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Tuesday, April 23, 2019

लफ्फाजी नहीं, आंकड़ों से समझिये कैसे 2019 में BJP का बिहार में डूबना तय है- Irshadul Haque का विश्लेषण

लफ्फाजी नहीं, आंकड़ों से समझिये कैसे 2019 में BJP का बिहार में डूबना तय है- Irshadul Haque का विश्लेषण



लफ्फाजी नहीं, आंकड़ों से समझिये कैसे 2019 में BJP का बिहार में डूबना तय है- Irshadul Haque का विश्लेषण

Irshadul Haque, Editor Naukarshahi.com


NDA ने अपनी सीट शेयरिंग की घोषणा कर दी है. तमाम सहयोगी दल चुनावी जंग के लिए कमर कस चुके हैं. पर चुनाव परिणाम से पहले ही कुछ निश्चित परिणा सामने आ चुके हैं. वह ये कि भाजपा अगर अपनी सभी 17 सीटें भी जीत ले तो भी वह 2014 वाली ताकत नहीं प्राप्त कर सकेगी. यही युनिवर्सल ट्रुथ है. 

गोया 2019 के चुनाव से पहले अघोषित रूप से घोषित हो चुका है कि इस चुनाव में पार्टी स्तर पर भाजपा सबसे अधिक घाटे में रहेगी. किसी भी दल के लिए चुनाव नतीजे से पहले नतीजा जान लेना, और वह भी अपने कमजोर हो जाने की गारंटी के प्रति आश्वस्त हो जाना, मनोबल का कमजोर हो जाना है.

भाजपा की तकदीर में लिखा अकाट सच यही है.

चिंता में हैं मोदी-शाह

आगामी चुनाव में भाजपा के कद्दावर नेताओं नरेंद्र मोदी व अमित शाह की चिंतायें यहीं खत्म नहीं हो रहीं. चुनाव से पहले उसके तनाव व दबाव में रहने के और भी कई कारण हैं जो उसके माथे पर चिंता की लकीरें गाढ़ी कर देने वाले हैं. आइए हम भाजपा की चिंताओं को तथ्यों, आंकड़ों में समझने की कोशिश करते हैं.

2014 के चुनाव में जदयू द्वारा उसके गठबंधन से अलग हो जाने के जबर्दस्त झटके के बाद भी भाजपा का मनोबल नहीं गिरा था. नरेंद्र मोदी नामक तूफान के कारण उसका उत्साह सातवें आसमान पर था. उसने लोजपा और रालोसपा के सहारे 40 में से 31 सीटें झटक ली थी.

वहीं भाजपा, 2014 के 31 सीटों के बरअक्स इस बार महज 17 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. तब उसने 22 सीटें जीती थीं. गोया चुनाव से पहले ही उसने पिछली बार के मुकाबले 5 जीती हुई सीटें गवां दीं.

पिछली सफलता दोहराने पर भी नुकसान

अब आइए इसके दूसरे पक्ष पर नजर डालते हैं.  पिछली बार उसकी सफलता दर 70.96 प्रतिशत थी. अगर वह इस बार भी इसी सफलता दर को बरकरार रखती है तो भी उसे  बमुश्किल 12 सीटें ही मिलेंगी. इसका मतलब हुआ 2014 के मुकाबले किसी भी हाल में उसे 10 सीटें कम मिलेंगी ही मिलेंगी. और अगर पांच साल के मोदी राज से बढ़ी एंटि एंकम्बेंसी ने असर दिखाया तो सफलता के ये आंकड़े और नीचे आना निश्चित है. ऐसे में भाजपा 10 सीटों के नीचे भी सिमट सकती है. याद रखिए कि यह NDA के सबसे बड़े घटक दल यानी भाजपा की बात हुई.

यह भी जानिये- कब कहां है लोकसभा चुनाव

अब आइए NDA के दूसरे सहयोगी जदयू और लोजपा की बात भी कर लें.

सबसे कूल कूल और सकारात्मक विश्लेषणात्म दृष्टि डालने पर अगर हम मोटामाटी भी कहें कि जदयू 17 में से जितनी भी कम से कम सीटें जीते वह 2014 की बुरी स्थिति यानी 2 सीटों पर तो नहीं सिमटेगी. यानी उसका प्रदर्शन 2014 की तुलना में अच्छा ही रहेगा क्योंकि उसे भाजपा के कैडर वोट तो बोनस के तौर पर मिलेंगे. यानी यह कह सकते हैं कि जदयू, पिछले चुनाव के मुकाबले मजबूत होके निकलेगा.

रही बात लोजपा की तो उसके लिए चुनौतियां भाजपा की तरह तो नहीं, पर पिछले चुनाव के मुकाबले चैलेंज ज्यादा ही होगा. लोजपा ने पिछले चुनाव में 6 सीटों पर कामयाबी हासिल की थी. वह अपनी इन सीटों को बरकार रखने की चुनौती से जूझेगी.

निष्कर्ष

यह गारंटी है कि भाजपा का ह्रास होगा. पिछले चुनाव के 22 सीटों के मुकाबले वह अधिकतम 10-12 या उससे भी कम पर लुढ़क कर जायेगी या निश्चित है. वहीं दूसरी तरफ जदयू की पिछले चुनाव में जीती 2 सीटों से आगे जाने की संभवाना है और   जहां तक NDA की तीसरी सहयोगी एलजेपी की बात है तो वह अपने पिछले प्रदर्शन को दोहरा पाये इसकी उम्मीद तो की जा सकती है पर इसकी गारंटी कोई नहीं दे सकता.

यहां यह भी जिक्र करता चलूं कि अगर उसके सहयोगी दल- जदयू व लोजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया तो अगली बार भाजपा के लिए ये दल सरदर्द ही बनेंगे.

 

 

 

 

Thursday, April 11, 2019

GHAZAL

عجب ہے، خواہشیں ہم لا زوال رکھتے ہیں
یوں اپنے آپ کو ہم پائمال رکھتے ہیں
ملا ہے آج جو خوش اس پہ ہم نہیں ہوتے
ہم اپنی ساری خوشی کل پہ ٹال رکھتے ہیں
جو ہم نے ساتھ گزارے تھے تیری قربت میں
وہ چند لمحے کئی ماہ و سال رکھتے ہیں
اگر ہو وقت میسر ہماری بات بھی سن
اے پیاری زندگی ہم کچھ سوال رکھتے ہیں
تمہاری باتیں، تمہاری حسین یادوں کو
بہ مثل دھڑکنیں دل میں سنبھال رکھتے ہیں
وہ آ کے خواب میں زلفیں سنوار دیتے ہیں
کچھ اس طرح وہ ہمارا خیال رکھتے ہیں
وہ شخص بیچ سفر میں جو ساتھ چھوڑ گیا
نہ اس سے رنج نہ کوئی ملال رکھتے ہیں

نذرالحسن نور
١٠ اپریل ٢٠١٩

Wednesday, April 03, 2019

6.5 लाख साक्षरता कर्मी के पीड़ित परिवारों ने दृढ संकल्पित होकर NDA का विरोध करने का निर्णय लिया

शिक्षा सर्वांगीण विकास की कुंजी है तथा साक्षरता इसकी पहला सोपान।मानव विकास के सूचकांक में प्रौढ़ साक्षरता दर अत्यंत महत्वपूर्ण फैक्टर है।साक्षरता आंदोलन दूसरी आजादी का महत्वपूर्ण आंदोलन है।इच्छाशक्ति विहीन जन विरोधी केंद्र की नरेंद्र मोदी की भाजपा सरकार ने  सुनियोजित साजिश के तहत दुर्भावना से ग्रसित होकर साक्षर भारत मिशन का कार्यावधि विस्तार रोक कर देश में संचालित प्रौढ़ साक्षरता कार्यक्रम को सर्वथा  बन्द कर दिया तथा  देश में कार्यरत 6.5लाख कर्मी प्रेरक समन्वयक को  सेवामुक्त कर जघन्य अपराध तथा देश के आवाम के साथ गद्दारी किया है।
      आसन्न लोक सभा चनाव में NDA उम्मीदवार को करारी हार दिलाने के लिए 6.5 लाख साक्षरता कर्मी के पीड़ित परिवार दृढ संकल्पित होकर विरोध करने निर्णय लिया है।
  नागेन्द्र कुमार पासवान
मुख्य कार्यक्रम समन्वयक
सीतामढ़ी सह-संगठन मंत्री
भारतीय मजदूर संघ सीतामढ़ी।

Tuesday, April 02, 2019

ठनका गिरने से एकडण्डी स्थित ट्रांसफॉर्मर जला

31 मार्च की संध्या ठनका गिरने से प्रखण्ड परिहार ,परिहार उत्तरी पंचायत के ग्राम एकडण्डी में स्थित ट्रांसफार्मर पर ठनका गिरा जिस से ट्रांसफॉर्मर जल गया।ट्रांसफार्मर के जल जाने से बिजली की आपूर्ति उक्त ग्राम में बाधित हो चुकी है।ट्रांसफॉर्मर के बदलने की दिशा में अभी तक कोई प्रगति नहीं दिखाई पड़ रही है।बिजली की आपूर्ति बाधित होने की वजह से लोगों के समक्ष समस्या उतपन्न हो चुकी है।

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सामान्य(मुस्लिम)जाति के शिक्षा स्वयं सेवी(तालीमी मरकज़) को हटाने से संबंधित निर्णय को वापस ले सरकार वरना सड़क से लेकर संसद तक होगा आंदोलन :- मोहम्मद कमरे आलम

आठ वर्षों से कार्य कर रहे सामान्य मुस्लिम जाति के शिक्षा स्वयं सेवी(तालीमी मरकज़) को एक झटके में बिहार सरकार द्वारा सेवा से यह कह कर हटा दिया...