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Tuesday, February 26, 2019

चयनमुक्त साथियों से आजिज़ाना गुज़ारिश

दोस्तों ग्रुप की सरगर्मी देखने के बाद लिखने पर मजबूर हूँ मैं चन्द या कुछ लोग नहीं लिखूंगा।बिहार के चयनमुक्त साथियों में सिर्फ और सिर्फ एक आदमी को लगता है कि मैं सबसे ज़्यादा क़ाबलियत का मालिक हूँ बाकी किसी की कोई अहमियत नहीं है।उनको लगता है कि वही एक शख्स है जिसने शुरुआत से मेहनत की है और कर रहे हैं बाकी लोग सिर्फ घर बैठ कर बात करते हैं और उनको लगता है कि वे वाह वाही लूट रहे हैं, मानो वे पटना में घर बना लिए हों और अपने आपको चयनमुक्त तालीमी मरकज़ के लोगों के लिए अपने आप को वक़्फ़ कर दिए हों।
लिखने के दौरान तमीज़ तहज़ीब को बालाएं ताक रख देते हैं।
याद रखें ये इंतेसार कामयाबी की दलील नहीं नाकामयाबी की तरफ ले जाने वाली है।
तनक़ीद अच्छी चीज है मगर बराए तामीर होनी चाहिए।
मैं समझता हूँ नागवारी के बाद मेरे नम्बर को removed कर दिया जाए उससे मेरे सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

चयनमुक्त साथियों से आजिज़ाना गुज़ारिश
बिहार के कई जिलों से सुनने में आ रहा है कि हाई कोर्ट में केस की नुमाइंदगी कर रहे नुमाइंदों को उनके ही साथियों के ज़रिए ह्रास वो परेशान किया जा रहा है और ज़ेहनी अज़ीयत दी जा रही है ये किसी भी तरह अच्छी बात नहीं है।मामला कोर्ट में है नुमाइंदा क्या कर सकता है ? हमारे वकील हमारी तरफदारी करते हैं और अपनी दलील पेश करते हैं मगर फैसला तो जज को ही करना है जज के मिजाज पर होता है किसी केस में स्टेय का आर्डर कर देते हैं और किसी में नहीं इससे परेशान  होने की ज़रूरत नहीं है।अल्लाह ने चाहा तो पूरे बिहार के चयनमुक्त लोगों के लिए अच्छा ही फैसला आएगा।अपने नुमाइंदों की पैरवी करें और हौसला अफजाई करें न की परेशान।अपने दिल वो दिमाग का इस्तेमाल करें किसी के कही बातों पर कान न धरें कान धरने से अपना ही नुकसान मुस्तक़बिल व हाल में हो सकता है।
आपका अपना
मोहम्मद कमरे आलम
परिहार सीतामढ़ी
मोबाइल 9199320345

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