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Tuesday, February 12, 2019

14 फरवरी को प्रस्तावित बिहार विधानसभा के घेराव का रणनीतिक महत्व

बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार पप्पू के नेतृत्व में राज्य के लाखों शिक्षक 14 फरवरी को पटना में बिहार विधानसभा का घेराव करेंगे। इस हेतु राज्य के सभी 38 ज़िलों में जोरदार तैयारी चल रही है। कहा जा रहा है कि, श्री पप्पू ने सही समय पर सही चोट किया है। 14 फरवरी को प्रस्तावित बिहार विधानसभा घेराव का प्रमुख रणनीतिक महत्व निम्नलिखित है:-
(१) सत्ताधारी और विपक्षी सभी राजनीतिक दल लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में 14 फरवरी को बिहार विधानसभा के सामने शिक्षकों की भारी भीड़ लोकसभा चुनाव से ठीक पहले शिक्षक समस्याओं की ओर सरकार तथा राजनीतिक दलों का  विशेष ध्यान आकर्षित करने तथा उनपर दबाव बनाने का सबसे महत्त्वपूर्ण अवसर है।
(२) माननीय सुप्रीम कोर्ट में समान काम समान वेतन की सुनवाई 4 माह पूर्व ही पूरी हो चुकी है , परन्तु अबतक फैसला नहीं सुनाया गया है। ऐसे में  समान काम समान वेतन के लिए 14 फरवरी को बिहार विधानसभा के सामने शिक्षकों की मजबूत प्रतिबद्धता यह साबित करेगा कि, बिहार के नियोजित शिक्षक अपने अधिकार की लड़ाई से विचलित नहीं होगा। ऐसे में यह शिक्षक आन्दोलन माननीय सुप्रीम कोर्ट पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाने में कारगर साबित होगा।
(३) 14 फरवरी को बिहार के नियोजित शिक्षक पहली बार पुरानी पेंशन लागू करने की मांग को लेकर सशक्त आवाज बुलंद करेगा, इस दृष्टिकोण से यह आन्दोलन ऐतिहासिक है।
(४) माननीय सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बावजूद डी पी ई उत्तीर्णता की तिथि से प्रशिक्षित का लाभ देने हेतु अबतक सरकार स्तर से कोई पत्र निर्गत नहीं हुआ है। इस हेतु यह आन्दोलन सही समय पर सही चोट साबित होगा।
(५) सत्र 2013-15 A,B,C,D बैच के प्रशिक्षू शिक्षकों के डी एल एड परीक्षा के आयोजन, हाल में डी एल एड परीक्षा उत्तीर्ण नवप्रशिक्षू शिक्षकों के वेतन निर्धारण, प्रोन्नति सहित विभिन्न समस्याओं के समाधान तथा मांगों की पूर्ति की दिशा में यह आन्दोलन महत्वपूर्ण है।
अतः बिहार के तमाम शिक्षक भाइयों एवं शिक्षिका बहनों से अपील है कि, 14 फरवरी को 11:30 बजे गर्दनीबाग पटना पहुंच कर आन्दोलन को सफल बनाने में सहयोग करें।
निवेदक:- संजीव कुमार कामत, जिला अध्यक्ष, बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ मधुबनी।

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