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Friday, September 06, 2019

वर्तमान शिक्षा प्रणाली को स्थापित करने वाले देश के प्रथम शिक्षा सुधारक हाजी मोहम्मद मोहसिन


वर्तमान शिक्षा प्रणाली को स्थापित करने वाले देश के प्रथम शिक्षा सुधारक हाजी मोहम्मद मोहसिन पर चर्चा:

वंदे मातरम आंनद मठ में एक कविता है, आंनद मठ के लेखक बंकिम चन्र्द चटर्जी हैं, बंकिम चन्द्र चटर्जी ने हुगली मोहसिन कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की थी, हुगली मोहसिन कॉलेज के संस्थापक का नाम है "हाजी मुहम्मद मोहसिन" है। हाजी मुहम्मद मोहसिन की पैदाइश 1732 में हुआ था, हाजी मोहम्मद मोहसिन बंगाल के बड़े परोपकारी (philanthropist) है। उन्होंने 1806 में एक ट्रस्ट बनाया था, उस ट्रस्ट में अपनी कुल संपत्ति एक लाख छप्पन हजार टका के दान के लिए एक वसीयतनामा बनाया था, जिसके आधार पर एक वक़्फ़ बना, अपनी संपत्ति का एक तिहाई शिक्षा और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए दान किया था। शिक्षा के छेत्र में उनका योगदान सबसे बड़ा और सबसे पुराना है। हाजी मोहसिन कॉलेज चिंसुरा, हुगली, पश्चिम बंगाल हो या हाजी मोहसिन कॉलेज खुलना (बंगला देश) यह सब कॉलेज देश के प्रथम स्थापित होने वाले कॉलेज में से है। जब न तो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, न तो बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, न तो यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास और न ही यूनिवर्सिटी ऑफ मुम्बई का कोई एक ईंट भी लगा था, और न ही इसपर कोई चर्चा थी। उस से कई साल पहले हाजी मोहम्मद मोहसिन ने 40 एकड़ जमीन सरकार को बी एल कॉलेज खुलना (बंगलादेश) में दिया था। पश्चिम बंगाल के हुगली स्थित हाजी मोहसिन कॉलेज देश मे बड़े बड़े प्रतिभावों को दिया है।

हाजी मोहम्मद मोहसिन देश के प्रथम शिक्षा सुधारक में से एक अग्रणी शिक्षा सुधारक थे, इनके जीवनी एवं योगदान पर बाद में विस्तार से चर्चा होगी। आज जब शिक्षक दिवस के नाम पर लोग इनके योगदानों को भूल चुके हैं तब मैं आपको इनके योगदान को याद दिला रहा हूँ चुंकी कई स्कूल, कॉलेज के साथ साथ हाजी मोहम्मद मोहसिन के द्वारा स्थापित लाइब्रेरी "मुस्लिम इंस्टिट्यूट" कोलकाता में हमने भी अपने  महत्वपूर्ण तीन चार साल स्टडी में गुजारा है और आज भी हर साल हजारों छात्र छात्रायें मुस्लिम इंस्टीटूट में कोचिंग, लाइब्रेरी में स्टडी, रिफ्रेंस बुक के साथ साथ कई फायदे हासिल कर रहा/रही है।

हाजी मोहम्मद मोहसिन वर्तमान शिक्षा प्रणाली को स्थापित करने वाले देश के पहले शिक्षा सुधारक है जो 29 फरवरी 1812 को इस दुनिया फानी को अलविदा कह कर  चल दिये।

Mustaqim Siddiqui

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