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Thursday, February 28, 2019

ये किसका लहू है कौन मरा।

साहिर ने यह नज़्म हिन्दुस्तान पाकिस्तान के बँटवारे में हुई दर्दनाक मौतों के बाद लिखी थी। मगर आज भी दोनों जाहिल क़ौमें इस दर्द को समझ नही पा रही हैं।

ये किसका लहू है कौन मरा।

ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-क़ौम बता।
ये किसका लहू है कौन मरा।।

ये जलते हुए घर किसके हैं
ये कटते हुए तन किसके हैं
तक़सीम के अँधे तूफ़ान में
लुटते हुए गुलशन किसके हैं
बदबख्त फ़िज़ायें किसकी हैं
बरबाद नशेमन किसके हैं

कुछ हम भी सुनें, हमको भी सुना.

ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-क़ौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.

किस काम के हैं ये दीन धरम
जो शर्म के दामन चाक करें,
किस तरह के हैं ये देश भगत
जो बसते घरों को ख़ाक करें,
ये रूहें कैसी रूहें हैं
जो धरती को नापाक करें,

आँखे तो उठा, नज़रें तो मिला.

ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-क़ौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.

जिस राम के नाम पे खून बहे
उस राम की इज़्ज़त क्या होगी,
जिस दीन के हाथों लाज लूटे
उस दीन की क़ीमत क्या होगी,
इन्सान की इस ज़िल्लत से परे
शैतान की ज़िल्लत क्या होगी,

ये वेद हटा, क़ुरआन उठा.

ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-क़ौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.

साहिर लुधियानवी

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