Saturday, January 12, 2019

नागेन्द्र कुमार पासवान ने माननीय डा.रामचन्द्र पूर्वे सदस्य,बिहार विधान सभा को ईमेल भेज कर साक्षरता कर्मी के आवाज़ को सरकार के समक्ष रखने की, कि गुहार

नागेन्द्र कुमार पासवान ने माननीय डा.रामचन्द्र पूर्वे सदस्य,बिहार विधान सभा को ईमेल भेज कर साक्षरता कर्मी के आवाज़ को सरकार के समक्ष रखने की, कि गुहार 

सम्पूर्ण साक्षरता अभियान के तहत 15 + आयु वर्ग के असाक्षरों को साक्षर कर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संचालित केंद्र प्रायोजित अत्यंत महत्वकांक्षी साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम का कतिपय 31 मार्च 18 के बाद कार्यावधि विस्तार नहीं दिया गया।

      सर विदित हो कि राज्य सरकार द्वारा सृजित /स्वीकृत पद पर निष्क जन शिक्षा बिहार द्वारा अधिसूचित रोस्टर के आधार पर प्रधान सचिव शिक्षा विभाग बिहार के पत्रांक 402 दिनांक 3.2.2011नियुक्ति नियमावली में निर्धारित मापदण्डों /शर्तों एवम् सभी प्रक्रियाओ को पूरा कर प्रकाशित विज्ञापन /अंतर्वीक्षा /मेघासूची के आधार पर  चयन समिति द्वारा  19000 कर्मी प्रत्येक  जिला में 4 समन्वयक प्रत्येक ब्लॉक में दो समन्वयक एवम् प्रत्येक पंचायत में दो दो प्रेरक की संविदा आधारित नियुक्त की गई। वर्ष 2011 से लगातार अपने दायित्वों का कुशलता पूर्वक निर्वहन किया है।परिणाम स्वरूप साक्षरता दर में आशातीत सफलता मिली है। अपने मूल कर्तव्यों के साथ साथ सरकार के अन्य कल्याणकारी योजनाओ ,सामाजिक कार्यक्रमो में सक्रिय योगदान किया है।शिक्षा का अधिकार अधिनियम का नुककर नाटक दीवाल लेखन आदि के माध्यम से व्यापक प्रचार प्रसार किया फलतः दशकीय साक्षरता वृद्धि दर में सफलता  के लिए बिहार को राष्ट्रीय अवार्ड मिला !मदयमं निषेध अभियान का नोडल एजेंसी के रूप में प्रेरक समन्वयको ने उत्कृष्ट कार्य किया और बिहार को राष्ट्रीय अवार्ड दिलवाया।21 जनवरी 16 को विश्व विख्यात मानव् श्रृंखला का निर्माण कर बिहार का नाम लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड में दर्ज करवाया।
  मतदाता जागरूकता अभियान ,स्वच्छ्ता अभियान ,दहेज़ प्रथा एवम् बाल विवाह उन्मूलन अभियान में सक्रिय योगदान कर सफल बनाया।
सर अपनी जवानी का स्वर्णिम समय इन साक्षरता कर्मियो ने साक्षरता अभियान में समर्पित किया है।अब अधिकांश की उम्र  सीमा समाप्त हो गई है।किसी दूसरी सरकारी सेवा में नहीं जा सकता।
     भारत सरकार ने 31 मार्च 18 को साक्षर भारत मिशन का  मात्र अवधि विस्तार रोक दिए जाने के कारण निदेशक जन शिक्षा विहार ने बिहार के सभी कर्मियो को नियम विरुद्ध असंवैधानिक अमानवीय तरिका से कार्य मुक्त करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया है जिसके कारण बिहार के 19000 हजार अल्प मानदेय भोगी बेरोजगार भुखमरी  जिल्लत और जलालत की जिंदगी जीने को विवस है।यद्रयपी केंद्र सरकार ने  योजना बाइण्डप करने  की आधिकारिक निर्देश  राज्य सरकार को नहीं दिया है नहीं दिया है और ना ही नियमतः नियोजन ईकाई द्वारा किसी कर्मी को सेवा मुक्ति का आदेश पत्रक ही हस्तगत कराया है। कर्मी को अपना पक्ष रखने का मौक़ा दिए बिना  कारण पृक्षा किये बिना जबरदस्ती कर्मी को प्रभार मुक्त करने का एकतरफा आदेश नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है।
    सर, भोजन वस्त्र और आवास के अतिरिक्त आज शिक्षा और स्वास्थ्य मानव की मौलिक आवश्यकता बन गई है।शिक्षा को मौलिक अध्मइकार का दर्जा दिया गया है। समवर्ती सूचि में होने के कारण सबको शिक्षा एवम् अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध करना राज्य और केंद्र सरकार की नैतिक जिम्मेवारी है।
    जन विरोधी राज्य सरकार की इच्छा शक्ति के अभाव के कारण  राज्य में प्रौढ़ साक्षरता कार्यक्रम को सर्वथा बन्द कर दिया गया है जिसका दूरगामी प्रतुकुल प्रभाव अनुसूचित जाति/पिछडिजाति/अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब वंचितो के विकास पर पड़ता है।
  सर  सरकार द्वारा राशि उपलब्ध करने के बावजूद अलप मानदेय भोगी प्रेरक समन्वयको का 26 माह का मानदेय भुगतान नहीं किया जा रहा है।
  सर, कर्मियो के समक्ष भुखमरी की स्थिति उतपन्न हो गई है। अर्थाभाव में इनके बच्चों की पढ़ाई बाधित है,अपने परिजनों का उचित इलाज नहीं करवा पाते है। पैसे के आभाव में कई  प्रेरक समन्वयक भूख के कारण असमय प्राण त्याग दिए।
संविदा कर्मियो की सेवा नियमितीकरण हेतु अशोक कुमार चौधरी की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति में भी निदेशक जन शिक्षा बिहार ने अनुसंशा हेतु इन कर्मियो की सुची नहीं भेजा।
        सर आप से सादर आग्रह निवेदन है कि कृपया उपरोक्त के आलोक में विधान सभा सत्र के दौरान विधान परिषद में प्रश्न के माध्यम से बिहार सरकार का ध्यान आकृष्ट कृते हुए इन प्रेरक समन्वइको की सेवा समायोजन/नियमिति करण हेतु सरकार से मांग करने की असीम कृपा किया जाए।
  बिहार में प्रौढ़ साक्षर कार्यक्रम हेतु वैकल्पिक साक्षरता कार्यक्रम चलवा  जाय।
   संविदा कर्मियो की सेवा नियमितीकरण हेतु  मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय कमिटी में अनुसंशा हेतु प्रेरक समन्वयकों की सूचि भेजने हेतु सरकार से मांग की जाय।
   प्रभारी जन विरोधी निदेशक जन शिक्षा बिहार को निदेशक पद के प्रभार से प्रभार मुक्त करने की मांग की  जाय।
     

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