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Thursday, February 28, 2019

एन०आई०ओ०एस० डी०एल०एड ० के कुछ महत्वपूर्ण लिंक

nios से d.el.ed कोर्स अपने अंतिम चरण में अतः आप लोगों को सभी महत्वपूर्ण लिंक सेंड कर रहा हूं। इसके सभी प्रमाण पत्र को डाउनलोड करें तथा अपने पास सुरक्षित रख ले,कभी जरूरत पड़े तो इधर उधर भटकना ना पड़े।।*
👇👇👇👇👇
*एन०आई०ओ०एस० डी०एल०एड ० के कुछ महत्वपूर्ण लिंक*

*1- द्वितीय वर्ष फुल नामांकन डिटेल लेटर👇👇👇*

dled.nios.ac.in/onlinedisp.html

*2- द्वितीय वर्ष फीस रशीद का लिंक 👇👇*

dled.nios.ac.in/attendanceLogin/IIyearfee.aspx

*3-  द्वितीय वर्ष एग्जाम फीस रशीद का लिंक..*
       👇👇👇
यह लिंक अपडेट किया जा चुका है जिससे अब यह भी 501-505 के लिये ही कार्य कर रहा है
http://dled.nios.ac.in/attendanceLogin/ImprovementExamFeeIISem.aspx

*4- 501-505 Exam fee जमा करने का लिंक*
http://dled.nios.ac.in/attendanceLogin/ImprovementExamFeeIISem.aspx

*5- स्टडी सेंटर लेटर के लिए लिंक👇👇*

dled.nios.ac.in/AttendanceLogin/StudentDetails.aspx

*6- फर्स्ट सेमेस्टर रिजल्ट का लिंक👇👇👇*

dled.nios.ac.in/attendancelogin/ResultISemlogin.aspx

*7-  अध्यापक रजिस्ट्रेशन लेटर का लिंक*
      👇👇👇
http://dled.nios.ac.in/Teacher/Receipt.aspx?ReferenceNo=D102901751
*▪इस लिंक को कॉपी कर किसी ब्राउज़र में पेस्ट करे तथा रिफरेन्स नंबर को एडिट करके अपना रिफरेन्स नंबर डालिये फिर सर्च करने के बाद आपका REGISTRATION/ RECEIPT प्रिंट आ जायेगा।*

*8-  आईडी कार्ड हेतु लिंक.*
             👇👇👇
http://dled.nios.ac.in/ICardGeneration.aspx
    

                 *S.P SINGH*
                  🤝🤝🤝

जंग टलती रहे तो बेहतर है

ताशकंद समझौते की पहली सालगिरह पर प्रसारित की गई साहिर लुधियानवी की खूबसूरत नज़्म।

" जंग टलती रहे तो बेहतर है "

ख़ून अपना हो या पराया हो
नस्ल-ए-आदम का ख़ून है आख़िर
जंग मशरिक़ में हो कि मग़रिब में
अम्न-ए-आलम का ख़ून है आख़िर

बम घरों पर गिरें कि सरहद पर
रूह-ए-तामीर ज़ख़्म खाती है
खेत अपने जलें कि औरों के
ज़ीस्त फ़ाक़ों से तिलमिलाती है

टैंक आगे बढ़ें कि पिछे हटें
कोख धरती की बाँझ होती है
फ़त्ह का जश्न हो कि हार का सोग
ज़िंदगी मय्यतों पे रोती है
जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है

जंग क्या मसअलों का हल देगी
आग और ख़ून आज बख़्शेगी
भूक और एहतियाज कल देगी
इस लिए ऐ शरीफ़ इंसानो
जंग टलती रहे तो बेहतर है
आप और हम सभी के आँगन में
शम्अ' जलती रहे तो बेहतर है

2

बरतरी के सुबूत की ख़ातिर
ख़ूँ बहाना ही क्या ज़रूरी है
घर की तारीकियाँ मिटाने को
घर जलाना ही क्या ज़रूरी है
जंग के और भी तो मैदाँ हैं
सिर्फ़ मैदान-ए-किश्त-ओ-ख़ूँ ही नहीं

हासिल-ए-ज़िंदगी ख़िरद भी है
हासिल-ए-ज़िंदगी जुनूँ ही नहीं
आओ इस तीरा-बख़्त दुनिया में
फ़िक्र की रौशनी को आम करें
अम्न को जिन से तक़्वियत पहुँचे
ऐसी जंगों का एहतिमाम करें

जंग वहशत से बरबरिय्यत से
अम्न तहज़ीब ओ इर्तिक़ा के लिए
जंग मर्ग-आफ़रीं सियासत से
अम्न इंसान की बक़ा के लिए
जंग इफ़्लास और ग़ुलामी से
अम्न बेहतर निज़ाम की ख़ातिर
जंग भटकी हुई क़यादत से

अम्न बे-बस अवाम की ख़ातिर
जंग सरमाए के तसल्लुत से
अम्न जम्हूर की ख़ुशी के लिए
जंग जंगों के फ़लसफ़े के ख़िलाफ़
अम्न पुर-अम्न ज़िंदगी के लिए

ये किसका लहू है कौन मरा।

साहिर ने यह नज़्म हिन्दुस्तान पाकिस्तान के बँटवारे में हुई दर्दनाक मौतों के बाद लिखी थी। मगर आज भी दोनों जाहिल क़ौमें इस दर्द को समझ नही पा रही हैं।

ये किसका लहू है कौन मरा।

ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-क़ौम बता।
ये किसका लहू है कौन मरा।।

ये जलते हुए घर किसके हैं
ये कटते हुए तन किसके हैं
तक़सीम के अँधे तूफ़ान में
लुटते हुए गुलशन किसके हैं
बदबख्त फ़िज़ायें किसकी हैं
बरबाद नशेमन किसके हैं

कुछ हम भी सुनें, हमको भी सुना.

ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-क़ौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.

किस काम के हैं ये दीन धरम
जो शर्म के दामन चाक करें,
किस तरह के हैं ये देश भगत
जो बसते घरों को ख़ाक करें,
ये रूहें कैसी रूहें हैं
जो धरती को नापाक करें,

आँखे तो उठा, नज़रें तो मिला.

ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-क़ौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.

जिस राम के नाम पे खून बहे
उस राम की इज़्ज़त क्या होगी,
जिस दीन के हाथों लाज लूटे
उस दीन की क़ीमत क्या होगी,
इन्सान की इस ज़िल्लत से परे
शैतान की ज़िल्लत क्या होगी,

ये वेद हटा, क़ुरआन उठा.

ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-क़ौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.

साहिर लुधियानवी

Tuesday, February 26, 2019

चयनमुक्त साथियों से आजिज़ाना गुज़ारिश

दोस्तों ग्रुप की सरगर्मी देखने के बाद लिखने पर मजबूर हूँ मैं चन्द या कुछ लोग नहीं लिखूंगा।बिहार के चयनमुक्त साथियों में सिर्फ और सिर्फ एक आदमी को लगता है कि मैं सबसे ज़्यादा क़ाबलियत का मालिक हूँ बाकी किसी की कोई अहमियत नहीं है।उनको लगता है कि वही एक शख्स है जिसने शुरुआत से मेहनत की है और कर रहे हैं बाकी लोग सिर्फ घर बैठ कर बात करते हैं और उनको लगता है कि वे वाह वाही लूट रहे हैं, मानो वे पटना में घर बना लिए हों और अपने आपको चयनमुक्त तालीमी मरकज़ के लोगों के लिए अपने आप को वक़्फ़ कर दिए हों।
लिखने के दौरान तमीज़ तहज़ीब को बालाएं ताक रख देते हैं।
याद रखें ये इंतेसार कामयाबी की दलील नहीं नाकामयाबी की तरफ ले जाने वाली है।
तनक़ीद अच्छी चीज है मगर बराए तामीर होनी चाहिए।
मैं समझता हूँ नागवारी के बाद मेरे नम्बर को removed कर दिया जाए उससे मेरे सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

चयनमुक्त साथियों से आजिज़ाना गुज़ारिश
बिहार के कई जिलों से सुनने में आ रहा है कि हाई कोर्ट में केस की नुमाइंदगी कर रहे नुमाइंदों को उनके ही साथियों के ज़रिए ह्रास वो परेशान किया जा रहा है और ज़ेहनी अज़ीयत दी जा रही है ये किसी भी तरह अच्छी बात नहीं है।मामला कोर्ट में है नुमाइंदा क्या कर सकता है ? हमारे वकील हमारी तरफदारी करते हैं और अपनी दलील पेश करते हैं मगर फैसला तो जज को ही करना है जज के मिजाज पर होता है किसी केस में स्टेय का आर्डर कर देते हैं और किसी में नहीं इससे परेशान  होने की ज़रूरत नहीं है।अल्लाह ने चाहा तो पूरे बिहार के चयनमुक्त लोगों के लिए अच्छा ही फैसला आएगा।अपने नुमाइंदों की पैरवी करें और हौसला अफजाई करें न की परेशान।अपने दिल वो दिमाग का इस्तेमाल करें किसी के कही बातों पर कान न धरें कान धरने से अपना ही नुकसान मुस्तक़बिल व हाल में हो सकता है।
आपका अपना
मोहम्मद कमरे आलम
परिहार सीतामढ़ी
मोबाइल 9199320345

Sunday, February 24, 2019

اجلاس وقت کی اہم ترین ضرورت مولانا اظہارالحق مظاہری

سیتامڑھی میں امارت شرعیہ کا اجلاس وقت کی اہم ترین ضرورت مولانا اظہارالحق مظاہری
            
سیتامڑھی محمد ارمان علی

کوئی بھی تنظیم اس وقت تک مضبوط اور مستحکم نہیں  ہوسکتی جب تک ملت کی اکثریت اس پر اعتماداوربھروسہ نہ کرے , بلا شبہ ملت اسلامیہ امارت شرعیہ پر نہ صرف یقین رکھتی ہے بلکہ مکمل اعتماد وبھروسہ بھی کرتی ہے امارت شرعیہ اپنے قیام کے دن سے آج تک ملت کی رہنمائ کرتی چلی آرہی ہے, اور ہر نازک وقت میں ملت کے لئے حکومت وقت کے سامنے سینہ سپر ہوجاتی ہے ان خیالات کا اظہار سیتامڑھی میں  6/7مارچ کو خصوصی تربیتی اجلاس زیر اہتمام امارت شرعیہ پھلواری شریف پٹنہ معنقد ہونے والا ہے کے استقبالیہ کمیٹی کے صدر حضرت مولانا محمد اظہار الحق مظاہری ناظم الجامعہ العربیہ اشرف العلوم کنہواں سیتامڑھی نےاجلاس کی تیاری کے لئے معنقد ایک میٹنگ مدرسہ رحمانیہ مہسول سے خطاب کرتے ہوئے کیا انہوں نے کہا کہ  مفکر اسلام حضرت مولانا سید محمد ولی رحمانی بحیثیت امیر شریعت امارت شرعیہ کے دائرہ کار میں وسعت اور کام کی رفتار میں مزید تیزی لانےکےلئےسرگرداں ہیں,پیرانہ سالی کے باوجود ملک کے موجودہ حالات سے مسلمانوں کو واقف کرانے کے لئے ملک بھر کا دورہ کر رہے ہیں,اورمسلمانوں  کے دینی ملی وعائلی مسائل سے  عوام کومتعارف کرارہےہیں, اسی سلسلہ کی یہ کڑی یہ دوروزہ خصوصی اجلاس ہے,جس کو کامیاب بنانا ہم سب کا دینی وملی فریضہ ہے ,مفتی محمد ثناءالھدی قاسمی نائب ناظم امارت شرعیہ پٹنہ نے امارت شرعیہ سے متعلق  تفصیلی گفتگو کرتے ہوئے کہا کہ امارت شرعیہ شریعت کی روشنی میں ملت کےمسائل کے حل کیلئے ہمیشہ سے کوشاں ہے جس سے نہ صرف بہار بلکہ پورا ملک واقف ہے, مولانا محمد انواراللہ فلک قاسمی نے کہا کہ اس اجلاس کو کامیاب بنانے کیلئے مسلمانوں کو بڑھ چڑھ کر حصہ لینا چاہئے یہ اجلاس وقت کی اہم ضرورت ہے, الحاج محمد ساجد علی خان نے کہا کہ پروگرام کو کامیاب اور موئثربنانے بنانے کےلئے ہم سبھوں کوبھر پور تعاون کرنے کی ضرورت ہے,محمدارمان علی صدر مدرسہ رحمانیہ مہسول سیتامڑھی نے کہا کہ جن لوگوں نے اپنے ذمہ جوکام لیا ہےاس کو ترجیحی بنیاد پرآج سے ہی کام کرنا شروع کردیں وقت بہت کم ہے,محمدعارف حسین مکھیا نے کہا کہ ہمارے لئے انتہائی خوشی ومسرت کی بات ہے کہ مہسول میں دو روزہ خصوصی تربیتی اجلاس ہونے جارہاہے,اس عظیم الشان اجلاس عام کی میزبانی کاشرف میسر ہونےوالاہے اکابرین کی آمد سے سیتامڑھی کے مسلمانوں استفاذہ حاصل کر نے کا موقع ملیگا اور حضرت امیر شریعت کی آمد ہمارے لئے فخر کی بات ہےنششت کاآغاز قاری ایاز نےتلاوت کلام اللہ سے کیا  اس موقع پر ظفر کمال علوی سکریٹری مدرسہ رحمانیہ مہسول, مولانا ضیاءالرحمان قاسمی, الحاج محمد مختار عالم, الحاج عبداللہ رحمانی, محمد مرتضی, اور مزمل حسین قاسمی مبلغ امارت شرعیہ موجود تھے

Saturday, February 23, 2019

पूरे बिहार में 25 फरवरी से 27 फरवरी के बीच वर्षा के साथ ओला वृष्टि होने की संभावना

पूरे बिहार में 25 फरवरी से 27 फरवरी के बीच वर्षा के साथ ओला वृष्टि की संभावना है मौसम विभाग ने ऐसा बताया गया है जिसको लेकर आपदा प्रबंधन विभाग बिहार पटना ने सभी जिला पदाधिकारियों को पत्र भेज अहतेयाति क़दम उठाने का निर्देश दिया है।

सुरक्षित शनिवार, आत्म सुरक्षा के तहत मध्य विद्यालय बीएमसी मकतब परिहार के प्रधानाध्यापक मोहम्मद शमीम अंसारी दो पहिया वाहन चालक को फूल देकर हैल्मेट पहन कर ड्राइविंग का आग्रह करते हुए

सड़क सुरक्षा सप्ताह अभियान के तहत शनिवार को मध्य विद्यालय बीएमसी मकतब परिहार सीतामढ़ी के शिक्षक और छात्रों ने दो पहिया वाहन चालकों को आत्म सुरक्षा के लिए फूल देकर हेल्मेट पहन कर गाड़ी चलाने की अपील की ।
तस्वीरों में विद्यालय के प्रधान शिक्षक मोहम्मद शमीम अंसारी और सहायक शिक्षक मोहम्मद फखरुल अंसारी फूल देते हुए नज़र आ रहे हैं।



Thursday, February 21, 2019

ہاں میں ’کشمیری‘ ہوں

ہاں میں ’کشمیری‘ ہوں
نازش ہما قاسمی
(ممبئی اردو نیوز؍بصیرت آن لائن)
جی! کشمیری، سری نگر کا رہنے والا، پلوامہ میں پالتو و خونخوار بھیڑیوں سے خوف کھایا ہوا، کشتواڑ میں کشت وخوں دیکھنے والا، کٹھوعہ میں پروان چڑھنے والا، راجوری میں ظلم و جور سہنے والا، اودھم پور میں فرقہ پرستوں کی ادھم و دھینگا مشتی دیکھنے پر مجبور، پونچھ میں ظلم پر کسی کے ذریعے آنسوں پونچھے جانے کا انتظار کرنے والا، لداخ جیسے سرد علاقے میں ایمانی حرارت سے یخ بستہ رات گزارنے والا، اننت ناگ میں انسان نما ناگوں کے ذریعے ڈسا جانے والا، بانڈی پورہ کا مظلوم، بارہ مولہ کا ستایا ہوا، کپواڑہ کا باسی، شوپیاں کا مجبور کشمیری ہوں۔جی ! درد سے چور، مظلوم، مجبور، محصور، غموں کا ستایا ہوا، اپنی آنکھوں کے سامنے بہنوں کی عزتیں لٹتا دیکھتا ہوا مجبور، ماؤں کو شِیر خوار بچے کی لاش پر تڑپتا دیکھتا ہوا غم و الم سے چور، بہنوں کو بھائی کی لاش پر سر پٹختا دیکھتا ہوا بے بس، سہاگنوں کو ان کے سہاگ پر آنسو بہاتا دیکھتا ہوا لاچار کشمیری ہوں۔ ہاں! میں وہی کشمیری ہوں جو کبھی پیلٹ گن کا شکار ہو کر اپنی بینائی کھورہا ہے، جو کبھی فوجیوں کے ذریعے گاڑیوں پر بٹھا کر ذلیل کیاجارہا ہے، جو کبھی فوجی وردی میں ملبوس انسانوں کی گولی کا شکار ہوکر موت کے منہ میں جارہا ہے۔ ہماری درد و الم میں ڈوبی ہوئی طویل داستاں ہیں، جس میں صرف خون ہی خون ہے۔ ہاں! میں وہی کشمیری ہوں جو کبھی بوڑھے باپ کی لاش اُٹھا رہا ہے، کبھی جواں بیٹے کی موت پر ماتم کناں ہے، کبھی انسانی بھیڑیوں کے چنگل میں اپنی پاکیزہ ماؤں و بہنوں کو ذلیل و رسوا ہوتے ہوئے دیکھ رہا ہے۔ ہاں میں جنت ارضی میں رہنے والا جہنمی ہوں جو روز آگ کے شعلوں میں اپنوں کی لاشوں کو جلتا دیکھتا ہوں۔
ہاں! میں اُن ہی عظیم کشمیریوں کی اولاد ہوں جنہوں نے ۱۳؍جولائی ۱۹۳۱ کو سری نگر جیل کے سامنے اذان کی تکمیل کے لیے ’اللہ اکبر ‘ کی پہلی صدا سے لے کر ’لا الہ الاللہ‘ کے آخری الفاظ تک ۲۲ جانوں کا نذرانہ پیش کرکے دنیا کو اسلام پر مر مٹنے کا عظیم پیغام دیاتھا۔ ہاں!  میں وہی کشمیری ہوں جس کے ۷۵؍ افراد کو ۱۹۹۳ میں گولیوں سے بھون ڈالا گیا، جسے مشہور و معروف انگریزی رسالہ ’ٹائم میگزین‘ نے رپورٹ پیش کرتے ہوئے ’خونی لہر میں اضافہ‘ قرار دیا تھا۔ اسی سانحے میں بس میں بیٹھی مجبور ماں کی گود سے اس کے بچے کو چھین کر آگ میں بھون دیا اور پھر گولی مار کر اس مجبور ماں کی مجبوری کا مذاق اڑایاگیا۔ ہاں! میں وہی کشمیری ہوں جب ۲۴؍ فروری ۱۹۹۱ کی درمیانی شب کنن پوشہ پورہ ہندواڑہ پر فوجی وردی میں ملبوس بھیڑیے نما انسان زانی حملہ آور ہوئے تھے، جہاں مردوں کو گاؤں خالی کرنے کا حکم دیا تھا اور پھر ہماری ۳۲ پاکیزہ و مقدس ماؤں اور بہنوں جس میں ۱۳؍ سال کی کمسن و معصوم بچی کے ساتھ ساتھ ۹۰ سال کی بوڑھی عورتوں کی عصمت سے کھلواڑ کر کے ہمیں زندگی بھر کا روگ دیا گیا۔ اس دلدوز سانحے کی شکار ستر سالہ بزرگ خاتون کہتی ہیں:  ’’رات کے گیارہ بج چکے تھے اور میں حسب معمول گھر میں اکیلی نفل نماز ادا کررہی تھی، اسی دوران چار فوجی وردی میں ملبوس افراد ہمارے گھر کی کھڑکی توڑ کر کمرے میں گھس گئے اور میرے کپڑے پھاڑ ڈالے میں کافی چیخی، چلائی؛ لیکن سب بے سود رہا، سیتا ماں کی حرمت و عفت کے لیے مرمٹنے والے سیتا ماں کے ہی دیش میں سیتا ماں جیسی مقدس ناریوں کی عصمت لوٹنے میں مشغول رہے، ان ظالموں نے میرے منہ میں کپڑا ڈال کر میری آواز بند کردی اور میرے بے ہوش ہوجانے تک یکے بعد دیگر گھنٹوں انسانیت کو شرمندہ کرنے کے ساتھ ساتھ اپنی سیتا ماں کی مقدس حرمت کو پامال کرتے رہے، میرا بیٹا کشمیر پولس میں تعینات تھا اور اس قیامت خیز رات کو ڈیوٹی پر تھا جب اسے پتہ چلا تو وہ اپنا ذہنی توازن کھو بیٹھا اور آج تک ٹھیک نہیں ہوپایا‘‘۔
میں آج ایک کشمیری ہونے کے ناطے انسانیت کا ڈھونگ رچنے والے حکمرانوں سے پوچھنا چاہتا ہوں کیا ہماری مائیں بہنیں انسانیت سے خارج ہیں؟  آخر کیوں نہیں ہماری عصمت و عفت ہمارے جان ومال کی حفاظت کو یقینی بنایا جارہا ہے، کیوں ہمیں چکی کے دو پاٹوں کے بیچ پیسا جارہا ہے۔
ہاں! میں وہی کشمیری ہوں  جسے ۲۰ مارچ۲۰۰۰ سے لے کر ۳؍اپریل ۲۰۰۰تک اسلام آباد کے چھٹی سنگھ پوری گاؤں میں تقریباً ۱۴ دنوں تک اپنے سکھ بھائیوں کی ۴۹ لاشیں اُٹھانی پڑیں، مجرمین کی نشاندہی ہوئی، لیکن آج تک ہمارے ہم وطن بھائیوں کو انصاف نہیں ملا۔ اس قتل عام میں قاتلوں کی گولیوں سے بچ نکلنے والے نانک سنگھ نامی کہتے ہیں: ’’وہ فوجی وردی میں ملبوس تھے، ہم نہیں جانتے کہ وہ کون تھے، جب وہ وہاں سے گئے تو جائے واردات پر انسانی لاشوں اور چند شراب کی آدھی بھری یا خالی بوتلوں کے سوا کچھ بھی نہیں تھا، جائے واردات سے کچھ ہی دور راشٹریہ رائفلز فوجی اہلکاروں کا کیمپ ہے، مگر اُنہوں نے ہمیں بچانے کی کوئی کارروائی نہیں کی‘‘۔
ہاں! میں وہی کشمیری ہوں جس کی دو معصوم لڑکیوں "آسیہ اور نیلوفر" کو شوپیاں میں ۲۹؍ مئی ۲۰۰۹کے دن ہوس کا نشانہ بنا کر ندی میں پھینک دیا گیا۔ جن کے کرب میں مبتلا ہو کر مرنے بعد ان کے بھائی کو انصاف مانگنے پر موت کی نیند سلا دیا گیا ۔ ہاں! میں وہی کشمیری ہوں جس پر مظالم کی داستاں طویل ہے اور اس مظالم پر ارباب حل و عقد کی خاموشی بھی طویل ہے۔ گزشتہ ۱۵؍دسمبر کے دن پلوامہ میں مسلح دہشت گردی کے جواب میں ہندوستانی فوجی نے دہشت گردوں کو مار گرایا؛ لیکن اس کے بعد رونما ہونے والے احتجاج پر فوج نے اندھا دھند گولی برسا کر سات افراد کو موت کے گھاٹ اتار دیا جس سے پھر پورا کشمیر لہو لہان ہے، اس میں جاں بحق ہونے والے شہید عابد حسین احمد لون بھی تھے جنہوں نے انڈونیشیا میں شادی کی تھی آپ ان کی بیوہ کی ’تصویر درد ‘ دیکھ لیں تصویر میں بھی آپ آنکھ نہیں ملا پائیں گے۔ آخر کیا جرم تھا ان کا؟ وہ تو گھر سے دودھ لانے نکلے تھے۔ ان کے خون ناحق پر حریت قائد سید علی گیلانی نے سہ روزہ سوگ کا اعلان کیا تھا اور ایمنسٹی انڈیا نے ان مہلوکین کی آزادانہ طور پر جانچ کا مطالبہ کیا ہے۔ آج ہندوستان کی آزادی کو ستر سال سے زائد کا عرصہ ہوچکا ہے؛ لیکن ہم کشمیری اب بھی اپنے ملک میں آزاد نہیں ہیں، کبھی ہڑتال، کبھی احتجاج تو کبھی کرفیو سے ہماری زندگی اجیرن ہوچکی ہے۔ ہر دن کوئی نہ کوئی ایسا حادثہ رونما ہوتا ہے جس سے پوری انسانیت تڑپ اٹھتی ہے؛ لیکن ہمارے حکمرانوں کے کانوں پر جوں تک نہیں رینگتی اور وہ ہمیں امن و تحفظ فراہم کرنے کے لیے کوئی ٹھوس اقدام نہیں کرتے۔ ہم صرف امن چاہتے ہیں امن، ہمارے بچے ہاتھ میں پتھر نہیں اُٹھاتے اگر ان کے باپ کو اس طرح قتل نہ کیاجاتا، ہماری بچیاں فوج پر سنگ باری نہیں کرتیں اگر ان کے سامنے ان کی ماؤں بہنوں کی عصمتوں کا جنازہ نہ نکالا جاتا۔ میرے یہاں تو اب یتیم بچوں کی ایک بڑی تعداد جمع ہوگئی ہے، ہزاروں بیوائیں ایسی ہیں جن کے شوہر برسوں سے لاپتہ ہیں ان کی کوئی خبر نہیں، آیا انہیں آسمان کھا گیا یا زمین نگل گئی؟ بینائی سے محروم، ہاتھ پاؤں سے معذور مرد و خواتین کی بھی ایک بڑی تعداد ہے جن کے آنے والے کل کو برباد کر دیا گیا۔ ہم انصاف انصاف پکارتے رہے انصاف نہ ملا،  ہاں! ذلت و رسوائی ضرور ملی جو ارباب اقتدار نے ہمیں تحفہ میں دی، ہاں! میں وہی کشمیری ہوں جو ہر دن مر رہا ہے، خوف و ہراس کے سایے میں گھٹ گھٹ کر جی رہا ہے۔ آج بھی اگر کشمیر کو اپنانے کے ساتھ ساتھ کشمیریوں کو اپنایا جائے، ہمارے درد کو سمجھا جائے، ہماری تکلیفوں کا مداوا کیاجائے، ہماری ماؤں بہنوں کی عصمت لوٹنے والے مجرموں کو سنگسار کیا جائے، ہمارے باپ کے قاتل کو پھانسی دی جائے، ہمارے ساتھ غیر انسانی سلوک روا رکھنے والوں پر لگام کسی جائے تو ہم قومی دھارے میں شامل ہو کر ملک و ملت کا نام روشن کرسکتے ہیں۔ کاش! اقوام عالم ہماری بے بسی پر رحم کھائے اور ہمیں اپنے آزاد ملک میں آزاد شہری کے حقوق سے نوازے، ہم صرف امن چاہتے ہیں امن۔ امن۔ امن ! ایسا امن جس میں ہماری مائیں محفوظ ہوں، ہمارے بچے سلامت رہیں، ہمارے والدین خوش وخرم آزاد زندگی گزاریں۔
(بصیرت فیچرس)

बिहार में 41 BDO का तबादला, 99 CO भी बदले गये, देखें यहां पूरी लिस्ट

*बिहार में 41 BDO का तबादला, 99 CO भी बदले गये, देखें यहां पूरी लिस्ट*

बिहार में आइएएस, आइपीएस, डीएसपी के थोकभाव में तबादले के बाद अब काफी संख्या में प्रदेश के बीडीओ-सीओ का ट्रांसफर किया गया है। सरकार ने बुधवार को प्रदेश के 41 प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) का तबादला किया है। वहीं सरकार ने 99 अंचल पदाधिकारी (CO) का भी ट्रांसफर किया है। दोनों की अधिसूचना सरकार की ओर से जारी कर दी गई है।

जारी अधिसूचना के अनुसार अररिया जिले के जोकीहाट व पलासी, गया जिले के वजीरगंज व अतरी, मधेपुरा जिले के चौसा, बिहारीगंज व गम्हरिया, मधुबनी के खुटौना व हरलाखी, दरभंगा जिले के हनुमाननगर, सिंहवाड़ा व बहादुरपुर तथा कैमूर के भभुआ व अघौड़ा के बीडीओ बदले गए हैं। इसी तरह अन्य प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारी का ट्रांसफर किया गया है।

*बदले गए राज्‍य के ये अंचल पदाधिकारी*
इसके साथ ही राज्य सरकार ने बुधवार को 99 सीओ और सहायक बंदोबस्त पदाधिकारियों का तबादला किया। उनके नाम और अंचल इस तरह हैं : विजय कुमार गुप्ता-पलासी, चंद्रशेखर सिंह-परबत्ता, शंभूशरण राय-चानन, नागेंद्र प्रसाद-बेलहर, रितेश वर्मा-डंडारी, सुमंत नाथ-छौड़ाही, पुरेंद्र कुमार सिंह-चैनपुर, विनय कु मार-अघौरा, महेंद्र प्रसाद-चांद, धर्मनाथ बैठा-फुलपरास, संजय कुमार शाही-कलुआही, अभय कांत मिश्र-बिहारीगंज, मनोरंजन प्रसाद-घैलाढ़, अनुज कुमार झा-बरियारपुर, महेश पाठक-टेटिया बम्बर, पवन कुमार झा-मुरौल, शिवजी कुमार भटट-टेढ़ागाछ, चंद्रमा राम-हसनपुरा, देवनारायण झा-रघुनाथपुर, मिथिलेश कुमार सिंह-लकड़ी नवीगंज, पारसनाथ राय-दरौंदा, रविशंकर सिन्हा-शाहपुर, अशोक कुमार सिंह-सुगौली, नंदकिशोर सिंह-गड़हनी, नवीन भूषण-गौराडीह, अजय मणि-तरारी, राजीव रंजन श्रीवास्तव-गौनाहा, मनी कुमार वर्मा-बनजरिया, विजेंद्र कुमार सिंह-फेनहारा, प्रभात कुमार-छौड़ादानो, अर्जुन कुमार विश्वास-बनमंखी, दीपक कुमार-पूर्णिया पूर्व, प्रवीण कुमार पांडेय-पटना सदर, सुरजेश्वर श्रीवास्तव-करहगर, आलोकचंद्र रंजन-बिक्रमगंज, श्याम सुंदर राय-नासरीगंज, आशीष कुमार-संझौली, अनिल प्रसाद सिंह-सूर्यपुरा, शैलेंद्र कुमार-अरियरी, राजीव रंजन-बिथान, प्रमोद कुमार रंजन-मोहिउद्दीन नगर, अरविंद कुमार सिंह-महिषी, नारायण बैठा-कहरा, अरविन्द उद्भव-चोरौत, अश्विनी कुमार सिंह-रून्नी सैदपुर, स्वामीनाथ राम-बनियापुर, ललित कुमार सिंह-मशरख, रणधीर प्रसाद-पानापुर, मनोज कुमार राय-मरौना, नागेंद्र कुमार रस्तोगी-किशनपुर, कमल प्रसाद साह-हायाघाट, कैलाश चौधरी-हनुमाननगर, विनोद कुमार-गौरा बौराम, रणधीर प्रसाद-बरहट, शिव कुमार शर्मा-खैरा, अजय कुमार सिन्हा-अलीगंज, राजीव रंजन-मखदुमपुर, विनोद कुमार गुप्ता-निर्मली, पवन कुमार-रोह, निरंजन कुमार घोष-काशीचक, इंदुभूषण श्रीवास्तव-सोनभद्र वंशी सूर्यपुर, अवधेश झा-खिजरसराय, छोटेलाल पासवान-टनकुप्पा, विजेंद्र कुमार-वजीरगंज, अशोक कुमार-मोहरा, निर्मल राम-परैया, विमल कुमार घोष-पंचदेवरी, नीरज कुमार सिंह-पिपरिया, अरविन्द कुमार अजीत-जोकीहाट, अजाजुद्दीन अहमद-परसौनी, सुशील कुमार उपाध्याय-सिंहवाड़ा, अबुल कैसर-धरहरा, राजेश कुमार सिन्हा-डोभी, संजीव कुमार-फारबिसगंज, विपिन कुमार सिंह-हथुआ, संजय कुमार-सुरसंड, विजय कुमार सिंह-डुमरांव, प्रमोद कुमार सिंह-बेनीपटटी, अनुज कुमार-के नगर, बसंत कुमार राय-बारुण, रवींद्र कुमार भारती-कांटी, दिलीप कुमार-गया सदर, सुनील कुमार साह-बेलछी, विनोद कुमार मिश्र-रामनगर, सुधीर प्रसाद सिंह-सुप्पी, संजय कुमार झा-रजौली, संजय कुमार अंबष्ठ-आरा सदर, वीरेंद्र कुमार-मोतिहारी सदर, चौधरी वसंत कुमार सिंह-कराय परसुराय, अशोक कुमार सिन्हा-लहलादपुर, अजय कुमार-धोरैया, नरेश कुमार सिन्हा-मधेपुर,   विजय कुमार तिवारी-सरायरंजन, शशि भूषण कुमार-कटोरिया, विद्यानंद झा- बसंतपुर एवं राकेश कुमार-गुठनी। इनके अलावा जनार्दन प्रसाद सिंह को लखीसराय का सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी, ओमप्रकाश को प्रभारी सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी, बेगूसराय एवं मनोज कुमार को कैमूर का प्रभारी चकबंदी पदाधिकारी बनाया गया है।

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