मौजूद हैं. ऐसा ही माहेश्वरी जी के दोस्तों के परिवारों में भी है. ऐसा नहीं है कि ये सारी संस्थाएं एक्टिव हैं या इनकी मीटिंग या प्रोग्राम हर महीने होते हैं. मगर हैं. और ये अहम है. आप इतनी मामूली सी बात नहीं समझ पाते कि जब लेटरहेड पर रिएक्शन होता है तो उसकी क्या वैल्यू होती है. इनमें से एक आध सस्न्था साल में एक आध प्रोग्राम भी करती है, अधिकारीयों, समाजसेवियों, प्रतिभाओं का सम्मान करती है, ताल्लुक़ात बनती है. गरज़ 0.1 % हो कर  वोह ये फीलिंग देने में कामयाब होते हैं कि वोह सबसे वोकल, ताक़तवर और एक्टिव हैं, बेहद कम हो कर भी इम्पैक्ट शहर में पचास फीसद का देते हैं. जिस जिस जगह आप को (भी) होना चाहिए था, आप नहीं हैं, चाहे वोह पहली नज़र में कितनी ही गैर-अहम जगह हो, मगर वहाँ आपको माहेश्वरी साहब रिप्रेजेंट कर रहे हैं. फिर चाहे वोह सराफा असोसिएशन हो या बिजली उपभोक्ता संघ, ट्रांसपोर्ट असोसिएशन या सिटिज़न जागरूकता मंच. कुछ चीज़ें समझने की होती हैं, आप कुछ न हो कर भी सब कुछ हो सकते हैं, ये इम्पैक्ट होता है कि जब इतने प्रेस नॉट आते हैं, स्टेटमेंट आते हैं तो फिर मजबूर हो कर पुलिस-प्रशासन-प्रेस भी कार्रवाई से पहले दस बार सोचता है, और दूसरी तरफ जेनवीन मामले में भी गलत कार्रवाई हो जाती है. यहां आलम ये है एक स्कूल का लड़का किसी मामले में गलत केस में फँस जाता है--गलती उनसे हुई है अधिकारी मानते हैं और इस बारे में खबर भी छप जाती है तो उस पर अखबारों में रिएक्शन या प्रेस नोट नहीं आते, जो अगले दिन फॉलो-अप हो सकें. एक डेलिगेशन बड़े अधिकारीयों या नेताओं के पास जायेगा जायेगा इसकी तैयारी में ही एक हफ्ता निकल जाता है. आप जायेंगे, बोलेंगे, आवाज़ उठाएंगे तब लोगों को लगेगा कि आप संजीदा हैं, उसी पर कमीशंस कॉग्नीज़न्स लेंगे, उसी पर अलग अलग  इदारों की जांचें होंगी. अधिकारी सिर्फ हंगामा, नेगेटिव रिपोर्टिंग या बवाल से घबराते हैं, अगर उनको ऐसा लगता है कि फलां कार्रवाई करने से रिएक्शन होगा तो दस बार सोचते हैं, मगर ऐसा तब होता है  जब कोई समाज ज़िंदा होता है, उसमें सब तरह के ज़िंदा लोग होते हैं, असोसिएशंस होती हैं, एनजीओज़ होती हैं, हर तरह के बोलने और करने वाले लोग. आपको किसी ने एक्टिव होने से नहीं रोका, जो आपको समझ में नही आता आप देख कर सीख सकते हैं, औरों से पूछ सकते है, उनके प्रोग्रामों में शामिल हो सकते हैं, वोह न करें तो अपना दूसरा बैनर बना लें और उसमें सबको शामिल करें, वोह सिटीजन फोरम या चैम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स में आपको नहीं रखते आप नया पैरलेल ग्रुप बनायें, न्यू सिटी या मेट्रो सिटीजन फोरम के नाम से, मगर कुछ करें तो. स्पेस कैप्चर करना ज़रूरी है मगर आप स्पेस छोड़ते जा रहे हैं और फिर आप ब्लेम करते हैं की मीडिआ तवज्जोह नहीं देता या पॉलिटिशियन सुनते नहीं या ब्यूरोक्रेट आपको अहमियत नहीं देते, भाई कुछ कीजिये तो पहले. कोई भी काम करना है, समाज के लिया अच्छा, स्ट्रेटेजी बनाइये थोड़ी सी और फिर देखिये....

Monday, May 08, 2017

नवादा ज़िला में हुए पुलिस ज़ुल्म और फ़िरक़ा वाराना ज़्यादती के खिलाफ पटना में धरना


इंसाफ इन्डिया के ज़ेरे एहतमाम आज ही 8 मई को गर्दनीबाग , पटना में 11 बजे दिन से बिहार के नवादा ज़िला में पुलिस संप्रदायिकता के विरुद्ध संयुक्त धरना का आयोजन किया जा रहा है l

पटना और आस पास के इंसाफ़ पसन्द लोगों से गुजारिश है कि धरनास्थल पर आ कर इंसाफ की लड़ाई में साथ दिजिये l

Sunday, May 07, 2017

शिक्षा विभाग में तीन साल से पदस्थापित पदाधिकारियों का स्थानांतरण कर शिक्षा विभाग को साफ शफ़्फ़ाफ़ किया जाय

ज़िला सीतामढ़ी शिक्षा विभाग में तीन साल से पदस्थापित पदाधिकारियों का स्थानांतरण किया जाय ये बातें राकेश कुमार सिंह पूर्व अध्यक्ष जनता दल यू ने सरकार से की है उन्होंने बताया कि जिले में तीन साल से अधिक से पदस्थापित पदाधिकारियों ने सीतामढ़ी के शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है इतना ही नहीं बेरोज़गार नौ जवान को एक साजिश के तहत शिक्षक के रूप में बहाल फिर हटा कर आर्थिक शोषण और दोहन कर सड़क पर ला खड़ा कर दिया।

ज़िला साक्षरता कार्यालयों के भ्रष्ट नीति के कारण पूर्व तालिमी मरकज़ शिक्षा स्वयं सेवी सड़कों पर भटकने पर मजबूर

बिहार के ज़िला साक्षरता कार्यालय के भ्रष्ट नीति के कारण पूर्व तालिमी मरकज़ शिक्षा स्वयं सेवी सड़कों पर भटकने पर मजबूर हैं।पूरे बिहार में जिला साक्षरता कार्यालयों की भ्रष्टाचार नीतियों के कारण सभी पूर्व शिक्षा स्वयं सेवियों को अक्षर आँचल योजना में स्वयं सेवी के रूप में नही रखा गया जिस कारण आज भी सैंकड़ों तालिमी मरकज़ के पूर्व स्वयं सेवी सड़कों की धुल छान व फाँक रहे हैं मगर जन शिक्षा निदेशालय बिहार पटना संज्ञान लेने को तैयार नहीं।
बिहार सरकार के प्रधान सचिव का स्पष्ट आदेश था कि इस योजना में पूर्व शिक्षा स्वयं सेवी स्वयं सेवक के रूप में कार्य करेंगें।जहाँ तालिमी मरकज़ के स्वयं सेवक नही थे या जिस इलाके में तालिमी मरकज़ का संचालन नही किया गया था वहीं तालिमी मरकज़ के स्वयं सेवक की बहाली करनी थी मगर ज़िलों के साक्षरता पदाधिकारियों ने बिल्कुल उलट कर पूर्व शिक्षा स्वयं सेवी को सड़क पर खड़ा कर धुल फांकने पर मजबूर कर दिया ऐसा क्यों किया स्पष्ट है नई बहाली में जम कर अवैध वसूली कर मोटी कमाई की गई।
मालूम हो कि 09दिसम्बर 2012 तक तालिमी मरकज़ का संचालन वैकल्पिक एवं नवाचारी कार्यक्रम सर्व शिक्षा अभियान बिहार शिक्षा परियोजना के अन्तर्गत होता था जिस को 10 दिसंबर 2012 से जन शिक्षा निदेशालय बिहार पटना के अधीन कर दिया गया है।

विशिष्ट पोस्ट

सामान्य(मुस्लिम)जाति के शिक्षा स्वयं सेवी(तालीमी मरकज़) को हटाने से संबंधित निर्णय को वापस ले सरकार वरना सड़क से लेकर संसद तक होगा आंदोलन :- मोहम्मद कमरे आलम

आठ वर्षों से कार्य कर रहे सामान्य मुस्लिम जाति के शिक्षा स्वयं सेवी(तालीमी मरकज़) को एक झटके में बिहार सरकार द्वारा सेवा से यह कह कर हटा दिया...