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Sunday, January 27, 2019

बॉलीवुड में ऐतिहासिक ,राजनीतिक, वैचारिक मतभेद पर आधारित दो तीन फाड़

Mahjabeen

बॉलीवुड में भी ऐतिहासिक राजनीतिक वैचारिक मतभेद पर आधारित दो तीन फाड़ दिखाई देने लगे हैं ।एक गढ़ वो है जो सचमुच हक़ीक़त दिखाता है सच के साथ है ...सामाजिक राजनीतिक आर्थिक सांस्कृतिक  स्थतियों को समस्याओं को सही रूप में सामने रखता है ...मगर मीडिया ऐसे ईमानदार निर्देशकों कलाकारों की पब्लिसिटी तो दूर ज़िक्र भी नहीं करता... कुछ अच्छे अख़बार पत्रिका ही उनके बारे में ज़िक्र करते हैं... लोगों तक ये फिल्में नहीं पंहुचती ठीक से....वहीं मीडिया ऐक्शन ड्रामा होरर कमर्शियल  एन्टरटेनमेंट फिल्मों की और झूठ परोपेगैंडा पर आधारित मूवी का खूब प्रचार करती है... बॉलीवुड में फिल्में बनाने वाला दूसरा गढ़ है इतिहास से छेड़छाड़ करने वाला जो ग़लत तरीक़े से इतिहास को नफरत प्रोपेगैंडा का तड़का लगाकर दर्शकों के सामने रखता है झूठ और परोपेगैंडा पर केन्द्रित रहता है सत्ता की मानसिकता स्थिति उनकी फिल्मों में देखने को मिलती है... मीडिया भी इन्हीं के साथ है .....कुछ ऐसे निर्देशक हैं कि इतिहास को वैसे ही रखते हैं जैसे था उसमें कुछ रद्दोबदल नहीं करते ना आधुनिक संदर्भ में दिखाते हैं प्रगतिशील भी नहीं बनने देते पात्रों को ...मगर ये उनसे फिर भी बेहतर हैं जो सत्ता के लाभ के लिए इतिहास को नफरत ग़ैरबराबरी हिन्दू मुस्लिम के पैमाने में रखकर दिखाते हैं.... इन नफरत फैलाने वाले निर्देशकों और हिन्दू मुस्लिम में अलेहदगी करने वालों निर्देशकों से बेहतर कमर्शियल एन्टरटेनमेंट फिल्में बनाने वाले हैं पैसा कमाते हैं नफरत तो नहीं फैलाते ...और आजकल तो कुछ फिल्मों को देखकर ऐसा लगता है जैसे मीडिया की तरह बॉलीवुड के कुछ निर्देशक भी सत्ता के सामने बिछने के लिए तैयार हैं एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर फिल्म बनाई है सच्चाई को नदारद करके और बाला साहब ठाकरे के जीवन पर आधारित फिल्म बन रही है उसमें पता नहीं क्या दिखाएंगे ...इंदिरा गाँधी जी पर भी बनाई थी अभी कुछ समय पहले ....ऐतिहासिक राजनीतिक सामाजिक स्थिति को दिखाएं ये निर्देशक मगर निष्पक्ष होकर।

अपने होंठों पर सजाना चाहता हूँ
आ तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ 

कोई आँसू तेरे दामन पर गिराकर 
बूँद को मोती बनाना चाहता हूँ 

थक गया मैं करते-करते याद तुझको 
अब तुझे मैं याद आना चाहता हूँ

छा रहा है सारी बस्ती में अँधेरा 
रोशनी हो, घर जलाना चाहता हूँ 

आख़री हिचकी तेरे ज़ानों पे आये 
मौत भी मैं शायराना चाहता हूँ

राहत इंदौरी

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