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Wednesday, December 26, 2018

प्रेरक, समन्वयकों ने महामहिम राष्ट्रपति से किया इच्छा मृत्यु की मांग

प्रेरक, समन्वयकों ने महामहिम राष्ट्रपति से किया इच्छा मृत्यु की मांग

महामहिम राष्ट्रपति महोदय!
 समूर्ण साक्षरता अभियान के तहत केंद्र  प्रायोजित अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना  "साक्षर भारत मिशन" कार्यक्रम का  31 मार्च 2018  के प्रभाव से कार्यावधि विस्तार रोक दिए जाने के कारण जन शिक्षा निदेशक बिहार द्वारा प्रेरक, समन्वयक को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना असंवैधानिक रूप से कार्यमुक्त का एकतरफा तुगलकी फरमान से 19000 कर्मी बेरोजगार बन सड़क पर जिल्लत और जलालत की जिंदगी जीने को विवश है।
 राशि  उपलब्ध होने के बावजूद निदेशक जन शिक्षा द्वारा  28 माह का कार्ययावधि का मानदेय /वेतन का भुगतान नही किया जा रहा है  अर्थाभाव के कारण घर घर में शिक्षा का अलख जगाने वाले प्रेरक समन्वयक शिक्षा कर्मी के बच्चो की पढ़ाई बाधित है। समुचित इलाज के अभाव में अपने बीमार परिजन का इलाज नहीं करवा पाते है  ।भुखमरी के शिकार कई प्रेरक समन्वयको की असामयिक मृत्यु भी हो गई है।किन्तु राज्य सरकार की संवेदना नहीं जगी है।
 महामहिम ,
 ये वही प्रेरक समन्वयक है जिन्होंने पूरी निष्ठ लग्न व् ईमानदारी पूर्वक अपने धारित पदों की जिम्मेवारियों का निर्वहन करते हुए सरकार के अन्य सामाजिक कल्याणकारी योजनाओ को सफल बनाने में अग्रणी भूमिका निभाया है।इनके प्रयास से साक्षरता दर में सर्वाधिक वृद्धि के लिए बिहार को राष्ट्रीय अवार्ड मिला।
विश्व विख्यात मानव श्रृंखला का  जिला प्रखण्ड एवम् पंचायतो में नोडल एजेंसी का काम किया तथा बिहार का नाम लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड में दर्ज करवाया।
मद्य निषेध अभियान ,बाल विवाह एवम् दहेज़ प्रथा उन्मूलन अभियान,मतदाता जागरूकता अभियान ,स्वच्छता अभियान,शिक्षा का हक़ अभियान व्यापक प्रचार प्रसार कर सफल बनाया।
बिहार  में राज्य सम्पोषित अक्षर आँचल योजना के अनुश्रवण अनुसमर्थन एवम् प्रबन्धन कार्य से भी समन्वयको को हटा दिया गया है जबकि योजना अभी भी अनवरत चल रहा है।
 महामहिम, 
 माननीय मुख्यमंत्री बिहार, शिक्षा मंत्री बिहार मुख्य सचिव बिहार,प्रधान सचिव शिक्षा विभाग बिहार एवम् निदेशक जन शिक्षा बिहार को विभिन्न कार्यक्रमो के माध्यम से प्रतिनिधि मण्डल अपनी मांगो  के समर्थन में ज्ञापन देकर सेवा नियमित करने का अनुरोध किया है।
महामहिम,
 साक्षर भारत में विगत 10 वर्षो से लगातार काम करते ये कर्मी अपने जीवन का स्वर्णिम काल साक्षरता अभियान कार्यक्रम न में व्यतीत किया ।अब अधिकाँश कर्मी की उम्र सीमा समाप्त हो गई है किसी दूसरी सरकारी सेवा में नहीं जा सकता ऊपर से पारिवारिक जिम्मेवारियां भी बढ़ गई है। 
 जन विरोधी सामन्तवादी नौकरशाह विनोदानंद झा ने पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर दुर्भावनावश साक्षर भारत के   कर्मियों प्रेरको समन्वयको  की सेवा नियमित करने हेतु पूर्व मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति में अनुसंशा हेतु नमो की सूचि नहीं भेजा।
 
 साक्षर भारत कर्मी संघ  निरन्तर माननीय मुख्य मन्त्रीजी को त्राहिमाम सनदेश भेजकर पीड़ित कर्मीयो की सी समायोजित कर जान माल की सुरक्षा की गुहार लगाता रहा है किन्तु प्रेरको समनवयको की लगातार उपेक्षा होती रही है। 
        अंत में नैसर्गिक न्याय की प्रत्याशा में महांमहिमजी से सादर अपील है की जनहित में अमानवीय तरीका से कार्यमुक्त बिहार के 19000 प्रेरक समन्वयको की सेवा समायोजित कराने की असीम कृपा किया जाय ।नहीं तो भूख से तड़प- तड़प कर मरने से अच्छा है इन प्रेरक समन्वयको को इच्छा मृत्यु का आदेश दे  दिया जाय।
    नागेन्द्र कुमार पासवान ,मुख्य कार्यक्रम समन्वयक
साक्षर भारत मिशन सीतामढ़ी बिहार, राष्ट्रीय संयोजक 
अखिल भारतीय साक्षरता कर्मी महासंघ,सह:~महामन्त्री
 भारतीय मजदूर संघ सीतामढ़ी बिहार 9473088097
       

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