Saturday, January 12, 2019

नागेन्द्र कुमार पासवान ने माननीय डा.रामचन्द्र पूर्वे सदस्य,बिहार विधान सभा को ईमेल भेज कर साक्षरता कर्मी के आवाज़ को सरकार के समक्ष रखने की, कि गुहार

नागेन्द्र कुमार पासवान ने माननीय डा.रामचन्द्र पूर्वे सदस्य,बिहार विधान सभा को ईमेल भेज कर साक्षरता कर्मी के आवाज़ को सरकार के समक्ष रखने की, कि गुहार 

सम्पूर्ण साक्षरता अभियान के तहत 15 + आयु वर्ग के असाक्षरों को साक्षर कर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संचालित केंद्र प्रायोजित अत्यंत महत्वकांक्षी साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम का कतिपय 31 मार्च 18 के बाद कार्यावधि विस्तार नहीं दिया गया।

      सर विदित हो कि राज्य सरकार द्वारा सृजित /स्वीकृत पद पर निष्क जन शिक्षा बिहार द्वारा अधिसूचित रोस्टर के आधार पर प्रधान सचिव शिक्षा विभाग बिहार के पत्रांक 402 दिनांक 3.2.2011नियुक्ति नियमावली में निर्धारित मापदण्डों /शर्तों एवम् सभी प्रक्रियाओ को पूरा कर प्रकाशित विज्ञापन /अंतर्वीक्षा /मेघासूची के आधार पर  चयन समिति द्वारा  19000 कर्मी प्रत्येक  जिला में 4 समन्वयक प्रत्येक ब्लॉक में दो समन्वयक एवम् प्रत्येक पंचायत में दो दो प्रेरक की संविदा आधारित नियुक्त की गई। वर्ष 2011 से लगातार अपने दायित्वों का कुशलता पूर्वक निर्वहन किया है।परिणाम स्वरूप साक्षरता दर में आशातीत सफलता मिली है। अपने मूल कर्तव्यों के साथ साथ सरकार के अन्य कल्याणकारी योजनाओ ,सामाजिक कार्यक्रमो में सक्रिय योगदान किया है।शिक्षा का अधिकार अधिनियम का नुककर नाटक दीवाल लेखन आदि के माध्यम से व्यापक प्रचार प्रसार किया फलतः दशकीय साक्षरता वृद्धि दर में सफलता  के लिए बिहार को राष्ट्रीय अवार्ड मिला !मदयमं निषेध अभियान का नोडल एजेंसी के रूप में प्रेरक समन्वयको ने उत्कृष्ट कार्य किया और बिहार को राष्ट्रीय अवार्ड दिलवाया।21 जनवरी 16 को विश्व विख्यात मानव् श्रृंखला का निर्माण कर बिहार का नाम लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड में दर्ज करवाया।
  मतदाता जागरूकता अभियान ,स्वच्छ्ता अभियान ,दहेज़ प्रथा एवम् बाल विवाह उन्मूलन अभियान में सक्रिय योगदान कर सफल बनाया।
सर अपनी जवानी का स्वर्णिम समय इन साक्षरता कर्मियो ने साक्षरता अभियान में समर्पित किया है।अब अधिकांश की उम्र  सीमा समाप्त हो गई है।किसी दूसरी सरकारी सेवा में नहीं जा सकता।
     भारत सरकार ने 31 मार्च 18 को साक्षर भारत मिशन का  मात्र अवधि विस्तार रोक दिए जाने के कारण निदेशक जन शिक्षा विहार ने बिहार के सभी कर्मियो को नियम विरुद्ध असंवैधानिक अमानवीय तरिका से कार्य मुक्त करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया है जिसके कारण बिहार के 19000 हजार अल्प मानदेय भोगी बेरोजगार भुखमरी  जिल्लत और जलालत की जिंदगी जीने को विवस है।यद्रयपी केंद्र सरकार ने  योजना बाइण्डप करने  की आधिकारिक निर्देश  राज्य सरकार को नहीं दिया है नहीं दिया है और ना ही नियमतः नियोजन ईकाई द्वारा किसी कर्मी को सेवा मुक्ति का आदेश पत्रक ही हस्तगत कराया है। कर्मी को अपना पक्ष रखने का मौक़ा दिए बिना  कारण पृक्षा किये बिना जबरदस्ती कर्मी को प्रभार मुक्त करने का एकतरफा आदेश नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है।
    सर, भोजन वस्त्र और आवास के अतिरिक्त आज शिक्षा और स्वास्थ्य मानव की मौलिक आवश्यकता बन गई है।शिक्षा को मौलिक अध्मइकार का दर्जा दिया गया है। समवर्ती सूचि में होने के कारण सबको शिक्षा एवम् अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध करना राज्य और केंद्र सरकार की नैतिक जिम्मेवारी है।
    जन विरोधी राज्य सरकार की इच्छा शक्ति के अभाव के कारण  राज्य में प्रौढ़ साक्षरता कार्यक्रम को सर्वथा बन्द कर दिया गया है जिसका दूरगामी प्रतुकुल प्रभाव अनुसूचित जाति/पिछडिजाति/अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब वंचितो के विकास पर पड़ता है।
  सर  सरकार द्वारा राशि उपलब्ध करने के बावजूद अलप मानदेय भोगी प्रेरक समन्वयको का 26 माह का मानदेय भुगतान नहीं किया जा रहा है।
  सर, कर्मियो के समक्ष भुखमरी की स्थिति उतपन्न हो गई है। अर्थाभाव में इनके बच्चों की पढ़ाई बाधित है,अपने परिजनों का उचित इलाज नहीं करवा पाते है। पैसे के आभाव में कई  प्रेरक समन्वयक भूख के कारण असमय प्राण त्याग दिए।
संविदा कर्मियो की सेवा नियमितीकरण हेतु अशोक कुमार चौधरी की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति में भी निदेशक जन शिक्षा बिहार ने अनुसंशा हेतु इन कर्मियो की सुची नहीं भेजा।
        सर आप से सादर आग्रह निवेदन है कि कृपया उपरोक्त के आलोक में विधान सभा सत्र के दौरान विधान परिषद में प्रश्न के माध्यम से बिहार सरकार का ध्यान आकृष्ट कृते हुए इन प्रेरक समन्वइको की सेवा समायोजन/नियमिति करण हेतु सरकार से मांग करने की असीम कृपा किया जाए।
  बिहार में प्रौढ़ साक्षर कार्यक्रम हेतु वैकल्पिक साक्षरता कार्यक्रम चलवा  जाय।
   संविदा कर्मियो की सेवा नियमितीकरण हेतु  मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय कमिटी में अनुसंशा हेतु प्रेरक समन्वयकों की सूचि भेजने हेतु सरकार से मांग की जाय।
   प्रभारी जन विरोधी निदेशक जन शिक्षा बिहार को निदेशक पद के प्रभार से प्रभार मुक्त करने की मांग की  जाय।
     

खसरा रुबेल अभियान 15 जनवरी 2019 से

राष्ट्र व्यापी अभियान अन्तर्गत खसरा रूबेला का टीकाकरण 15 जनवरी से शुरू होगा ज़िला पदाधिकारी सीतामढ़ी ने अभीभावकों से अपील किया है कि 15 वर्ष तक के बच्चों को खसरा रूबेला का टीका ज़रूर दिलायें और दो बीमारियों से अपने बच्चों को सुरक्षा प्रदान करें

سابق مکھیا نور عالم خان چکوا ہزاروں نم آنکھوں سے کئے گئے سپرد خاک

سابق مکھیا نور عالم خان چکوا ہزاروں نم آنکھوں سے کئے گئے سپرد خاک

سیتامڑھی ( محمد ارمان علی)

سابق مکھیا نور عالم خان چکوا میں نم آنکھوں سے اپنے والد کے بغل میں سپرد خاک کئے گئے اس موقع پر ہزاروں لوگ موجود تھے جس میں سابق وزیر اخلاق احمد خان، سابق ایم ایل اے عبید اللہ، جے ڈی یو لیڈر شاداب خان، آفتاب انجم بہاری، آفتاب عالم، معروف صحافی اشتیاق عالم،خالد خان ڈاکٹر ساجد علی خان، عارف خان، انجینئر طارق علی خان، ارمان علی صدر عالم نعمانی، اشتیاق عالم تسلیمی انصاری ، محمد ریاض اللہ خان، راشدفہمی انصاری وغیرہ کے اسماء قابل ذکر ہیں ۔

तीसरे मोर्चों को सत्ता में आने की ज़रूरत, मगर अपनी कमजोरी के कारण नही आ पाते- महज़बीं

तीसरे मोर्चों को सत्ता में आने की ज़रूरत, मगर अपनी कमजोरी के कारण नही आ पाते- महज़बीं


तीसरे मोर्चों की कमियों के कारण ही तो, भारत में सिर्फ और सिर्फ कॉग्रेस - बीजेपी राज करती आई है, और करती रहेगी, भारत के तीसरे मोर्चे बहुत कमजोर, बेअक़ल, सुस्त, अहसासे कमतर, मौन व्रत रखने वाले हैं। भाग्य में विश्वास रखते हैं, कर्म में नहीं। जनमत इकट्ठा करने में विफल रहे हैं। सब होता है इनसे, तरह - तरह के आयोजन, सेमिनार, विरोध प्रदर्शन, सिर्फ विश्वविद्यालयों तक सीमित रखते हैं। अपनी आवाज़ के दायरे को बड़ा नहीं करते हैं, जनमत जबतक हासिल नहीं करते, तबतक सब बेक़ार है, और जनमत सिर्फ महानगरों, युनिवर्सिटी कॉलेज के विद्यार्थियों प्रवक्ताओं का नहीं चाहिए होता, वो तो मुट्ठी भर हैं, सत्ता में आने के लिए निम्न, मध्य, उच्च स्तरीय अवाम के जनमत की भी आवश्यकता है, जिसके लिए यूनिवर्सिटीज के सेमीनार हॉल की कुर्सीयों को छोड़कर अवाम के बीच आना होगा, सड़कों, नुक्कड़ों, गांव - गांव, शहर - शहर, छोटे - बड़े कस्बों में, आम आदमी, अनपढ़ आदमी, मज़दूर आदमी, तक अपनी आवाज़ पंहुचना है। आजादी के 65/66 सालों में भी ग़रीब, मज़दूर, मज़लूम कम्युनिस्ट, सोशलिस्ट नामों से, पार्टियों से इनके विचारों से वाकिफ नहीं हैं ।


विचारों को व्यक्त तो सभी करते हैं। बात तब बनेगी जब यह विचार उन तक पहुंच सकें और लोग इन अच्छे विचारों को जान सकें ।  
कहीं न कहीं अवाम भी जिम्मेदार है तीसरे मोर्चों की नाकामयाबी के लिए। यहां राय बहादुर तो सब हैं। फर्माबरदार कितने हैं? 
हालात  तो सभी बदलना  चाहते हैं। सरकार बदलते नहीं। तीसरी ताकतों को सेन्टर में लाते नहीं। इनके पास दो कुर्ते हैं (कॉंग्रेस, बी. जे. पी )  पहनने को। एक उतारा दूसरा पहन लिया, दूसरा उतारा पहला पहन लिया। कपड़े रोज बदलते हैं। फेसबुक, वटसप प्रोफाइल भी 15 दिन में बदल देतें हैं। एक पिक्चर देखेंगे बस मन भर जाता है। कांग्रेस, बी. जे. पी, से मन नहीं भरा। 
लोग क्यों देते हैं इन दो पार्टियों को वोट।  चुनाव में तीसरी पार्टी के लोग मेहनत करने के बावजूद सफल नहीं हो पाते।
इस नाकामयाबी पर बहुत आत्ममंथन की आवश्यकता है, तीसरी पार्टी के लोगों को और मेहनत करनी है। परम्परागत बने बनाए ढाँचे को तोड़ना होगा।  अपनी पार्टी के बारे में अवेयरनेस फैलानी पड़ेगी, टीवी, रेडियो, इंटरनेट, नुक्कड़ नाटक। के द्वारा। और उनके बीच जाना होगा। 


तीसरे मोर्चे की पार्टियों, विचारों से सिर्फ साहित्य, इतिहास, राजनीति विज्ञान के अध्यापक और क्षात्र क्षात्राएं ही अच्छी तरह से वाकिफ हैं। लेकिन अफसोस अब शिक्षा भी प्रोफेशनल होती जा रही है। क्योंकि लेंग्वेज, हिमेनुटी की पढ़ाई में रोजी- रोटी नहीं। और ये इंसान की बुनियादी ज़रूरत है। इसलिए सब प्रफेशनल   शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं। यानी आगे आने वाली पीढ़ी  इन विचारों,पार्टियों से बिल्कुल ही अपरिचित रहेगी। 
अगर हिन्दुस्तान की राजनीति में बदलाव लाना है, समाज में बदलाव लाना है। तो इन तीसरी ताकतों को भी केजरीवाल, आंगनबाड़ी, की तरह लोगों के बीच में रहकर काम करने की ज़रूरत है।और हक़ीक़त भी यही है कि, आम आदमी, ग़रीब, मज़दूर के  बिना सत्ता में कोई भी नहीं आ सकता है। 


ग़रीब अनपढ़ लोगों के तीसरे मोर्चों से नावाकिफ़ होने के कारण, कम्युनिस्ट- सोशलिस्ट विचार, युनिवर्सिटी, कुछ पत्रिकाओं, अख़बारों में ऊपर - ऊपर तैरते रहते हैं , निचे तह तक तो जाते ही नहीं है। और कामयाबी के लिए निचले स्तर पर, सतह पर आना ही होगा। और यही अबतक नहीं हुआ। तैरने के साथ - साथ चलने की भी ज़रूरत है। बुद्धिजीवियों को समझना चाहिए। अब नहीं समझ रहे हो तो, कौनसे वक्त में समझोगे? यह भी सत्य है कि आज की तारीख़ में, सोशल नेटवर्किंग और सोशल मीडिया के बग़ैर जनमत नहीं इकट्ठा किया जा सकता है लेकिन, फिर भी बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो अनपढ़ हैं, उनतक अपनी आवाज़, विचारों को पंहुचने के लिए, सोशल मीडिया और युनिवर्सिटी से बाहर आईये, बहुत कुछ बाहर ही है। लेख, कविता पर टिप्पणी, पुरस्कार, तालियां बटोरने से ज्यादा ज़रूरी, जनमत बटोरने की ज़रूरत है,  उदाहरण के तौर पर, पोलियो की दँवाई पिलाने वालों की तरह, हर एक घर के दरवाज़े तक जाने की ज़रूरत है, सिर्फ अस्पताल में दँवाई पिलाने से पोलियो कंट्रोल नहीं हुआ है। पोलियो अभियान के सेवाकर्मी की तरह काम करने की ज़रूरत है, तीसरे मोर्चों को। साठ साल हो गए भारत की आवाम के सामने, दो ही बड़े विकल्प हैं, सियासी पार्टी के नाम पर, कॉग्रेस - बीजेपी, जनता भी मज़बूरी में इन्हीं दो विकल्पों को पक्ष- विपक्ष के लिए चुनती रहती है। करोड़ों अरबों वोटर अनपढ़ हैं, ग़रीब मज़दूर वर्ग से हैं, उनके दिल - दिमाग़, सूझबूझ में समाईये, 


तीसरी ताकत के बुद्धिजीवी... अपनी भाषा को सरल आम बोलचाल में... कहें प्रतीक बिंबो के प्रयोग के बिना... क्योंकि इस तरह की भाषा में मेसिज सिमित रहता है। वोटरों के ऊपर से जाता है। ज़रा राष्ट्रीय उर्दू सहारा, जनसत्ता की  भाषा पर ध्यान दें। वो हर तबके के आदमी तक नहीं पहुंच पाती। और वोट हर इंसान का कीमती होता है। विज्ञापन वालों से सीखे कैसे अपनी बात को हर ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। भाषा ही एक मात्र सबसे बड़ा साधन है, जनमत इकट्ठा करने के लिए।और ग़रीब, आम आदमी के  सामने विकल्प के तौर पर पेश तो होइये, तभी तो वो वोट देंगे ।


मेहजबीं


एक्सा सिविल कोड लागू करने की साज़िश

एक्सा सिविल कोड लागू करने की साज़िश

मो●कमरे आलम

हमारा मुल्क जम्हूरी है, यहाँ हर शख्स को धार्मिक आज़ादी हासिल है सरकार या अदालत की जानिब से मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तछेप और समाजी सुधर के बहाने पर्सनल लॉ में परिवर्तन की इजाज़त नहीं दी जा सकती।तीन तलाक़ और बहुविवाह मुस्लिम पर्सन्नल लॉ का लाज़मी हिस्सा है इसमें किसी तरह का परिवर्तन ना मुमकिन है।शरीयत पर अम्ल करना आइनी हक़ूक़ और सेकुलरिज्म के खिलाफ कैसे हो सकता है, जबकि भारतीय संविधान में हर बाशिंदे को अपने धर्म के मुताबिक अम्ल की आज़ादी दी गई है।तीन तलाक़ और बहुविवाह क़ुरान वो सुन्नत से साबित हैं और यह इस्लामी शरीयत का लाज़मी जुज़ है।मुल्क की अदालत आलिया ने पहले भी कई मसाएल में पर्सनल लॉ के मुताबिक फैसले कर चुकी है।ज़ेरे बहस मसाएल में यही रवैया अख्तेयार करने की ज़रूरत है ।यह किसी तरह मुनासिब नहीं कि केंद्रीय सरकार या अदालते आलिया की किसी कार्रवाई से किसी भी तबक़ा में बे इतमीनानी पैदा हो और उसे वह अपने पर्सनल लॉ और धार्मिक कार्यों में हस्तछेप समझें, क्यों कि हिंदुस्तान के कानून ने सभी धर्मों और समुदाय को अपने धर्म के अनुसार ज़िन्दगी गुजरने का हक़ देता है।इन हालात में मुस्लिम पर्सनल लॉ मे किसी तरह की कोई परिवर्तन ना क़ाबिले क़बूल है।

बीजेपी की क़यादत वाली केंद्रीय सरकार का गुप्त एजेंडा अब खुल कर सामने आने लगा है और एक्सा सिविल कोड के लागू करने की राह हमवार करने के लिए हक़ूमत ने मुल्क की सबसे बड़ी अकलियत यानि मुसलमानों के पर्सनल लॉ में हस्तछेप करते हुए तीन तलाक़ और बहू विवाह के विरुद्ध अपनी राय ज़ाहिर की है।मुल्क में आज़ादी के बाद यह पहला मौक़ा है जब केंद्रीय सरकार ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के विरुद्ध इतना आक्रामक रुख अख़्तेयर किया है।तीन तलाक़ और बहू विवाह से सम्बंधित उच्चतम न्यायालय में केंद्रीय सरकार के दुयारा पेश की गई राय ना क़ाबिले क़बूल है ।मुसलमानों के लिए क़ुरान और हदीस ही सबसे बड़ा नियम है और धार्मिक कार्यों में शरीयत ही रहनुमा वसूल है जिस में क़यामत तक कोई संशोधन मुमकिन नहीं और समाजी सुधार के नाम पर शरीयत में कोई परिवर्तन नहीं की जा सकती।मालूम हो कि मोदी सरकार की ओर से उच्चतम न्यायालय में दाखिल शपथ पत्र में कहा गया है कि " पर्सनल लॉ के आधार पर मुस्लिम महिलाओं के कानूनी हक नहीं छीने जा सकते और इस सेक्युलर मुल्क में तीन तलाक़ के लिए कोई जगह नहीं है " ।।

             जमीयतुल ओलमा ए हिन्द इस मामले में बतौर फ्रीक़ अपनी राय उच्चतम न्यायालय में ज़ाहिर कर चुकी है कि मुसलमानों के धार्मिक कार्य क़ुरान व हदीस कि रौशनी में तय होते हैं और समाजी सुधार के लिए इसे दुबारा नही लिखा जा सकता और न ही रहती दुनिया इसमें कोई परिवर्तन मुमकिन है।धर्म के मामले में मुसलमानों के लिए क़ुरान और हदीस के अलावा और कोई नियम नही है।अदालत ने इस मामले में आवामी राय तलब किया है मुस्लमान मर्द व औरत से गुज़ारिश है कि वह विधि आयोग के सामने अपनी राय मज़बूती के साथ पेश करें ।दोस्तों केंन्द्रीय सरकार मुस्लिम पर्सनल लॉ में मुदाखलात कर समान आचार संहिता लागू करने की ओर बढ़ रही है जो इस कसीर मुल्क में संभव नहीं है।जिस समय मुल्क आज़ाद हुआ जमीयतुल ओलमा हिन्द ही मुसलमानों की सबसे बड़ी संस्था थी और उसने मुल्क की आज़ादी में साल्हा साल सक्रिय भूमिका निभाई थी।उस समय मुस्लमान नेताओँ ने महात्मा गांधी और पंडित नेहरू समेत सभी अहम् नेतओं से अस्पष्ट तौर से कह दिया था कि हम आपके साथ तब ही रह सकते हैं जब आप हमें अपने मुल्क हिंदुस्तान में धार्मिक आज़ादी के साथ रहने का कानूनी हक़ देंगें और इन्हीं शर्तों की बुनियाद पर उसवक़्त के नेताओं ने मुल्क का सेक्युलर क़ानून तैयार किया था और अल्पसंख्यकों को उनके धार्मिक कार्य करने की पुरी क़ानूनी आज़ादी दी गई थी।लेकिन वर्तमान सरकार मुल्क़ की सबसे बड़ी अल्पसंख्यक मुसलमानों के पर्सनल लॉ में बिला वजह हस्तछेप कर के मुल्क में समान आचार संहिता लागू करने की राह तैयार कर रही है।मालूम हो कि उच्चतम न्यायालय में  न्यायमूर्ति विक्रम सेन और न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह के द्वारा 15 दिसम्बर2015 को एक शो मोटो नोटिस जारी कर के यह जवाब तलब किया था कि "क्यों न समान आचार संहिता बनाया जाए "।जमीयतुल ओलमा ने 05 फरवरी 2016को इस मामले में intervenar बनने की अर्जी दी थी इस अर्ज़ी को मंज़ूर करते हुए उच्चतम न्यायालय ने छः हफ़्ते के अंदर आपत्ति और जवाब दाख़िल करने को कहा था उसी दौरान फरह फैज़ ने जमीयतुल ओलमा के रिट याचिका के विरूद्ध 28 फरवरी 2016 को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की।जिसका जवाब जमीयत ने 17 मार्च को दाख़िल किया और 28 मार्च को जमीयत की ओर से विस्तृत शपथ पत्र और इशू पर मुकम्मल राय दाख़िल किया गया और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी 02 दिसम्बर को उच्चतम न्यायालय के शो मोटो नोटिस के विरुद्ध अपनी आपत्ति जताई है।

परिहार प्रखंड कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जनाब मोहम्मद सऊद आलम को ज़िला अल्पसंख्यक कांग्रेस अध्यक्ष बनाये जाने की उठ रही निरन्तर माँग

सीतामढ़ी ज़िला के विभिन्न प्रखंडों से परिहार प्रखंड के कार्यकारी कांग्रेस अध्यक्ष जनाब मोहम्मद सऊद आलम को ज़िला अल्पसंख्यक अध्यक्ष बनाये जाने की निरंतर माँग की जा रही है।कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने माननीय अध्यक्ष बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी पटना, प्रदेश अध्यक्ष बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ पटना से माँग किया है कि सीतामढ़ी जिला के परिहार प्रखंड निवासी मोहम्मद सऊद आलम को ज़िला अल्पसंख्यक अध्यक्ष के पद पर मनोनीत किया जाए।श्री आलम जिला में बहुत ही मजबूत , कर्मठ ,ग्रास रूट के जमीनी कार्यकर्ता हैं।इनके नेतृत्व में कांग्रेस ज़िला में मज़बूत होगी।

Friday, January 11, 2019

भारत सरकार,सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सदस्य स्वामी सदानन्द महराज (महामंडलेश्वर) ने समाहरणालय विमर्श कक्ष में बैठक कर जिले के सफाई कर्मचारियो के सुविधायों एवं चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का लिया जायजा

सीतामढ़ी।राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग,भारत सरकार,सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता  मंत्रालय के सदस्य स्वामी सदानन्द महराज (महामंडलेश्वर) ने समाहरणालय विमर्श कक्ष में बैठक कर जिले के सफाई कर्मचारियो के सुविधायों एवम उनके लिए सरकार की चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का भी जायजा लिया।इसके पूर्व डीएम डॉ रणजीत कुमार सिंह ने माननीय सदस्य का स्वागत किया। जिले के नगर निकायों सहित अन्य सरकारी से स्थानों में नियुक्त दैनिक भोगी एवम नियमित सफाई कर्मियों की सामूहिक बीमा,नियमित मेडिकल चेकअप,उनके आवसंकी व्यवस्था,उनकी  बस्ती या आवासीय कॉलोनी में सामुदायिक भवन एवम सरकार की उनके लिए चलाई जा रही अन्य कल्याण कारी योजनाओ आदि का विस्तार से संमीक्षा किया।कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद विजय कुमार उपाध्याय ने नगर निकाय द्वारा सफाई कर्मियों के लिए उठाये गए कदमो की   जानकारी दी गई। माननीय सदस्य ने कहा कि सफाई कर्मचारियों  का साल में कम से कम तीन बार स्वास्थ्य जाँच अनिवार्य रूप से होनी चाहिये।इनका सामूहिक बीमा अनिर्वाय है।उक्त बैठक में डीडीसी प्रभात कुमार,कार्यपालक पदाधिकारी विजय उपाध्याय,डीपीआरओ परिमल कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी, डीपीओ आईसीडीएस चांदनी सिंह ,सिटी मैनेजर आदि उपस्थित थे।

25 प्रखंड शिक्षकों की सेवा समाप्त की गई ,वेतन के रूप में ली गई राशि के वसूली का बीइओ को आदेश

सीतामढ़ी।डीएम डॉ0 रंजीत कुमार सिंह के निर्देश पर बैरगनिया बीडीओ सह प्रखंड नियोजन इकाई के सचिव विजय कुमार मिश्रा ने 25 प्रखंड शिक्षकों  को सेवा मुक्त करते हुए बीईओ से शिक्षकों द्वारा ली गयी मानदेय की राशि वसूली का निर्देश दिया है।बीडीओ ने आदेश निर्गत कर बैरगनिया के प्रखंड शिक्षक नुसरत जहाँ,फिरदौश खानम,विजय शंकर शर्मा,उषा कुमारी,साजदा खातून,शहनाज बेगम,राजेन्द्र महतो,मनीषा कुमारी,नीलम कुमारी,रफत जहाँ, अहमद रेजा उस्मानी,गणेश कुमार,दीपा श्री,जितेंद्र कुमार रंजन,इनामुल्लाह,रेखा कुमारी,कुमारी पिंकी,एकरमुल्लाह,अर्चना कुमारी,रागनी कुमारी,हसिरा बेगम,नसरुल्लाह,रौशन तारा,ललिता कुमारी व अंजर कमाल को सेवा मुक्त किया है।मालूम हो कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बर्ष-2015 में बैरगनिया प्रखंड में बर्ष-2010 में हुई शिक्षक नियोजन में नियोजित 27 शिक्षकों पर बैरगनिया थाना में गलत तरीके से नियोजित होने की एफआईआर दर्ज कराते हुए सेवा मुक्त कर मानदेय की वसूली करने का निर्देश दिया था।इसी क्रम में डीपीओ स्थापना ने जमुआ मिडिल स्कूल के प्रखंड शिक्षक ऋषि कुमार को दोष मुक्त करार कर दिया वही ब्यूरो ने प्रखंड शिक्षिका रेणु कुमारी को दोष मुक्त कर दिया फलतः विरोधवासी पत्र प्राप्त होने के कारण मामला विभिन्न पदाधिकारियों की जांच,आरोपित शिक्षकों से स्पष्टीकरण पूछे जाने फिर उक्त मामले को शिक्षकों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में ले जाने के कारण आगे की करवाई को स्थगित कर दिया गया लेकिन 7 जनवरी 19 को डीएम ने बीडीओ को पत्र लिखा जिसमें उक्त वाद में शिक्षकों की जमानत याचिका खारिज होने की स्थिति में आरोपित 25 शिक्षकों को सेवा मुक्त करते हुए मानदेय की वसूली का निर्देश दिया था।बीडीओ ने सभी सम्बंधित शिक्षक के साथ-साथ विद्यालयों को भी आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।

साइबर क्रिमिनल सरगर्म होशियार रहें

इन दिनों साइबर क्रिमिनल सरगर्म हैं होशियार रहें और अपने बैंक खाते, आधार कार्ड, एटीएम कार्ड से सम्बंधित कोई जानकारी न दें।  +917633910458 से कॉल किया जाता है और नाम लेकर पूछता है कि आप फनाह बोल रहे हैं और जब कहा जाता है कि मैं बोल रहा हूँ तो कहा जाता है कि मैं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से बोल रहा हूँ आप ने scholarship के लिए जो अप्लाई किया था वह पैसा वेरिफिकेशन के अभाव के कारण नही भेजा जा पा रहा है।इसलिए आप आधार कार्ड नंबर एटीएम कार्ड का नम्बर वैलिडिटी डेट और cvv नम्बर दें।जो साइबर क्रिमिनल के झांसे में आकर दे देते हैं उस के बैंक खाते से राशि की निकासी कर ली जाती है इस लिए होशियार रहें ,सजग रहेंऔर साइबर क्राइमर से महफूज रहें।

जनगणना सर्वे का पारश्रमिक भुगतान अब तक नहीं, भुगतान की मांग

वर्ष 2016 में एनपीआर(जनगणना) का सर्वे ज़िले के सभी प्रखंडों में नियोजित शिक्षकों के माध्यम से करवाया गया था और प्रखंड विकास पदाधिकारी के जरिए पारश्रमिक का भुगतान नियोजित शिक्षकों को किया गया था परन्तु डुमरा, परिहार, रुन्नीसैदपुर, बथनाहा, मेजरगंज और बेलसंड प्रखंडों में पारश्रमिक का भुगतान अब तक नहीं किया गया है बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ सीतामढ़ी के जिलाध्यक्ष ने जिला प
दाधिकारी सीतामढ़ी को पत्र लिखकर बकाया पारश्रमिक भुगतान कराने की मांग की है।
ज़िला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना सीतामढ़ी ने पत्र निकाल कर सभी प्रखण्ड विकास पदाधिकारी सीतामढ़ी को नियमानुसार जनगणना सर्वे का पारश्रमिक भुगतान का आदेश दे दिया है।

प्रारंभिक शिक्षा में शिक्षकों की की भूमिका

प्रारंभिक शिक्षा में शिक्षकों की की भूमिका :-
मोहम्मद कमरे आलम
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प्रारंभिक शिक्षा में शिक्षकों की महत्ता से इंकार नही किया जा सकता है।शिक्षक बच्चों के मेमार (बनाने ) होते हैं अगर यह कहा जाए कि शिक्षक ही अच्छे समाज के निर्माता हैं तो यह ग़लत नही होगा ।दुनिया में जब इंसान बच्चों की तर्बीयत के मामलों में मायूस हो जाते हैं तो दो ही शख्सियत ऐसी होती हैं जो कभी भी बच्चों के भविष्य से मायूस नही होती " माॅ और शिक्षक "माँ और उस्ताद बच्चे से बिल्कुल मायूस नही होते हैं बच्चा कैसा भी हो, शरीर हो या मंद बुद्धि उसे शिक्षण- प्रशिक्षण से स्वांरते हैं।अगरचे छोटे बच्चों की तालीम व तर्बियत करने का काम बड़ा कठिन होता है।माँ तो माँ होती है मगर उस्ताद भी माँ से कुछ कम नहीं होते स्कूल मदारिस में प्रारंभिक शिक्षा मे उस्ताद का किरदार बहुत ही अहमियत का हामिल होता है किसी ने ठीक ही कहा है कि"बाप औलाद को आसमान से ज़मीन पर लाता है मगर उस्ताद उसे ज़मीन से आसमान की बुलंदियों पर पहुंचा देता है।यक़ीनन उस्ताद सही तालीम व तर्बियत से तलबा को ऊँचे व बुलंद मक़ाम पर पहुँचाने मे मददगार हैं।लेकिन यही उस्ताद अगर अपने फ़र्ज़ में कोताही करते हैं तो बच्चे की ज़िन्दगी तबाह व बर्बाद हो सकती है उसकी रहनुमाई तालीम व तर्बियत पर मुनहसिर करती है।
                 प्रारंभिक शिक्षा मे शिक्षकों का किरदार अहम् और काफी अहमियत का हामिल होता है।अच्छे उस्ताद तालबे इलमों की अच्छी तर्बियत करते हैं और उनके खूबियों को मंज़रे आम पर लाते हैं।उस्ताद को अपने फ़र्ज़ मंसबी को ईमानदारी व सच्चाई के साथ पाये तकमील पहुंचानी चाहिए किसी भी नाज़ुक हालात में तंग नज़री का शिकार नही होनी चाहिए क्योंकि फ़र्ज़ से कोताही का असर छात्रों के ज़िन्दगी बर्बाद कर देने का बायस बन जाएगा।बच्चे बड़ो की नक़्ल व तक़लीद करते हैं और अपने उस्ताद को मिसाली समझ कर पैरवी करते हैं उसकी शख्सियत से मुतास्सिर होते हैं।इसलिए उस्ताद की शख्सियत बहुत ही खुबियों की हामिल होनी चाहिए।एक अच्छा उस्ताद एक अच्छे साफ व सुथरे सेहत मंद मुयासरः की तश्किल करता है। जब तलबा अपने उस्ताद की सलाहियत और काम के मुताल्लिक़ वाकिफ हो जाते हैं तो उसकी अज़मत और मर्तबा के गर्विदा हो जाते हैं और अपने लायक़ व फाएक उस्तादों को कभी फ़रामोश नही कर पाते हैं यह नक़्श अनमिट हो जाते हैं यही वजह है कि बच्चे अपने अच्छे उस्तादों को हमेशा याद किया करते हैं।

              आलमी सतह पर भी यह बात मुसम्मम है कि हर दौर में उस्ताद(सिखलाने वालों) की अहमियत रही है और ता क़यामत रहेगी इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता।दौरान ए इब्तेदाई तालीम हमारे उस्तादों को वसाइल की कमी होती है इस बात से इंकार नही किया जा सकता है वक़्त से शासन प्रशासन की जानिब से दरसी किताबें दस्तयाब नही कराई जाती हैं और हम खामोश तमाशाई बन कर देखते रहते हैं और अपने बच्चों को दूसरी ज़ुबान में शाया किताबों के तवस्त से इब्तेदाई तालीम देना शुरू कर देते हैं जो सरासर ग़लत है हम इस मामला में बेहिस हो जाते हैं और सरकार के ख़िलाफ़ एहतेजाज नही करते "जबकि "आवाज़" जब भी एहतेजाज की दीवार से टकराती है तो गूँज बनकर फैल जाती है लेकिन जब कोई रद्दे अम्ल ही नही होगा तो आवाज़ गूँज बन कर कैसे फैलेगी, अब वक़्त गया----–-कोने में बैठ कर बात करने से बात नहीं बनेगी बल्कि अपनी आवाज़ एकतदार ए हकुमत तक पहुंचानी होगी।

               उर्दू ज़ुबान क़ो किसी मज़हब से जोड़ कर नही देखा जा सकता यह एक सेक्युलर ज़ुबान है।सरकार की यह ज़ेम्मेदारी बनती है कि वह ज़ुबानों की हिफाज़त करें और बच्चों को उनकी मादरी ज़ुबान में तालीम दे उर्दू को ज़ो आइनी दर्जा हासिल है सिर्फ उस से काम नहीं चलेगा अमली एकडेमत करने की ज़रूरत है।जिस तरह ईमारत कि मज़बूती के लिए मज़बूत बुनियाद की ज़रूरत होती है उसी तरह अच्छे और एखलाकी नज़रिये से सेहत मंद मुयासरे की बुनियाद हमारे बच्चे हैं।हर बच्चा नई नस्ल का फर्द होता है और उसकी सही तालीम व तर्बियत हमारे मुयासरे का ढांचा खड़ा रहता है।इसलिए बच्चों की तालीम व तर्बियत और ज़ेहन साजी का काम उस्तादों को सालेह असूलों की बुनियाद पर उस्ताद के साथ साथ वाल्दैन व सरपरस्त और ज़ेम्मेदारों का फ़रीज़ा है।बच्चों का ज़ेहन गीली मिट्टी की तरह होता है उस पर बचपने में जो नकुश सब्त होते हैं वह कभी ज़ाएल नही होते।
         
                    उर्दू अदब की बुनियाद गंगा जमुनी तहजीब पर क़ायम है जो मिल्ली रवादारी ,बाहमी अखुत और शाइस्तगी का दर्स देता है।जब उर्दू में अदब तख़लीक़ हो रहा था तो उस वक़्त मुसलमानों के साथ हिन्दू भी क़लम के जौहर दिखाए आज़ादी के बाद उर्दू ज़ुबान व अदब को मुसलमानों की ज़ुबान क़रार देकर इस सेक्युलर ज़ुबान से पल्ला झाड़ लिया ।उर्दू उस्तादों का फ़र्ज़ है कि बच्चों को मादरी ज़ुबान उर्दू में ही प्ररंभिक तालीम दें।मुसलमानों का ज़यादा तर अदब उर्दू ज़ुबान में ही है इसलिए बच्चों को अखलाक़यात के साथ दीन की भी तालीम हासिल होगी और ज़ुबान के बक़ा और फ़रोग़ का रास्ता भी हमवार होगा दूसरा फायदा ये होगा कि दीनी तर्बियत होने से वह एक अच्छे शहरी बन सकेंगें।बच्चों के साथ मुहब्बत का रवैय्या अख़्तेयर करें उसको यह हौसला दीजिए कि वह हमेशा बहादुरी का मुज़ाहरा करें उसे सिखलाइये कि वह अपनी ज़ात में हमेशा यक़ीन की क़ूवत बरक़रार रखें, बच्चे को हसद से दूर रखें ।
"इस्लाम ने कहा है कि अगर कोई नादारी व आजज़ी के बावजूद सदक़ा का अजर लेना चाहता है वह जो इल्म सीख है वह औरों को सिखलाए तो उसका शुमार सदक़ा देने वालों में होगा।"
              

       

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