Click here online shopping

Saturday, September 29, 2018

[24/09 10:21 AM] MD QAMRE ALAM: MD QAMRE ALAM: कौन लोग हैं जो मन्फी सोच रखते हैं और पूरे बिहार के लोगों को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं।ये लोग कैसी सियासत करना चाहते हैं इनको खुल कर बात करनी चाहिए अपने सियासी मफाद के लिए पूरे बिहार के लोगों को बर्बाद तो न करें वरना वक़्त कभी माफ नहीं करेगा।अपनी ग़लत सोच को अपने तक ही महदूद रखनी चाहिए ऐसे लोगों
को।
आखिर इन लोगों को सहरसा के जीत से तकलीफ क्यों हो रही है ?
सीतामढ़ी के ग़लत क़यादत का ही नतीजा है कि अभी सेवा मुक्त होने के बाद भी दो महीने का मानदेय भुगतान लम्बित है ।

सीतामढ़ी की नुमाइंदा टीम ने हमेशा ग़लत फैसला लिया है उसकी मिसाल
1.मामला ज़िला शिकायत निवारण पदाधिकारी सीतामढ़ी की अदालत में चलता रहा मगर कोई ख़बर गिरी नही ली गई नतीजा शिकायत निवारण कार्यालय ने खिलाफ में फैसला दे दिया।
2.DPO साक्षरता ने स्पष्टीकरण मांगा इनलोगों ने तथ्यों से हट कर स्पष्टीकरण दिया।
इनलोगों ने अनुपस्थिति विवरणी जमा नही होने दिया नतीजतन लोगों का दो महीने का भुगतान आज भी लम्बित है।
नुमाइंदा टीम के अंदर सही फैसला लेने की सलाहियत का इंक़ाय(कमी है) जो ज़िला में सही फैसला नही ले सकते वें स्टेट सतह पर क्या सही फैसला ले सकते हैं ?
[25/09 8:46 AM] MD QAMRE ALAM: लोग केस फैसला को लेकर तरह- तरह की बात करने लगते हैं और अपने मन से फैसले का तज्जिया करने लगते हैं और जो लोग अदालत में लड़ रहे हैं उनके हौसले को तोड़ने में लग जाते हैं और ये कहते हैं हम सही हैं और जो हो रहा है वह ग़लत है।मैं उन लोगों से कहना चाहता हूँ कि अपने मन की बात को ग़लत तरीक़े से फैला कर हौसले को पस्त न करें।
मौजूदा केस के फैसले की हक़ीक़त यह है कि केस के फैसले का आधार मधुबनी केस का फैसला है मधुबनी केस के फैसले के मद्देनजर इस केस में माननीय जज ने फैसला सुनाया है और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी साक्षरता सहरसा द्वारा दिनांक 11.08.2018 को जारी लेटर को निरस्त कर दिया है।
और माननीय जज ने ये कहा है कि चूंकि यह केस मधुबनी वाले को ही कवर्ड करता है इसलिए रेस्पोंडेंट को ये लिबर्टी दी जाती है कि जाँच कर लें और अगर पिटीशनर के द्वारा जो बात बताई गई है अगर इस में contrary (विरोधाभास)पाया जाता है तो रेस्पोंडेंट नियम संगत फैसला ले सकती है।
दोस्तों क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं तो कानून के मुताबिक लड़ाई लड़ें। अब ये देखना है कि डायरेक्टर, DPO शिक्षा विभाग क्या करती है ?फिर उसका क़ानूनी जवाब दिया जाएगा।
फिलहाल लेटर के निरस्त हो जाने से हमारे साथी की सेवा निरंतर( Regularized) मानी जायेगी।

आपका साथी
मोहम्मद कमरे आलम
हौसला अफजाई करने का काम करें पस्त करने का नही इसी पैग़ाम के साथ

सामान्य(मुस्लिम) तालिमी मरकज़ के शिक्षा स्वयं सेवकों ने उच्च न्यायालय पटना से केस जीतने के बाद योगदान के लिए ज़िला शिक्षा पदाधिकारी सहरसा को दिया आवेदन

सामान्य(मुस्लिम) तालिमी मरकज़ के शिक्षा स्वयं सेवकों ने उच्च न्यायालय पटना से केस जीतने के बाद योगदान के लिए ज़िला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी साक्षरता सहरसा को आज आवेदन दिया है और उस की प्रतिलिपि निदेशक जन शिक्षा बिहार पटना को भी दी है।

मालूम हो कि जिला सहरसा में जन शिक्षा निदेशक पटना के निर्गत पत्रांक 1088के अनुपालन में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी साक्षरता ने दिनांक 11.08.2018  को दो शिक्षा स्वयं सेवक मोहम्मद शमीम और मसी इमाम की सेवा ये कहते हुए समाप्त कर दिया था कि आप अल्पसंख्यक सामान्य जाति से आते हैं इस लिए आप का नियोजन अवैध है जिस के विरुद्ध मोहम्मद शमीम व अन्य ने पटना उच्च न्यायालय में समादेश संख्या 17914/2018 दाखिल किया था। 19 सितम्बर को माननीय न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान पक्ष सुनने के बाद जिला कार्यक्रम पदाधिकारी साक्षरता सहरसा द्वारा निर्गत पत्र को निरस्त कर दिया था।

योगदान आवेदन देने के मौके पर सुपौल ज़िले के अंज़ारूल हक़ मौजूद थे।

Monday, September 24, 2018

अखिल भारतीय मजदूर महासंघ के महा मंत्री नागेन्द्र पासवान के नेतृत्त्व में 12 सदस्यों पर मुस्तमिल प्रतिनिधि मंडल ने मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री कुशवाहा को सौंपा ज्ञापन

साक्षर भारत मिशन के कर्मीयों प्रेरकों/समन्वयकों के समायोजन को लेकर अखिल भारतीय मजदूर महासंघ के महा मंत्री नागेन्द्र पासवान के नेतृत्त्व में 12 सदस्यों पर मुस्तमिल प्रतिनिधि मंडल ने श्री उपेन्द्र कुशवाहा, माननीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री भारत सरकार को  ज्ञापन सौंप बिहार के 18000 हज़ार प्रेरकों/समन्वयकों को शुरू होने वाली नई योजना" पढ़ना लिखना अभियान  " में समायोजित करने की माँग की है।
ज्ञापन में लिखा है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा साक्षरता मिशन प्राधिकरण के माध्यम से वर्ष 2009से साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम चलाया जा रहा है । सम्पूर्ण भारत में 6.5 लाख प्रेरक/समन्वयक जिसमें केवल बिहार में 1800 प्रेरक/समन्वयक निष्ठा पूर्वक अपनी सेवा दे रहे हैं।बिहार को साक्षरता दर वृद्धि में राष्ट्रपति अवार्ड और मधनिषेध के पक्ष में मानव श्रृंखला निर्माण में अहम भूमिका रही जिस कारण बिहार का नाम लिम्का बुक में भी दर्ज हुआ।
राज्य सरकार की उदासीनता के कारण अल्पमानदेय भोगी प्रेरकों/समन्वयकों को 28 महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है अर्थाभाव के कारण प्रेरक/समन्वयक परेशान हैं कई प्रेरक इलाज के अभाव में असामयिक मृत्यु का शिकार हो गए फिर भी राज्य सरकार की संवेदना नही जगी।
ज्ञापन में आगे कहा गया है कि भारत सरकार के बिना किसी आधिकारिक पत्र के राज्य सरकार ने प्रेरकों/समन्वयकों को 31 मार्च 2018 के बाद जबरन पदमुक्त कर प्रभार देने पर बाध्य कर दिया गया।
आखिर में माननीय मंत्री से अनुरोध किया गया है कि प्रेरकों समन्वयकों को नई योजना में समायोजित किया जाए, लम्बित 28 महीनों का मानदेय भुगतान कराया जाए ,पूर्व की तरह अक्षर आँचल योजना में समन्वयकों को अनुश्रवण, प्रबोधन में लगाया जाए। प्रतिनिधि मण्डल में राम पुकार ठाकुर प्रदेश अध्यक्ष,साधू शरण जी  वैशाली,रामदेव यादव मधुबनी,सुमन कुमार झा मधुबनी,मो  मुमसैद मुजफ्फरपुर रजनीश कुमार समस्तीपुर विजय कुमार सितांधज एवम् अरुण कुमार राय जिला अध्यक्ष अखिल भारतीय साक्षर भारत मिशन कर्मी महासंघ सीतामढ़ी शामिल थे।

Sunday, September 23, 2018

सामान्य(मुस्लिम)जाति के शिक्षा स्वयं सेवी(तालीमी मरकज़) को हटाने से संबंधित निर्णय को वापस ले सरकार वरना सड़क से लेकर संसद तक होगा आंदोलन :- मोहम्मद कमरे आलम

आठ वर्षों से कार्य कर रहे सामान्य मुस्लिम जाति के शिक्षा स्वयं सेवी(तालीमी मरकज़) को एक झटके में बिहार सरकार द्वारा सेवा से यह कह कर हटा दिया कि आप सामान्य जाति के हैं मैं सरकार से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या सामान्य मुस्लिम जाति अल्पसंख्यक है या नहीं ? सरकार का काम बेरोज़गार को रोजगार देना होता है उस से रोजगार छीनना नहीं ।सामान्य मुस्लिम जाति को तालीमी मरकज़ से हटाने के निर्णय को वापस ले और हटाये गए लग -भग 3800 सौ सामान्य जाति के शिक्षा स्वयं सेवकों की सेवा बहाल की जाए वरना चरणबद्ध तरीके से सड़क से लेकर संसद तक आन्दोलन किया जाएगा

Wednesday, September 19, 2018

तालीमी मरकज़ (सामान्य) केस मोहम्मद शमीम व अन्य vs बिहार सरकार व अन्य में कोर्ट ने ज़िला कार्यक्रम पदाधिकारी साक्षरता सहरसा के आदेश को किया निरस्त

MD QAMRE ALAM

पूरे बिहार के तालीमी मरकज़( सामान्य) जाति के शिक्षा स्वयं सेवकों के लिए सबसे बड़ी खबर और खुशी की बात ये है कि आज पहली जीत का आग़ाज़ सहरसा ज़िला के मोहम्मद शमीम के केस से हो गया है माननीय न्यायाधीश पटना हाई कोर्ट श्री मोहित कुमार शाह नेज़िला कार्यक्रम पदाधिकारी साक्षरता सहरस के लेटर को निरस्त कर दिया

है।

जीत का सेहरा विद्वान अधिवक्ता श्री शशि भूषण सिंह को जाता है।

Monday, September 17, 2018

शासकीय कर्मचारी को मिलने वाली छुट्टी एवं उसके नियम

शासकीय कर्मचारी को मिलने वाली छुट्टी एवं उसके नियम

*1 - अर्जित अवकाश :-*
यह अवकाश प्रत्येक वर्ष 31 दिन के देय है। 1 जनवरी को 16 दिन तथा 1 जुलाई को 15 दिन दो किस्तों में देय है।
यह अवकाश पूरे सेवा काल में 300 दिनों तक जमा किया जा सकता है। भारत में लगातार 120 दिन की तथा भारत से बाहर 180 दिनों की छुट्टी देय है।
_*मूल नि.- 81-बी(1)*_

*2 - चिकित्सा अवकाश :-*
यह अवकाश स्थाई कार्मिकों को पूरे सेवा काल में 12 माह तक पूरे वेतन पर तथा 6 माह तक अर्ध वेतन पर देय है।
_*मूल नि.-81-बी(3)*_

*3 - निजी कार्य पर, अर्ध वेतन पर अवकाश :-*
स्थाई कार्मिकों को यह अवकाश पूरे सेवा काल में 365 दिनों तक अर्ध वेतन पर देय है। यह अवकाश भी अर्जित अवकाश की तरह 1 जनवरी को 16 दिन तथा 1 जुलाई को 15 दिन कर्मचारी के खाते में जमा हो जाता है तथा यह अवकाश भी कर्मचारी के खाते में पुरा यानी 365 दिनों तक जमा किया जा सकता है।
_*मूल नि.-81-बी(3)*_

*4 - असाधारण अवकाश ( बिना वेतन का ) :-*
यह अवकाश अन्य अवकाश के साथ मिलाकार अथवा बिना वेतन का अवकाश अलग से 5 वर्ष तक का देय है। 5 वर्ष से अधिक शासन द्वारा स्वीकृति किया जा सकता है।
_*मूल नि.-18, 81-बी(5)*_

*5 - विशेष बिकलांगता अवकाश :-*
यह अवकाश ड्यूटी करते समय दुर्घटना होने पर कूल 24 माह का निम्न प्रकार देय है।

       1 - प्रथम 6 माह पूरे वेतन पर। तथा यह 6 माह ड्यूटी मानी जायेगी।
       2 -119 दिन पूर्ण वेतन पर। लेकिन यह अवकाश माना जायेगा।
       3 - शेष 14 माह 1 दिन अर्ध वेतन पर देय है।

यह अवकाश किसी भी अन्य अवकाश से घटाया नही जायेगा।
_*मूल नि.-83 तथा 83 ए*_
_*मूल नि.-9(6) ख (4)*_
_*मूल नि.-83 क (3) (ख)*_

*6 - अध्ययन अवकाश(study leave) :-*
यह अवकाश पूरे सेवा काल 24 माह का अर्ध वेतन पर देय है। एक बार में लगातार 12 माह तक छुट्टी देय है। यह अवकाश भी किसी अन्य अवकाश से घटाया नही जायेगा।
नोट-यह उन्ही कर्मचारी को मिलेगी जिनकी सेवा काल 5 वर्ष हो गई हो। तथा यह अवकाश सेवानिवृति होने के 3 वर्ष पहले तक ही मिलेगी।
_*मूल नि.-84*_

*7 - राश्रीकृति अवकाश (commuted leave) :-*
यह अध्ययन अवकाश की तरह ही है। इसमें भारत में 45 दिन तक तथा भारत से बाहर 90 दिन तक पूरे वेतन पर देय है। लेकिन यह अवकाश निजी कार्य पर अर्ध वेतन पर जमा अवकाश में से दुगुनी घटाई जायेगी।
_*मूल नि.-81(बी)-4*_

*8 -(1)प्रसूति अवकाश (महिलाओं के लिए) :-*
यह अवकाश केवल महिलाओं को प्रसूति हेतू 180 दिन यानी 6 माह तक 2 बच्चों तक देय है।  8 (2) Child Care Leave:-बच्चों के पालन पोषण हेतू 730 दिन तक पूरे वेतन पर दो बच्चों तक अलग से देय है। यह 730 दिन का अवकाश बच्चों के 18 वर्ष की उम्र होने तक due रहेगी। तथा एक कलेंडर वर्ष में 3 बार देय है। लेकिन एक बार में कम से कम 15 दिन का छुट्टी लेना होगा।
8(3) MTP Leave:- गर्भ समापन अवकाश, चिकित्सा प्रमाण पत्र के आधार पर 6 सप्ताह तक पुरे वेतन पर पूरे सेवा काल में असीमित बार देय है।
*नोट -* गर्भ समापन का मतलब (Miscarriage ) बच्चा ख़राब होने से है।
_*सहायक नि.-153*_
_*शासनादेश संख्या-2-2017, दि. 08.12.2008*_

*9 - चिकित्सालय अवकाश :-*
यह अवकाश उन कर्मचारियों को देय है जिनकी जान का जोखिम हो तथा सभी विभागों के सुरछा गार्डों एवं बंदी रच्छकों को देय है। यह अल्प वेतन भोगी कर्मचारियों को देय है।
प्राथमिकी चिकित्सक की संस्तुति पर 6 माह तक देय है। जिसमे प्रथम 3 माह पूर्ण वेतन पर तथा अगला 3 माह अर्ध वेतन पर। 3 वर्ष बाद पुनः6 माह का उपरोक्तानुसार देय होगा।

*10 - एंटी रेबीज उपचार हेतू अवकाश :-*
यदि किसी कार्मचारी को पागल कुत्ता या अन्य जानवर काट ले तो उसे सरकारी चिकित्सक की संस्तुति पर पूर्ण वेतन पर अवकाश देय है। यह अवकाश किसी अन्य अवकाश से घटाया नही जाएगा। दिन की कोई सीमा तय नहीं है। डॉक्टर के द्वारा छुट्टी के दिनों की संख्या निर्धारित होगी।
_*मूल नि.-9(6) (क) (3)*_

*11 - आकस्मिक अवकाश :-*
यह अवकाश प्रत्येक कलेंडर वर्ष में 14 दिन देय है। तथा 2-3दिन का विशेष अवकाश भी स्वीकृति किया जा सकता है। एक बार में अधिकतम 10 दिनों की छुट्टी स्वीकृति हो सकती है। यह अवकाश कर्मचारी के खाते में जमा नही होगी। हर साल छुट्टी न लेने पर बची हुई छुट्टी स्वतः ही लेप्स हो जायेगी।
_*ध्यान रहे यह अवकाश लेने पर बीच में पड़ने वाले अवकाश जैसे रविवार या अन्य छुट्टी को जोड़ा नही जाये।

Saturday, September 15, 2018

जन वितरण प्रणाली दूकान रिक्ति के निर्धारण में अनियमितता, संशोधन की माँग

जिला सीतामढ़ी अन्तर्गत ग्राम पंचायत बाया प्रखण्ड परिहार में जन वितरण प्रणाली दूकान के रिक्ति के निर्धारण में अनियमितता बरतने का मामला सामने आया है।ग्राम बारा नोनाही के सैकड़ों लोगों ने समाहर्ता सीतामढ़ी को आवेदन देकर इस की शिकायत की है।आवेदन पत्र में ग्रामीणों ने लिखा है कि सरकारी प्रावधान के मुताबिक जन वितरण प्रणाली वितरण दूकान विहीन राजस्व ग्राम में जन वितरण दूकान खोलने का प्रावधान किया गया है इसके लिए प्रखण्ड स्तर से रिक्तियों की माँग की गई थी प्रखण्ड स्तरीय पदाधिकारी ने बाया पंचायत में जन वितरण प्रणाली दूकान विहिन राजस्व ग्राम बारा नोनाही को छोड़ जिस राजस्व ग्राम शिव नगर में पहले से दूकान है उसी राजस्वग्राम  की रिक्ति नए दूकान खोलने के लिए ज़िला को भेज दिया है।ग्रामीणों ने माँग किया है कि राजस्व ग्राम शिव नगर में जो रिक्ति दिखाई गई है वह ग़लत है उसको संशोधित कर दूकान विहीन राजस्व ग्राम बारा नोनाही में किया जाए ।मालूम हो कि बारा नोनाही अल्पसंख्यक मुस्लिम बहुल गाँव है जिसकी जनसंख्या छः हज़ार और मतदाताओं की संख्या लग- भग दो हज़ार के आस -पास है।ये गाँव चार वार्डों पर आधारित है और इस राजस्व ग्राम में पूर्व  से कोई जन वितरण प्रणाली की दूकान नही है।

Thursday, September 13, 2018

अल्पसंख्यक (मुस्लिम)सामान्य जाति के शिक्षा स्वयं सेवक को अक्षर आँचल योजना से सेवामुक्त करने से पूर्व नियोजनकर्ता /अनुमोदनकर्ता से जवाब तलब किया जाना चाहिए था :- मोहम्मद कमरे आलम

अल्पसंख्यक (मुस्लिम)सामान्य जाति के शिक्षा स्वयं सेवक को अक्षर आँचल योजना से सेवामुक्त करने से पूर्व नियोजनकर्ता /अनुमोदनकर्ता से जवाब तलब किया जाना चाहिए था परन्तु ऐसा नहीं किया गया और बिना नियोजनकर्ता/अनुमोदनकर्ता से जवाब तलब किये ही सेवामुक्ति का पत्र थमा कर लग-भग 3800 सौ अल्पसंख्यक मुस्लिम सामान्य EVS को बेरोजगारी के दल- दल में धकेल कर भूखमरी की ज़िंदगी जीने पर मजबूर कर दिया गया है जिसमें आधी आबादी मुस्लिम सामान्य महिलाओं की है जिसमें बेवा भी शामिल हैं।
अल्पसंख्यक मुस्लिम सामान्य जाति के शिक्षा स्वयं सेवक के नियोजनकर्ता, अनुमोदनकर्ता से ये जवाब तलब होनी चाहिए थी कि किस परिस्थिति/मार्गदर्शन के अनुसार नियोजन किया गया जवाब प्राप्ति के बाद ही सेवामुक्ति की कार्रवाई करनी चाहिए थी।
सरकार द्वारा किया गया ये कारवाई अन्याय पूर्ण है।

मोदी सरकार के राफेल ख़रीद घोटाले के विरूद्ध ज़िला समाहरणालय के समक्ष ज़िला कांग्रेस सीतामढ़ी का धरना प्रदर्शन

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक मोदी सरकार के राफेल घोटाले के विरुद्ध ज़िला काँग्रेस अध्यक्ष सीतामढ़ी विमल शुक्ला के अगुआई में समाहरणालय के समक्ष धरना प्रदर्शन किया गया मौके पर परवेज़ आलम, परिहार प्रखण्ड अध्यक्ष मोहम्मद सऊद आलम, रामा शंकर प्रसाद, युवा नेता मोहम्मद कौसर रब्बानी, खुश रेज़ा, सिकंदर इत्यादि सैकड़ों लोग मौजूद थे।

Tuesday, September 11, 2018

अल्पसंख्यक मुस्लिम सामान्य जाति को अक्षर आँचल योजना से सेवा मुक्त और योजना को सिर्फ अतिपिछड़े मुस्लिम के लिए आरक्षित करना अन्याय है :- मोहम्मद कमरे आलम

अल्पसंख्यक मुस्लिम सामान्य जाति को अक्षर आँचल योजना से सेवा मुक्त और योजना को सिर्फ अतिपिछड़े मुस्लिम के लिए आरक्षित करना अन्याय है :- मोहम्मद कमरे आलम

अल्पसंख्यक मुस्लिम सामान्य जाति को अक्षर आँचल योजना से सेवा मुक्त और योजना को सिर्फ अतिपिछड़े मुस्लिम के लिए आरक्षित करना अल्पसंख्यक मुस्लिम सामान्य जाति के साथ ज़ुल्म है, अन्याय ही नहीं शिक्षा का अधिकार अधिनियम के विरूद्ध भी है और न्याय के साथ विकास के विपरीत भी है :- मोहम्मद कमरे आलम

Monday, September 10, 2018

काँग्रेस पार्टी के भारत बन्द आह्वान पर प्रखण्ड काँग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद सऊद आलम के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कराया परिहार बन्द

परिहार प्रखंड काँग्रेस कमिटी के द्वारा पार्टी के  " भारत बंद " करने के आह्वान को लेकर  परिहार बन्द करवाया गया।बन्दकारिओं ने परिहार चौक से सीतामढ़ी जाने वाले मार्ग को अवरुद्ध कर दिया जिस से आवागमन 1:00 बजे तक पूर्णतः  ठप हो गया ।बन्दकारी परिहार को बन्द करते हुए परवाहा पहुँच गए और पेट्रोल पंम्प को बन्द कराया और परवाहा चौक को बन्द कर दिया। 
भारत बन्द का नेतृत्व मोहम्मद सउद आलम अध्यक्ष प्रखण्ड कांग्रेस कमिटी परिहार कर रहे थे।
मौके पर मो.आलुद्दीन रिजवी आशेवर राय,  उपेंद्र यादव,  महा सचिव संजीव झा , मुस्तफा ,कौसर रब्बानी  आशिक हुसैन एवं सैकड़ों लोग शामिल थे।

Sunday, September 09, 2018

शिक्षा मानव विकास की कुंजी एवं पूँजी है :- नागेन्द्र पासवान

8 सितम्बर( सीतामढ़ी),अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर मध्य विद्यालय बेरवास डुमरा सीतामढ़ी में आयोजित विचार गोष्ठी सह सांस्कृतिक कार्यक्रम का उदघाटन करते हुए साक्षर भारत मिशन के  मुख्य कार्यक्रम समन्वयक नागेन्द्र कुमर पासवान ने संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा मानव विकास की कुंजी एवम् पूंजी  है।आज रोटी कपड़ा और मकान के साथ साथ शिक्षा और स्वास्थ्य हमारी मौलिक आवश्यकता बन गयी है। शिक्षा हमारा मौलिक अधिकार है ।सबको शिक्षा उपलब्ध करना सरकार की नैतिक जिम्मेवारी बन गयी है।यद्यपि सरकार शिक्षा के सर्वव्यापीकरण सुदृढ़ीकरण की दिशा में प्रयास रत भी हैविभिन्न प्रकार की योजना परियोजना चलाइ जा रही है।कुछ उप्लबधिया मिली है ।फिर भी कुछ चुनौतियां है।
    असाक्षर महिलाओं को साक्षर कर विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र प्रायोजित साक्षर भारत मिशन एवम् राज्य सम्पोषित अक्षर आँचल योजना के तहत महादलित दलित अभिवंचितो अल्पसंखक महिलाओ के लिए उत्थान केंद्र,तालीमी मरकज  साक्षरता केंद्र पर शिक्षा सेवक,प्रेरक,द्वारा साक्षरता  अभियान चलाया  गया। परिणाम स्वरूप् साक्षरता वृद्धि दर में आशातीत सफलता मिली है।
    इस अवसर पर क्लजठ के कलाकारों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम गीत नृत्य लघुनाटक प्रस्तुत किया गया जिदमे विद्यालय की छात्र ने भी भाग लिया।
   विचार गोष्ठी को प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी डा.अमरेंद्र पाठक,एस आर जी, संजय कुमार 'मधु',के आर पी शैल देवी,तालीमी मरकज के जिला अध्यक्ष नेक मोहम्मद अंसारी,विद्यालय के प्रधानध्यापक मनोज कुमार,विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष सत्यनारायण साह ने बीबी सम्बोधित किया।
   इस अवसर पर विद्यालय के छात्र छात्राओ शिक्षक अभिभावक टोला सेवक शिक्षा सेवक एवम् नव साक्षर महिलाओं द्वरा साक्षरता रैली निकाली गई।
   विद्यालय की छात्रा द्वारा रंगोली प्रतियोगिता की गई।
    मौके पर प्रखण्ड के सभी शिक्षा सेवक तालीमी मरकज टोला सेवक विद्यालय के सभी शिक्षक एवं ग्रामीण उपस्थित थे।

Friday, September 07, 2018

महादलित अल्पसंख्यक एवं अति पिछड़ा वर्ग अक्षर आँचल योजना को मुस्लिमों में सिर्फ परिशिष्ट1 में सम्मिलित मुस्लिम जातिओं के लिए आरक्षित करना शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है :- मोहम्मद कमरे आलम

महादलित अल्पसंख्यक एवं अतिपिछड़ा पिछड़ा वर्ग अक्षर आँचल योजना को मुस्लिमों में सिर्फ परिशिष्ट1 में सम्मिलित मुस्लिम जातिओं के लिए आरक्षित करना शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है :- मोहम्मद कमरे आलम

प्रेस बयान जारी कर मोहम्मद कमरे आलम ने कहा है कि "" महादलित अल्पसंख्यक एवं अति पिछड़ा वर्ग अक्षर आँचल योजना "" को मुस्लिमों में सिर्फ परिशिष्ट 1 में सम्मिलित मुस्लिम जातिओं के लिए आरक्षित कर देना शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का उल्लंघन है ।
राज्य सरकार द्वारा परिभाषित शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत अभवंचित समूह में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समुदाय आता है।उक्त योजना को परिशिष्ट 1 में सम्मिलित मुस्लिम जातिओं के लिए आरक्षित कर अल्पसंख्यक सामान्य जाति को लाभ से वंचित कर दिया गया है जो शिक्षा का अधिकार अधिनियम में परिभाषित अल्पसंख्यक समुदाय को मिले अधिकार का उलंघन है क्योंकि सामान्य मुस्लिम भी अल्पसंख्यक हैं।
शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने 23 अगस्त 2018 को पत्रांक 1570 निर्गत कर उक्त योजना को मुस्लिम में सिर्फ परिशिष्ट 1 में सम्मिलित मुस्लिम जातिओं के लिए आरक्षित कर दिया है और योजना के नाम में भी आंशिक संशोधन कर योजना का नाम " महादलित दलित एवं अल्पसंख्यक अत्यंत पिछड़ा वर्ग अक्षर आँचल योजना " कर दिया है जो गलत है।
उक्त योजना को मुस्लिमों में सिर्फ अति पिछड़ी जातिओं के लिए आरक्षित करने से पूर्व उक्त योजना में बहाल अल्पसंख्यक मुस्लिम सामान्य जाति के शिक्षा स्वंय सेवकों की सेवा निदेशक जन शिक्षा , शिक्षा विभाग पटना के पत्रांक 1088 दिनांक 19.05.2018 और 1098 दिनांक 22.05.2018 के आलोक में यह कहते हुए समाप्त कर दिया गया  कि आप अल्पसंख्यक सामान्य जाति के हैं इसलिए आपका नियोजन अवैध है और एक आदेश से हज़ारों मुस्लिम सामान्य जाति के शिक्षा स्वयं सेवकों को सड़कों पर लाकर खड़ा कर दिया गया है ।एक सोची समझी साजिश के तहत सामान्य जाति के लोगों को ह्रास किया जा रहा है और खाक छानने पर विवश कर दिया गया है।

चिंगारी

जिस किसी के भी अन्दर ईमान की चिंगारी बची होगी वह राहे रास्त पर आ जाएगा।

महादलित अल्पसंख्यक एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग अक्षर आँचल योजनान्तर्गत मुस्लिम छात्र विहीन विद्यालयों में शिक्षा स्वयं सेवक (तालीमी मरकज़) का नियोजन कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किये जाने के सम्बंध में।

महादलित अल्पसंख्यक एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग अक्षर आँचल योजनान्तर्गत मुस्लिम छात्र विहीन विद्यालयों में शिक्षा स्वयं सेवक (तालीमी मरकज़) का नियोजन कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किये जाने के सम्बंध में।
सेवा में,
निदेशक जन शिक्षा
शिक्षा विभाग बिहार पटना
विषय :-महादलित अल्पसंख्यक एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग अक्षर आँचल योजनान्तर्गत मुस्लिम छात्र विहीन विद्यालयों में शिक्षा स्वयं सेवक (तालीमी मरकज़) का नियोजन कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किये जाने के सम्बंध में।
महाशय,
उपर्युक्त विषयक सम्बन्ध में अंकित करना है कि जिला सीतामढ़ी अन्तर्गत मुस्लिम छात्र विहीन विद्यालयों में शिक्षा स्वयं सेवक का नियोजन कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है जबकि इस योजना का मक़सद ही मुस्लिम समुदाय के 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुख्य धारा की शिक्षा सुनिश्चित करना है।
उदाहरण स्वरूप कुछ साक्ष्य पेश है :-
परिहार प्रखण्ड अन्तर्गत  मध्य विद्यालय बहुहरवा में दो शिक्षा स्वयं सेवक का नियोजन है जबकि इस विद्यालय में एक भी मुस्लिम छात्र नामांकित नही हैं और विद्यालय के आसपास मुस्लिम आबादी भी नहीं है।स्वयं सेवक भी दूसरे गॉव के निवासी हैं।
1.गुलाम यजदानी
2.रिज़वाना खातून
महाशय ऐसी स्थिति सम्पूर्ण बिहार में है जो सघन जाँच से स्पष्ट हो जाएगा।
            अतः अनुरोध है कि मुस्लिम छात्र विहीन विद्यालयों में नियोजित शिक्षा स्वयं सेवकों के नियोजन को समाप्त करने की दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित करने का कष्ट कर सरकारी राशि के दुरूपयोग पर अंकुश लगाने की कृपा करें।
मोहम्मद कमरे आलम
एकडण्डी परिहार सीतामढ़ी बिहार

Wednesday, September 05, 2018

भारत के शिक्षक शासन प्रशासन का बन्धुआ मजदूर बनकर अपमान उपेक्षा व उपहास का विषय बन गया - नागेन्द्र पासवान

समान काम का समान वेतन की मांग के लिए शिक्षक संघो के आन्दोलन का नैतिक समर्थन करते हुए नागेन्द्र कुमार पासवान मुख्य समन्वयक, साक्षर भारत सीतामढ़ी संयोजक अखिल भारतीय साक्षर भारत मिशन कर्मी महासंघ ,सह-मंत्री भारतीय मजदूर संघ सीतामढ़ी ने कहा कि भारत के शिक्षक शासन प्रशासन का बन्धुआ मजदूर बनकर अपमान उपेक्षा व उपहास का विषय बन गया गई।आज शिक्षक अपनी वाजिव मजदूरी के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय में गुहार लगा रहा है जहा शिकज़ह विरोधी मानसिकता के राज्य और केंद्र सरकार शिक्षको को जलील कर रही है। बिहार में सामाजार्थिक शोषण एवम् मानसिक उत्पीरण के शिकार अल्प वेतन भोगी शिक्षक जिल्लत और जलालत की जिन्दगी जीने को विवस है।
 

विशिष्ट पोस्ट

सामान्य(मुस्लिम)जाति के शिक्षा स्वयं सेवी(तालीमी मरकज़) को हटाने से संबंधित निर्णय को वापस ले सरकार वरना सड़क से लेकर संसद तक होगा आंदोलन :- मोहम्मद कमरे आलम

आठ वर्षों से कार्य कर रहे सामान्य मुस्लिम जाति के शिक्षा स्वयं सेवी(तालीमी मरकज़) को एक झटके में बिहार सरकार द्वारा सेवा से यह कह कर हटा दिया...