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Thursday, April 26, 2018

Accidental Death* & *Compensation

*Accidental Death*  & *Compensation*

*(Income Tax Return Required)*

अगर किसी व्यक्ति की accidental death होती है और वह व्यक्ति पिछले तीन साल से लगातार इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल कर रहा था तो उसकी पिछले तीन साल की एवरेज सालाना इनकम की दस गुना राशि उस व्यक्ति के परिवार को देने के लिए सरकार बाध्य है ।

जी हाँ,
आपको आश्चर्य हो रहा होगा यह सुनकर लेकिन यह बिलकुल सही है
और
सरकारी नियम है ,

उदहारण के तौर पर अगर किसी की सालाना आय क्रमशः
पहले दूसरे और तीसरे साल    चार लाख,पांच लाख और छः लाख है
तो उसकी औसत आय पांच लाख का दस गुना मतलब पचास लाख रूपए उस व्यक्ति के परिवार को सरकार से मिलने का हक़ है।

ज़्यादातर जानकारी के अभाव में लोग यह क्लेम सरकार से नहीं लेते हैं ।

जाने वाले की कमी तो कोई पूरी नहीं कर सकता है लेकिन अगर पैसा पास में हो तो भविष्य सुचारू रूप से चल सकता है ।

अगर लगातार तीन साल तक रिटर्न दाखिल नहीं किया है तो ऐसा नहीं है कि परिवार को पैसा नहीं मिलेगा लेकिन ऐसे केस में सरकार एक डेढ़ लाख देकर किनारा कर लेती है लेकिन अगर लगातार तीन साल तक लगातार रिटर्न फ़ाइल किया गया है तो ऐसी स्थिति में केस ज़्यादा मजबूत होता है
और
यह माना जाता है कि मरने वाला व्यक्ति अपने परिवार का रेगुलर अर्नर था
और
अगर वह जिन्दा रहता तो अपने परिवार के लिए अगले दस सालो में वर्तमान आय का दस गुना तो कमाता ही जिससे वह अपने परिवार का अच्छी तरह से पालन पोषण कर पाता ।

सब सर्विस वाले लोग हैं और रेगुलर अर्नर हैं लेकिन बहुत से लोग रिटर्न फ़ाइल नहीं करते है जिसकी वजह से न तो कंपनी द्वारा काटा हुआ पैसा सरकार से वापस लेते हैं और न ही इस प्रकार से मिलने वाले लाभ का हिस्सा बन पाते हैं ।
इधर जल्दी में हमारे कई साथी / भाई एक्सीडेंटल डेथ में हमारा साथ छोड़ गए लेकिन जानकारी के अभाव में उनके परिवार को आर्थिक लाभ नहीं मिल पाया ।

Source - forwarded
*Section 166 of the Motor act, 1988 (Supreme Court Judgment under Civil Appeal No. 9858 of 2013, arising out of SLP (C) No. 1056 of 2008) Dt 31 Oct 2013.*
इस मेसेज को अधिक से अधिक फारवर्ड करे धन्यवाद

Wednesday, April 25, 2018

डॉक्टर कफ़ील रातोंरात हीरो से विलेन बना दिए गए और फिर भुला दिए गए। हम उन्हें इंसाफ़ दिला सकें या नहीं, कम से कम उनकी चिट्ठी तो पढ़ ही सकते हैं। जेल में बंद डॉ. कफ़ील अहमद खान का का ख़त

डॉक्टर कफ़ील रातोंरात हीरो से विलेन बना दिए गए और फिर भुला दिए गए। हम उन्हें इंसाफ़ दिला सकें या नहीं, कम से कम उनकी चिट्ठी तो पढ़ ही सकते हैं।

जेल में बंद डॉ. कफ़ील अहमद खान का का ख़त

( दस अगस्त 2017 को बीआरडी मेडिकल कालेज  गोरखपुर में हुए आक्सीजन कांड में बीआरडी मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के प्रवक्ता एवं एनएचएम के नोडल प्रभारी रहे डॉ. कफील अहमद खान को दो सितम्बर 2017 को गिरफ्तार किया गया था. वह सात महीने से अधिक समय से जेल में बंद हैं. डॉ. कफ़ील के खिलाफ पुलिस ने 409, 308, 120 बी आईपीसी के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है.  उनकी जमानत गोरखपुर के विशेष न्यायाधीश (प्रिवेंशन आफ करप्शन एक्ट )- 3 की अदालत से खारिज हो चुकी है. अब उनकी जमानत याचिका हाईकोर्ट में है. डॉ. कफील की पत्नी डॉ. शबिस्ता खान का कहना है कि उनके पति दिल के मरीज हैं लेकिन उनका ठीक से इलाज नहीं कराया जा रहा है. उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि उनके पति को एक षडयंत्र के तहत चिकित्सा सुविधा न देकर जान से मार डालने की साजिश की जा रही है. डॉ. कफ़ील की पत्नी डॉ.  शबिस्ता खान और भाई अदील अहमद खान आदिल खान ने 21 अप्रैल को नई दिल्ली में मीडिया के सामने अपनी बात रखी. डॉ. शबिस्ता खान ने डॉ. कफ़ील द्वारा 17 अप्रैल को जेल से लिखा एक पत्र भी जारी किया जिसमे डॉ. कफ़ील ने 10 अगस्त की रात के घटना क्रम और अपने द्वारा बच्चों की जान बचाने के लिए किये गए प्रयास की चर्चा की है. साथ ही जेल में दी जा रही यातना का भी जिक्र किया है. अंग्रेजी में लिखे इस पत्र को हम हिंदी में अनुवाद कर यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं. पत्र का हिंदी में अनुवाद उमा राग और गीतेश सिंह ने किया है. सं.)

बिना बेल 8 महीने से जेल, क्या मैं वाकई कुसूरवार हूँ ?

सलाखों के पीछे इन 8 महीनों की न-काबिले बर्दाश्त यातना, बेइज्ज़ती के बावजूद आज भी वो एक एक दृश्य मेरी आँखों के सामने उतना ही ताज़ा है जैसे यह सब कुछ ठीक यहाँ अभी मेरी आँखों के सामने घटित हो रहा हो. कभी कभी मैं ख़ुद से यह सवाल करता हूँ कि क्या वाकई मैं कुसूरवार हूँ ? और मेरे दिल की गहराइयों से जो जवाब फूटता है वह होता है- नहीं! बिलकुल नहीं !

मेरे भाग्य में लिखे उस 10 अगस्त की रात को जैसे ही मुझे वह व्हाट्स एप सन्देश मिला तो मैंने वही किया जो एक डॉक्टर को, एक पिता को, एक ज़िम्मेदार नागरिक को करना चाहिए था. मैंने हर उस ज़िन्दगी को बचाने की कोशिश की जो अचानक लिक्विड ऑक्सीजन  की सप्लाई रुक जाने के कारण ख़तरे में अया गयी थी. मैंने अपना हर वो संभव प्रयास किया जो मैं उन मासूम बच्चों की जिंदगियों को बचाने के लिए कर सकता था.

मैंने पागलों की तरह सबको फ़ोन किया, गिड़गिड़ाया, बात की, यहाँ-वहाँ भागा, गाड़ी चलाई, आदेश दिया, चीखा-चिल्लाया, सांत्वना दी, खर्च किया, उधार लिया, रोया, मैंने वो सब कुछ किया जो इंसानी रूप से किया जाना संभव था .

मैंने अपने संस्थान के विभागाध्यक्ष को फ़ोन किया. सहकर्मियों, बीआरडी मेडिकल कालेज के प्राचार्य, एक्टिंग प्राचार्य, गोरखपुर के डीएम, गोरखपुर के स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल डायरेक्टर, गोरखपुर के सीएमएस/एसआईसी, बीआरडी मेडिकल कालेज के सीएमएस/एसआईसी को फ़ोन किया और अचानक लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई रुक जाने के कारण पैदा हुई गंभीर स्थिति के बारे में सबको अवगत करवाया और यह भी बताया की किस तरह से ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने से नन्हें बच्चों की जिंदगियां खतरे में हैं. (मेरे पास की गयी उन सभी फ़ोन कॉल के रिकॉर्ड मौजूद हैं )

सैकड़ों मासूम बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए मैंने मोदी गैस, बाला जी, इम्पीरियल गैस, मयूर गैस एजेंसी से जम्बो आक्सीजन सिलिंडर्स मांगे. आस-पास के सभी अस्पतालों के फ़ोन नम्बर इकठ्ठे किये और उनसे जम्बो आक्सीजन सिलिंडर्स की गुज़ारिश की.

मैंने उन्हें नकद में कुछ भुगतान किया और उन्हें विश्वास दिलाया की बाकी की राशि डिलीवरी के समय दे दी जाएगी. हमने प्रतिदिन के हिसाब से 250 सिलेंडरों की व्यवस्था की जब तक कि लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो गयी. एक जंबो सिलिंडर की कीमत रु. 216 थी.

हॉस्पिटल में एक क्यूबिकल से दूसरे क्यूबिकल, वार्ड 100 से वार्ड 12, इमरजेंसी वार्ड, जहाँ ऑक्सीजन सप्लाई होनी थी उस पॉइंट से लेकर वहीँ तक जहाँ उसकी डिलीवरी होनी थी, मैं दौड़-भाग करता रहा ताकि बिना किसी दिक्कत के ऑक्सीजन की सप्लाई बनी रह सके.
बीआरडी मेडिकल कालेज

अपनी गाड़ी से मैं आस-पास के अस्पतालों से सिलिंडर्स लेने गया. लेकिन जब मुझे अहसास हुआ कि यह प्रयास भी अपर्याप्त है तब मैं एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) गया और उसके डीआईजी से मिला और सिलेंडरों की कमी की वजह से उत्पन्न हुई आपद स्थिति के बारे में बताया. उन्होंने तुरंत स्थिति को समझा और सहयोग किया. उन्होंने जल्द ही सैनिकों के एक समूह और एक बड़े ट्रक की व्यवस्था की जिससे कि बीआरडी मेडिकल कालेज में खाली पड़े सिलिंडरों को गैस एजेंसी तक जल्द से जल्द लाया जा सके और फिर उन्हें भरवाकर वापस बीआरडी  पहुंचाया जा सके. उन्होंने 48 घंटों तक यह काम किया.

उनके इस हौसले से हमें हौसला मिला. मैं एसएसबी को सलाम करता हूँ और उनकी इस मदद के लिए उनका आभारी हूँ. जय हिन्द .

मैंने अपने सभी जूनियर और सीनियर डाक्टरों से बात की, अपने स्टाफ को परेशान न होने के निर्देश दिए और कहा कि हिम्मत न हारें, और परेशान बेबस माता-पिताओं पर क्रोध न करें. कोई छुट्टी या ब्रेक न लें. हमें बच्चों की जिंदगियां बचाने के लिए एक टीम की तरह काम करना होगा.

मैंने उन बेहाल माता-पिताओं को ढांढस बंधाया जो अपने बच्चों को गँवा चुके थे. उन माता-पिताओं को समझाया जो अपने बच्चों को खो देने के कारण क्रोधित थे. वहाँ स्थिति बहुत तनावपूर्ण थी. मैंने उन्हें बताया कि लिक्विड ऑक्सीजन खत्म हो गया है पर हम जम्बो सिलिंडरों की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं.

मैं कई लोगों पर चीखा-चिल्लाया ताकि लोग अन्य सब बातों से ध्यान हटाकर बच्चों की जिंदगियों को बचाने में ध्यान केन्द्रित करें. मैं ही नहीं बल्कि मेरी टीम के कई लोग उस स्थिति में यह देखकर रो दिए कि किस तरह से प्रशासन की लापरवाही से गैस सप्लायर्स को पैसे न मिलने के कारण आज यह आपद स्थिति पैदा हो गयी जिसकी वजह से इतनी सारी मासूम जिंदगियां दांव पर लग गयी हैं. हम लोगों ने अपनी इन कोशिशों को तब तक जारी रखा जब तक 13/8/17 को सुबह 1:30 बजे लिक्विड ऑक्सीजन टैंक अस्पताल में पहुँच नहीं गया.

मेरी ज़िन्दगी में उथल-पुथल उस वक्त शुरू हुई जब 13/8/17 की सुबह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी महाराज अस्पताल पहुंचें. और उन्होंने कहा – “ तो तुम हो डॉक्टर कफ़ील जिसने सिलिंडर्स की व्यवस्था की. मैंने कहा –“ हाँ सर ”. वो नाराज़ हो गए और कहने लगे “तुम्हें लगता है कि सिलिंडरों की व्यवस्था कर देने से तुम हीरो बन गए, मैं देखता हूँ इसे .”

योगी जी नाराज़ थे क्योंकि यह ख़बर किसी तरह मीडिया तक पहुँच गयी थी, लेकिन मैं अपने अल्लाह की कसम खाकर कहता हूँ कि मैंने उस रात तक इस सम्बन्ध में किसी मीडिया कर्मी से कोई बात नहीं की थी. मीडियाकर्मी पहले से ही उस रात वहाँ मौजूद थे.

इसके बाद पुलिस ने हमारे घरों पर आना शुरू कर दिया, हम पर चीखना-चिल्लाना, धमकी देना, मेरे परिवार को डराना. कुछ लोगों ने हमें यह चेतावनी भी दी कि मुझे एनकाउंटर में मार दिया जायेगा. मेरा परिवार, मेरी माँ, मेरी बीवी, बच्चे सब किस कदर डरे हुए थे इसे बयान करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं.

अपने परिवार को इस दुःख और अपमान से उबारने के लिए मैंने सरेंडर कर दिया, यह सोचकर कि जब मैंने कुछ ग़लत नहीं किया है तो मुझे न्याय ज़रूर मिलेगा.

पर कई दिन, हफ्ते और महीने बीत चुके हैं. अगस्त 2017 से अप्रैल 2018 आ गयी, दीवाली आई, दशहरा आया, क्रिसमस आया, नया साल आया, होली आई, हर तारीख़ पर मुझे लगता था कि शायद मुझे बेल मिल जाएगी. और तब मुझे अहसास हुआ कि न्याय प्रक्रिया भी दबाव में काम कर रही है (वो ख़ुद भी यही महसूस करते हैं)

150 से भी ज़्यादा कैदियों के साथ एक तंग बैरक में फ़र्श पर सोते हुए जहाँ रात में लाखों मच्छर और दिन में हज़ारों मख्खियाँ भिनभिनाती हैं, जीने के लिए खाने को हलक के नीचे उतारना पड़ता है, खुले में लगभग नग्नावस्था में नहाना पड़ता है, जहाँ टूटे हुए दरवाजों वाले शौचालयों में गंदगी पड़ी रहती है, अपने परिवार से मिलने के लिए जहाँ बस रविवार, मंगलवार, वृहस्पतिवार, का इंतज़ार रहता है.

ज़िन्दगी नर्क बन गयी है. सिर्फ़ मेरे लिए ही नहीं बल्कि मेरे पूरे परिवार के लिए. उन्हें न्याय की तलाश में यहाँ-वहाँ भागना पड़ रहा है, पुलिस स्टेशन से कोर्ट तक, गोरखपुर से इलाहाबाद तक पर सब व्यर्थ साबित हो रहा है.

मैं अपनी बेटी के पहले जन्मदिन में भी शामिल नहीं हो सका  जो अब 1 साल 7 महीने की हो गयी है. बच्चों के डॉक्टर होने के नाते भी यह बहुत दुःख देने वाली बात है कि मैं उसे बढ़ते हुए नहीं देख पा रहा. बच्चों का डॉक्टर होने के नाते मैं अक्सर अभिभावकों से बढ़ते हुए बच्चों की उम्र के कई महत्वपूर्ण पड़ावों के प्रति उन्हें सचेत किया करता था और अब मैं ख़ुद ही नहीं जानता कि मेरी बेटी ने कब चलना, बोलना, शुरू किया ? तो अब मुझे फिर से वही सवाल सता रहा है कि क्या मैं वाकई में गुनाहगार हूँ ? नहीं ! नहीं ! नहीं !

मैं 10 अगस्त 2017 को छुट्टी पर था जिसकी अनुमति मुझे मेरे विभागाध्यक्ष ने दी थी. छुट्टी पर होने के बावजूद मैं अस्पताल में अपना कर्तव्य निभाने पहुंचा. क्या ये मेरा गुनाह है ? मुझे हेड आफ डिपार्टमेंट,मेडिकल कालेज का वाइस चांसलर, 100 नम्बर वार्ड का प्रभारी बताया गया जबकि मैं 8/8/16 को ही स्थाई सदस्य के रूप में बीआरडी से जुड़ा था, और विभाग में सबसे जूनियर डॉक्टर था. मैं एनआरएचएम के नोडल अधिकारी और बाल रोग विभाग में लेक्चरर के रूप में कार्यरत था, जहाँ मेरा काम सिर्फ छात्रों को पढ़ना और बच्चों का इलाज करना था.

मैं किसी भी रूप में लिक्विड ऑक्सीजन/जम्बो सिलिंडर के ख़रीद/ फ़रोख्त/ ऑर्डर देने/ सप्लाई/ देखरेख/ भुगतान आदि से जुड़ा हुआ नहीं रहा हूँ. अगर पुष्पा सेल्स ने अचानक लिक्विड आक्सीजन की सप्लाई रोक दी तो उसके लिए मैं ज़िम्मेदार कैसे हो गया ? एक ऐसा व्यक्ति जो चिकित्सा से नहीं जुड़ा हो, वो भी बता सकता है कि एक डॉक्टर का काम इलाज करना है न कि ऑक्सीजन खरीदना.

पुष्पा सेल्स द्वारा अपनी 68 लाख की बकाया राशि के लिए लगातार 14 बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद भी अगर कोई इस सन्दर्भ में लापरवाही बरती गई और कोई कार्यवाही नहीं की गयी तो इसके लिए गोरखपुर के डीएम , डीजी मेडिकल एजुकेशन, और स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी दोषी हैं. यह पूरी तरह से एक उच्च स्तरीय  प्रशासकीय फेल्योर है कि जिन्होंने स्थिति की गंभीरता को नहीं समझा.

हमें जेल में डालकर उन्होंने हमें बलि के बकरे की तरह इस्तेमाल किया ताकि सच हमेशा-हमेशा के लिए गोरखपुर जेल की सलाखों के पीछे दफ्न रहे.

जब मनीष (आक्सीजन सप्लायर पुष्पा सेल्स के निदेशक मनीष भंडारी) को बेल मिली तो हमें उम्मीद की एक किरण नज़र आई कि शायद हमें भी न्याय मिलेगा और हम बाहर आ पायेंगें और अपने परिवार के साथ रह पायेंगें और फिर अपना काम करेंगें. पर नहीं, हम अभी भी इंतजार कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट कहता है कि बेल अधिकार होता है और जेल अपवाद. यह न्याय प्रक्रिया के हनन का क्लासिकल उदाहरण है.

मैं आशा करता हूँ कि वो समय ज़रूर आएगा जब मैं आज़ाद हो जाऊंगा और अपने परिवार और अपनी बेटी के साथ आज़ादी की ज़िन्दगी जी पाउँगा. सच बाहर ज़रूर आएगा और न्याय होकर रहेगा.

एक बेबस और दुखी पिता/ पति/ भाई/ बेटा/ और दोस्त

डॉ. कफ़ील खान, 18/4/18
साभार  samkaleenjanmat.in

राजकिशोर जी की फेसबुक पोस्ट

Saturday, April 14, 2018

सहारा इंडिया मेच्यूरिटी पेमेंट ना बाबा न

सहारा इंडिया और मेच्यूरिटी पेमेंट ना बाबा न यहाँ सिर्फ जमा होता है फ़िलहाल पेमेंट की बात भी करना अपराध है मेच्यूरिटी पूरा हो गया है तो क्या हुआ प्रतीक्षा करते रहें अगर नही कर सकते हैं तो दुबारा इन्वेस्ट कर दें।
सहारा इंडिया की हालत 5000/ रुपये पेमेंट करने की भी नहीं रह गई है तो सोच सकते हैं आपकी जमा की गई राशि क्या आप को समय पर मिल सकती है ? और आप अपनी जरूरत क्या समय पर पूरी कर सकते हैं ?

Friday, April 13, 2018

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बिहार, शाखा सीतामढी़ के प्रतिनिधिओं ने ज्ञापन सौंपा

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बिहार, शाखा सीतामढी़ के प्रतिनिधिओं ने ज्ञापन सौंपा

रोटी और आग

रोटी और आग

एक बार ''हुजूर सल्लल्लाहु

अलैहि वसल्लम''

अपनी प्यारी बेटी फातिमा

के घर तशरीफ ले जाते है।

जाकर देखते हैं फातिमा

रोटी बना रही है।

हुजूर फरमाते है ''फातिमा तुम तो हर

रोज रोटी बनाती हो आज

मैं तुम्हारे लिए रोटी बनाऊँगा

हुजूर रोटी बना कर रोटी को सेंकने के

लिए आग में डालते हैं बहुत देर तक

रोटी नहीं सीकती हुजूर और

लकड़ियां आग में डालते हैं।

लेकिन रोटी पे कोई फर्क नहीं पड़ता

तब हुजूर रोटी से फरमाते है कि

इतनी आग लगाने पर भी

तुम क्यों नहीं सीक रही हो।

तो रोटी ने कहा ''या रसूल अल्लाह

मुझे आप के हाथों ने छु लिया है यह

आग तो क्या मुझे जहन्नुम

की आग भी नही जला सकती.......

       *(((( सबक ))))*

जिस रोटी को हुजूर ने हाथ से छू

लिया हो उसे कोई आग जला नहीं

सकी तो फिर जिस के दिल में इश्के

नबी हो उसे जहन्नुम की आग क्या

जलाएगी,,,,,,,,,subhanAllah
🕌🕌🕌🕌🕌🕌🕌🕌
Hazrat Ali फरमाते है........
"जितनी भी बड़ी मुश्किल हो
🕌🕌🕌🕌🕌🕌🕌
जितना भी बड़ा इम्तिहान हो
घर से निकलते वक्त एक रोटी के निवाले मैं थोडा सा नमक डाल कर खा लो,
ऐसा मुमकिन ही नही की घर मायूस हो कर लोटो।
🕌🕌🕌🕌🕌🕌🕌
ये तोहफा दुसरो को भी दे
क्योंकि अल्लाह तोहफा देने वालो को पसंद फरमाता हे.
हजरत अबू हुरेरा र अ फरमाते है की जो शख्स जुमे को सुबह से लेकर ईशां तक कसरत से दुरूद पढेगा समझो उसने जन्नत खरीद ली।और जिसने यह खबर दुसरों तक पहुॅचाई तो हजरत (सअस)कयामत के दिन उसको अपने साथ जन्नत लेकर जायेंगे।
*हज़रात  अली*

ने  फ़रमाया हमेशा   समझोता  करना  सीखो  क्योंकि  थोडा  सा  झुक  जाना  किसी  रिश्ते  का  हमेशा  के  लिए  टूट  जाने  से  बेहतर  है  इस  पर , आप 

*सल्लल्लाहु  अलैहि  वस्सलाम*  ने  फ़रमाया  अगर  झुक  जाने  से  तुम्हारी  इज्जत    घट  जाये  तो  क़यामत  के  दिन  मुझसे  ले  लेना
आप

*सल्लाहु  वलैहि  वस्सलाम*
ने  फरमाया : अल्लाह  उस  के  चेहरे  को  रोशन  करे  जो  हदीस  सुन  के  आगे  पहुँचाता  है

Wednesday, April 11, 2018

बा ख़बर होशियार, होशियार,होशियार सहारा इण्डिया परिवार में राशि जमा कर्ता होशियार

बा ख़बर होशियार, होशियार,होशियार सहारा इण्डिया परिवार में राशि जमा कर्ता होशियार  सहारा इण्डिया में राशि जमा करने वाले जमाकर्ता होशियार हो जायें क्योंकि समय पूरा हो जाने पर maturity amount का भुगतान नहीं किया जाता है री इन्वेस्ट या प्रतीक्षा करने का मशवरा दिया जाता है इसलिए अपनी रक़म जमा करने में विवेक का प्रयोग करें ताकि समय आने पर अफसोस न करना पड़े।

دین بچاﺅ دیش بچاﺅ کانفرنس میں آنے والی گاڑیوں کےلئے روٹ چارٹ جاری

دین بچاﺅ دیش بچاﺅ کانفرنس میں آنے والی گاڑیوں کےلئے روٹ چارٹ جاری

راجدھانی کے مختلف مقامات پر پارکنگ کے بہترین انتظامات، ٹریفک محکمہ کا ڈی ایم کو خط 

پٹنہ 6اپریل (پریس ریلیز)

آئندہ 15اپریل کو پٹنہ کے گاندھی میدان میں ہونے والی” دین بچاﺅ دیش بچاﺅ کانفرنس“ کے پیش نظر ٹریفک ایس پی پٹنہ کی جانب سے گاڑیوں کی پارکنگ کے لئے بہترین انتظامات کئے گئے ہیں۔ کانفرنس میں آنے والی تمام چھوٹی بڑی گاڑیوں کی پارکنگ کے لئے الگ الگ روٹ چارٹ جاری کئے گئے جو اس طرح ہیں۔ بڑی گاڑیوں کے لئے میٹھا پور بس اسٹینڈ کے اندر خالی جگہ میں 250،ویٹنری کالج احاطہ میں 350-400گاڑیوں ،گیٹ نمبر 93گھاٹ ،دیگھا کے اندر 200گاڑیوں ،گردنی باغ اسٹیڈیم گراﺅنڈ کے اندر 100بڑی گاڑیوں، پاٹلی پترا اسٹیڈیم کنکر باغ میں بڑی اور چھوٹی 200گاڑیوں کی پارکنگ کے انتظامات کئے گئے ہیں۔ اسی طرح ہارڈنگ روڈ ،گردنی باغ ، آر او بی کے مغرب(چتکوہڑا پل کے نیچے سڑک کی دونوں جانب) میں 100چھوٹی گاڑیوں، معین الحق اسٹیڈیم کے اندر 500چھوٹی گاڑیوں، بانس گھاٹ میں 1000چھوٹی گاڑیوں، ویر چند پٹیل پتھ کی دونوں جانب سروس لین میں 250چھوٹی گاڑیوں ، میلرہائی اسکول میدان میں اندر اور باہر 200چھوٹی گاڑیوں، پٹنہ کالج احاطہ میں 250چھوٹی گاڑیوں، سائنس کالج میں 250چھوٹی گاڑیوں ، اے این سنہا انسٹی ٹیوٹ (وی آئی پاس ہولڈر) کی 50گاڑیوں کی پارکنگ کے انتظامات کئے گئے ہیں۔ اس کے علاوہ گاندھی میدان گیٹ نمبر 1پر وی وی آئی پی پارکنگ کے انتظامات رہیں گے۔ ٹریفک ایس پی دفتر کی جانب سے ڈی ایم کو لکھے گئے خط میں کہا گیا ہے کہ مذکورہ پارکنگ مقامات پر بجلی کے ساتھ ساتھ مائک لگائے جائیں ، ساتھ ہی اناﺅنسر کے بھی انتظامات کئے جائیں تاکہ کانفرنس کے دن گاڑیوں کی پارکنگ میں کسی طرح کی دشواری نہ ہو۔

ٹریفک ایس پی دفتر کی جانب سے جاری لیٹر میں مزید کہا گیا ہے کہ حاجی پور ، بختیار پور ، فتوحہ ، جہان آباد کی جانب سے آنے والی بڑی گاڑیاں نیو بائی پاس ہوکر میٹھا پور بس اسٹینڈ آئیں گی اور میٹھا پور بس اسٹینڈ کے پاس مقررہ پارکنگ کی جگہ پر ہی پارک ہوں گی یا نیو بائی پاس سے 90فٹ روڈ ہوتے ہوئے ملاحی پکڑی سے پاٹلی پترا سٹیڈیم میں مقررہ مقام پر پارکنگ کی جگہ پر پارک ہوں گی۔اسی طرح حاجی پور ، بختیار پور ، فتوحہ ، جہان آباد سے آنے والی چھوٹی گاڑیاںنیو بائی پاس ہوکر میٹھا پور بس اسٹینڈ ہوتے ہوئے پرانی بائی پاس سے راجندر نگر چڑیا ٹانڑ پل ، کربیگھیا جنکشن ، میٹھا پور آر او بی ہوتے ہوئے آر بلاک ، ویر چند پٹیل پتھ تک آئیں گی اور میلر اسکول میدان ، داروغہ رائے پتھ ، ویر چند پٹیل پتھ کے سروس فلینک پر قطاروں میں پارک ہوں گی ۔ آرا ، بکسر ، کیمور ، بھبھوا ، اورنگ آباد ،ا رول کی جانب سے بیلی روڈ ہوکر آنے والی بڑی گاڑیاں بیلی روڈ اوور بریج کے نیچے سے جگدیو پتھ ہوکر پھلواری جیل ہوتے ہوئے ویٹنری کالج میدان تک آئیں گی اور ویٹنری کالج میدان میں پارک ہوں گی ۔ اسی طرح آرا ، بکسر ، کیمور ، بھبھوا ، اورنگ آباد، ارول کی جانب سے بیلی روڈ ہوکر آنے والی چھوٹی گاڑیاں بیلی روڈ میں ہڑتالی چوک تک آئیں گی اور وہاں سے داہنی جانب داروغہ رائے پتھ ہوتے ہوئے ویر چند پٹیل پتھ کے سروس لین اور میلر اسکول میدان میں مقررہ پارکنگ کی جگہ پر پارک ہوں گی۔انیس آباد ہوکر آنے والی بڑی گاڑیاں گردنی باغ اسٹیڈیم اور چھوٹی گاڑیاں گردنی باغ اسٹیڈیم ، ہارڈنگ روڈمیں آر او بی سے مغرب کی جانب چتکوہڑا پل کے نیچے سڑک کی دونوں جانب ویر چند پٹیل پتھ کے سروس لین میلر اسکول میدان میں پارک کی جائیں گی۔ ادھر دانا پور سے اشوک راج پتھ ہوکر آنے والی بڑی گاڑیاں 93نمبر گھاٹ دیگھا میں پارک ہوں گی ۔دانا پور سے اشوک راج پتھ ہوکر آنے والی چھوٹی گاڑیاں کرجی راجاپور پل ہوکر بانس گھاٹ تک آئیں گی اور بانس گھاٹ سے شمالی حصے کی جانب جانے والے راستے پر قطاروں میں پارک ہوں گی۔ جے پی سیتو ہوکر آنے والی چھوٹی گاڑیاں دیگھا سے بائیں مشرق کی جانب کرجی موڑ سے راجا پور پل ہوتے ہوئے بانس گھاٹ تک آئیں گی اور بانس گھاٹ سے شمال میں گنگا کی جانب جانے والے راستے پر قطاروں میں پارک ہوں گی۔ پٹنہ سٹی کی جانب سے اشوک راج پتھ ہوکر آنے والی چھوٹی گاڑیاں پٹنہ کالج تک آئیں گی اور سائنس کالج پٹنہ کالج احاطہ کے میدان میں پارک ہوں گی۔ اسی طرح باری پتھ سے ہوکر آنے والی چھوٹی گاڑیاں بھکھنا پہاڑی ، سید پور نالہ ہوکر معین الحق اسٹیڈیم تک آئیں گی اور اسٹیڈیم میں مقررہ مقام پر پارک ہوں گی۔ کانفرنس کے دوران وی وی آئی پی شخصیات کی گاڑیاں گاندھی میدان کے گیٹ نمبر01سے داخل ہوں گی اور مقررہ جگہ پر پارک ہوں گی۔ 

ڈی ایم کوٹریفک ایس پی کی جانب سے بھیجے گئے خط میں مزید کہا گیا ہے کہ اس کانفرنس میں آنے والی کسی بھی طرح کی چھوٹی بڑی گاڑیوں کو پٹنہ جنکشن سے گاندھی میدان کی جانب آنے کی اجازت نہیں ہوگی ۔ بڑی چھوٹی گاڑیاں جی پی او گولمبر سے شمال کوتوالی وولٹاس کی جانب نہیں آئیں گی۔ اسی طرح کسی بھی طرح کی چھوٹی بڑی گاڑیاں انکم ٹیکس گولمبر سے مشرق میں وولٹاس کوتوالی کی جانب نہیں آئیں گی۔ ہدایت میں مزید کہا گیا ہے کہ اس کانفرنس میں آنے والی کسی بھی طرح کی چھوٹی بڑی گاڑیاں پولیس لائن سہ راہا سے مشرق یعنی گاندھی میدان کی جانب نہیں آئیں گی۔ اسی طرح کانفرنس میں آنے والی چھوٹی بڑی گاڑیاں اشوک راج پتھ میں پٹنہ کالج سے کارگل چوک کی جانب نہیں آئیں گی۔ چڑیا ٹانڑ پل سے شمال میں ایگزبیشن روڈ ، رام غلام چوک ، گاندھی میدان کی جانب بھی کسی بھی طرح کی چھوٹی بڑی گاڑیوں کو آنے کی اجازت نہیں ہوگی۔ اسی طرح کانفرنس میں آنے والی کسی بھی طرح کی چھوٹی بڑی گاڑیوں کو مچھووا ٹولی چوک یا دنکر گولمبر سے گاندھی میدان کی جانب آنے کی اجازت نہیں ہوگی۔

”دین بچاﺅ دیش بچاﺅکانفرنس “ میں گاڑیوں کی پارکنگ کے بہترین انتظامات کئے جانے پر کانفرنس کے ٹرانسپورٹ کمیٹی کے کنوینر مولانا سہیل احمد ندوی نے انتظامیہ کا شکریہ ادا کیا ہے۔ انہوں نے امید ظاہر کی کہ انتظامیہ کے افسران مستعدی کا مظاہرہ پیش کریں گے اور کانفرنس کے دن پارکنگ کے معاملے میں کسی طرح کی بدنظمی نہیں ہوگی۔انہوں نے باہر سے آنے والے مہمانوں کو بھی یقین دلایا ہے کہ انہیں پارکنگ کے معاملے میں کسی طرح کی پریشانی نہیں ہوگی

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